
कर्नाटक के सियासी गलियारों में चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। राज्य में सत्ता के बड़े बदलाव (लीडरशिप रीसेट) की स्क्रिप्ट पूरी तरह तैयार हो चुकी है। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब सूबे की कमान उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के हाथों में आना पूरी तरह तय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार आगामी 3 जून 2026 को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं।
बेंगलुरु में आज शाम 4 बजे CLP की बैठक, दिल्ली से आ रहे दिग्गज
कर्नाटक के इस सियासी घटनाक्रम में आज (30 मई) का दिन सबसे अहम है। आज शाम ठीक 4 बजे बेंगलुरु के विधान सौध के सम्मेलन कक्ष में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक औपचारिक और बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। कांग्रेस विधायक दल के सचिव ए. पाटिल ने सभी पार्टी विधायकों को इस बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का पत्र भेजा है। इस पूरी कवायद की कमान आलाकमान ने अपने हाथ में रखी है, जिसके चलते अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के वरिष्ठ पर्यवेक्षक केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला खुद बेंगलुरु पहुंचकर इस बैठक की निगरानी करेंगे। बैठक में विधायकों द्वारा औपचारिक रूप से डीके शिवकुमार को नया नेता चुना जाएगा, जिसके बाद वह राज्यपाल थावरचंद गहलोत के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
अकेले शपथ नहीं लेंगे डीके शिवकुमार, 10 मंत्रियों की भी खुलेगी लॉटरी
कर्नाटक कांग्रेस में चल रहे इस सबसे बड़े ‘रीसेट’ के तहत सत्ता हस्तांतरण के साथ ही मंत्रिमंडल की रूपरेखा भी साफ हो गई है। 3 जून को होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में डीके शिवकुमार अकेले शपथ नहीं लेंगे। सरकार के पहले चरण में उनके साथ करीब 8 से 10 नए मंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद पूरे मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद किया जाएगा।
‘कमराज प्लान’ के तहत कटेगा पुराने मंत्रियों का पत्ता, 50% नए चेहरों को मौका
डीके शिवकुमार की अगुवाई में बनने जा रहा कर्नाटक का नया मंत्रिमंडल इस बार पूरी तरह बदला-बदला नजर आने वाला है। पार्टी आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार में नई ऊर्जा और ताजगी लाना चाहती है। इसके लिए दो बड़े रणनीतिक बदलाव किए जा रहे हैं:
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50% नए चेहरे: नए मंत्रिमंडल में करीब आधे मंत्रियों के पद पर बिल्कुल नए और युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी है।
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संशोधित कमराज प्लान: जो मंत्री पिछले तीन साल या उससे अधिक समय से सरकार में बने हुए हैं, उन्हें कैबिनेट से हटाकर पार्टी संगठन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है ताकि वे जमीनी स्तर पर कांग्रेस को मजबूत कर सकें।
जातीय समीकरण साधने के लिए बन सकते हैं 4 उपमुख्यमंत्री!
कर्नाटक एक ऐसा राज्य है जहां सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण बेहद मायने रखते हैं। सिद्धारमैया के जाने के बाद पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) को साधे रखने के लिए कांग्रेस आलाकमान एक बड़ा दांव खेलने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो राज्य में क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय संतुलन को बरकरार रखने के लिए एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 4 उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) नियुक्त किए जा सकते हैं। आज शाम होने वाली सीएलपी की बैठक के बाद इन सभी नामों पर से पूरी तरह पर्दा उठ जाएगा।
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