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Sugar Stock Holding Limit: त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! चीनी स्टॉक रखने की सीमा 15 से बढ़ाकर हुई 30 दिन

आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों, पैकेज्ड फूड, बेवरेजेस और कन्फेक्शनरी उत्पादों की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी उद्योग और बड़े उपभोक्ताओं के हित में बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (Department of Food and Public Distribution) ने थोक एवं औद्योगिक चीनी उपभोक्ताओं (Bulk Consumers) के लिए चीनी का स्टॉक रखने की वैधानिक सीमा को 15 दिनों से बढ़ाकर सीधे 30 दिन यानी दोगुना कर दिया है।

अक्टूबर से शुरू होने वाले फेस्टिव सीजन में घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत न हो, आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध बनी रहे और मांग में अचानक उछाल आने पर कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी न देखने को मिले, इसी संतुलन को साधने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने यह अधिसूचना जारी की है।

सरकार के इस संशोधन का सबसे बड़ा लाभ उन बड़े औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मिलेगा जो कच्चे माल के रूप में बड़े पैमाने पर चीनी की खपत करते हैं:

  • 10 मीट्रिक टन से अधिक खपत वाले बल्क कंज्यूमर्स: वे सभी व्यावसायिक इकाइयां और फैक्ट्रियां जो प्रति माह 10 मीट्रिक टन (MT) से अधिक चीनी का उपयोग उत्पादन या प्रोसेसिंग में करती हैं, वे इस दायरे में आती हैं।

  • मिठाई, बेकरी और बेवरेज निर्माता: त्योहारों पर रसगुल्ले, गुलाब जामुन, चॉकलेट, बिस्कुट, केक और सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों को अब बार-बार माल मंगाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी और वे अपने पास 1 महीने की आवश्यकता का कच्चा माल सुरक्षित रख सकेंगी।

  • सप्लाई चेन में स्थिरता: प्रोडक्शन लाइनों को अचानक चीनी की कमी के कारण रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे त्योहारी बाजार में तैयार मिठाइयों और स्नैक्स की सप्लाई समय पर सुनिश्चित होगी।

सरकार ने स्टॉक सीमा तो बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ सख्त नियम भी तय किए हैं ताकि घरेलू बाजार में जमाखोरी और कृत्रिम कमी न पैदा हो सके:

  • अतिरिक्त 15 दिन का स्टॉक केवल आयातित चीनी से: 15 दिनों से अधिक यानी 16वें से 30वें दिन तक का अतिरिक्त चीनी कोटा केवल ‘एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम’ (AAS) या ‘टैरिफ रेट कोटा’ (TRQ) के तहत आयात (Import) की गई चीनी से ही पूरा किया जा सकेगा।

  • घरेलू खुले बाजार की सीमा 15 दिन ही रहेगी: भारत के घरेलू ओपन मार्केट से खरीदी गई चीनी का स्टॉक अभी भी अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर ही रखा जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह है कि घरेलू मिलों से निकलने वाली चीनी सीधे आम उपभोक्ताओं और खुदरा बाजारों के लिए सुलभ बनी रहे।

  • हर शुक्रवार को ऑनलाइन स्टॉक डिक्लेरेशन: सभी पात्र बल्क उपभोक्ताओं को खाद्य मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल (foodstock.dfpd.gov.in) पर प्रत्येक शुक्रवार को अपने स्टॉक की वास्तविक स्थिति की अनिवार्य रिपोर्टिंग करनी होगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हाल के हफ्तों में मिल स्तर (Ex-mill) पर चीनी की कीमतों में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, खुदरा बाजारों (Retail Market) में यह गिरावट केवल 5 से 10 प्रतिशत के आसपास ही देखने को मिली है, जहां कीमतें अपने उच्चतम स्तर ₹65 प्रति किलो से घटकर लगभग ₹58.50 प्रति किलो पर आई हैं।

खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों, थोक व्यापारियों और रिटेलर्स के साथ आयोजित संयुक्त बैठक में दो टूक निर्देश दिए हैं कि मिल स्तर पर आई गिरावट का पूरा वित्तीय लाभ आम उपभोक्ताओं तक फौरन पहुंचाया जाए। इसके साथ ही सरकार ने यह भी दोहराया कि 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहे नए चीनी सीजन के तहत गन्ना किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों के भुगतान में भी कोई अड़चन न आए।

  • त्योहारों में कालाबाजारी पर रोक: बड़े खरीदारों द्वारा समय रहते अतिरिक्त स्टॉक सुरक्षित कर लेने से त्योहारों के ऐन वक्त पर चीनी की अचानक खरीद-फरोख्त और कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

  • खुदरा भाव रहेंगे स्थिर: आयातित चीनी से अतिरिक्त मांग पूरी होने के चलते खुदरा दुकानों पर आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चीनी की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में बनी रहेगी, जिससे दाम नियंत्रण में रहेंगे।

  • पारदर्शिता और मॉनिटरिंग: हर हफ्ते होने वाली डिजिटल स्टॉक ऑडिटिंग से सरकार के पास देश भर में मौजूद स्टॉक का सटीक डेटा रहेगा, जिससे किसी भी संदिग्ध जमाखोरी पर तुरंत छापेमारी की जा सकेगी।