समंदर जैसी गहरी हैरानगी: जब तंजानिया के इस प्राचीन कबीले ने पहली बार शीशे में देखा अपना चेहरा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

आज के डिजिटल युग में जहां लोग हर रोज दर्जनों बार आईने में अपना चेहरा देखते हैं, फोन से सेल्फी लेते हैं और अपनी खूबसूरती को निहारते हैं, वहीं इस धरती पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए एक मामूली शीशा भी किसी जादुई या डरावनी चीज जैसा है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो खूब सुर्खियां बटोर रहा है, जिसे देखकर लोग हंस भी रहे हैं और इंसानी सभ्यता के इस पहलू को देखकर हैरान भी हैं। यह वाकया अफ्रीका के तंजानिया के जंगलों में रहने वाले ‘हड़जाबे’ (Hadzabe) कबीले का है, जहां के लोगों के सामने जब पहली बार एक शीशा ले जाया गया, तो उनकी प्रतिक्रिया देखने लायक थी।

शीशे को समझ बैठे दुश्मन, उठाने लगे पत्थर

वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि जब एक यूट्यूबर या गाइड ने कबीले के एक व्यक्ति के सामने आईना रखा, तो वह बुरी तरह घबरा गया। जैसे ही उसने कांच के भीतर एक दूसरे इंसान को हूबहू अपनी तरह हरकत करते देखा, वह डरकर दो कदम पीछे हट गया। कबीले के कुछ अन्य लोगों को लगा कि यह कोई जादुई हथियार है या फिर कोई दूसरा इंसान उनके क्षेत्र में घुस आया है।

हैरानगी और डर का आलम यह था कि एक शख्स ने तो सामने दिख रही अपनी ही परछाई को दुश्मन मान लिया और उस पर हमला करने के लिए जमीन से पत्थर उठा लिया। बाद में जब टीम के लोगों ने उन्हें इशारों से समझाया कि यह कोई दूसरा इंसान नहीं बल्कि उनका अपना ही चेहरा है, तब जाकर उनका गुस्सा शांत हुआ और उनकी आंखों में छिपी हैरानगी और ज्यादा बढ़ गई। वे बार-बार शीशे के पीछे हाथ डालकर देख रहे थे कि कहीं कोई छुपा तो नहीं है।

कौन हैं हड़जाबे और क्यों इतनी अलग है इनकी दुनिया?

हड़जाबे कबीले के लोगों को अफ्रीका के सबसे पुराने और अंतिम शिकारी-संग्राहक (Hunter-Gatherer) समुदायों में से एक माना जाता है। ये लोग उत्तरी तंजानिया की याेडा घाटी और लेक एयासी (Lake Eyasi) के आसपास के घने जंगलों में हजारों सालों से रह रहे हैं। आज जब दुनिया चांद और मंगल पर बस्तियां बसाने की सोच रही है, तब भी यह कबीला आधुनिक सुख-सुविधाओं, मोबाइल, बिजली और कपड़ों से दूर आदिम दौर की तरह अपनी जिंदगी जी रहा है।

  • तीर-धनुष से शिकार: इस कबीले के पुरुष आज भी भोजन के लिए किसी दुकान या खेती पर निर्भर नहीं हैं। वे हर सुबह तीर-कमान लेकर निकलते हैं और जंगली जानवरों का शिकार करते हैं। वहीं कबीले की महिलाएं जंगल से कंदमूल, फल और जंगली शहद इकट्ठा करती हैं।

  • अनोखी भाषा: इनकी भाषा दुनिया की बाकी भाषाओं से बिल्कुल जुदा है। ये आपस में बात करने के लिए शब्दों से ज्यादा ‘क्लिक’ (मुंह से अलग-अलग तरह की आवाजें निकालना) का इस्तेमाल करते हैं।

  • सिमटती आबादी: कभी हजारों की संख्या में रहने वाले इस कबीले की आबादी अब घटकर मात्र 1200 से 1300 के बीच रह गई है। इसमें से भी केवल 300 से 400 लोग ही ऐसे बचे हैं जो पूरी तरह से अपनी पुरानी और पारंपरिक जीवनशैली को जी रहे हैं, जबकि बाकी लोग धीरे-धीरे आधुनिक गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।

आधुनिक दुनिया का दखल और कबीले का संघर्ष

पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया, यूट्यूबर्स और पर्यटकों के बढ़ते दखल के कारण बाहरी दुनिया के लोग इनके करीब पहुंचने लगे हैं। अक्सर लोग इनके पास जाते हैं और इन्हें चश्मा, घड़ी या शीशे जैसी चीजें दिखाकर उनकी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड करते हैं। ये वीडियो इंटरनेट पर मनोरंजन का साधन तो बनते हैं, लेकिन साथ ही यह एक गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं कि क्या हमें इन प्राचीन कबीलों की प्राकृतिक जिंदगी में दखल देना चाहिए?

आज हड़जाबे समुदाय अपने अस्तित्व को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है। तंजानिया में बढ़ती खेती, जंगलों की कटाई और सरकार द्वारा बनाए जा रहे वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों के कारण इनका शिकार करने का दायरा लगातार छोटा होता जा रहा है। सरकार इन्हें पक्के मकान देकर शहरों या गांवों में बसाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ये लोग अपनी आजाद जंगली जिंदगी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

वैज्ञानिकों और मानवशास्त्रियों (Anthropologists) का मानना है कि हड़जाबे जैसे कबीले हमारे मानव इतिहास को समझने के लिए एक जिंदा किताब की तरह हैं। उनके रहन-सहन, खान-पान की आदतों और बिना किसी बीमारी के इतनी कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की शारीरिक क्षमता का अध्ययन करके आधुनिक दुनिया यह सीख सकती है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर कैसे जिया जाता है।