
भारतीय पाक परंपरा में लहसुन का उपयोग दाल और सब्जियों में केवल स्वाद व सुगंध बढ़ाने के लिए सदियों से किया जाता रहा है। किंतु आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों में ही लहसुन को केवल एक मसाला नहीं, बल्कि कई गंभीर असाध्य रोगों की अचूक प्राकृतिक दवा माना गया है। चरक संहिता और अष्टांग हृदयम जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में लहसुन को ‘रसोन’ कहा गया है, जिसका अर्थ है जिसमें छह में से पांच रस मौजूद हों।
आधुनिक मेडिकल साइंस के अनुसार, जब लहसुन को तेल में भून या पका दिया जाता है, तो इसके अधिकांश औषधीय सक्रिय तत्व गर्मी के कारण नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत, यदि रोजाना सुबह खाली पेट केवल 2 कली कच्ची लहसुन को सही तरीके से खाया जाए, तो यह शरीर के भीतर एक शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीबायोटिक, एंटीऑक्सीडेंट और ब्लड प्यूरीफायर की तरह काम करता है। आइए जानते हैं कि नियमित रूप से सुबह 2 कली कच्ची लहसुन खाने से शरीर के अलग-अलग अंगों पर क्या चमत्कारी प्रभाव पड़ते हैं।
कच्चे लहसुन के सभी जादुई फायदों का श्रेय इसमें मौजूद एक विशेष सल्फर यौगिक ‘एलिसिन’ (Allicin) को जाता है।
लहसुन की साबुत कली में एलिसिन सीधे रूप में मौजूद नहीं होता, बल्कि उसमें ‘एलीन’ (Alliin) और ‘एलीनेज’ (Alliinase) नामक एंजाइम अलग-अलग कोशिकाओं में बंद रहते हैं। जब आप लहसुन की कली को दांतों से चबाते हैं या कूटते हैं, तो ये दोनों तत्व आपस में मिलकर सक्रिय ‘एलिसिन’ का निर्माण करते हैं। एलिसिन शरीर में प्रवेश करते ही रक्त धमनियों की सूजन को कम करने, फ्री रेडिकल्स से लड़ने और हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने का काम तुरंत शुरू कर देता है।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के बीच कच्चा लहसुन हृदय स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स में गिरावट: कई अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि 8 से 12 सप्ताह तक नियमित कच्चा लहसुन खाने से रक्त में हानिकारक एलडीएल (Bad Cholesterol) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर 10 से 15 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
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धमनियों का लचीलापन: यह धमनियों की दीवारों पर प्लाक (चर्बी की परत) जमने की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस का खतरा टलता है और हृदय तक रक्त का संचार सुचारू बना रहता है।
उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए सुबह खाली पेट लहसुन खाना बेहद मुफीद माना गया है।
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नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण: कच्चे लहसुन में मौजूद तत्व शरीर में ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ (Nitric Oxide) और हाइड्रोजन सल्फाइड के उत्पादन को उत्तेजित करते हैं।
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धमनियों का फैलाव: नाइट्रिक ऑक्साइड सिकुड़ी हुई रक्त वाहिकाओं को चौड़ा और शिथिल (Vasodilation) करता है, जिससे रक्त का दबाव नसों पर कम हो जाता है। मध्यम स्तर के हाई बीपी में इसका नियमित सेवन सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों रीडिंग को संतुलित रखने में प्रभावी मदद करता है।
रक्त के गाढ़े होने और नसों में थक्के (Blood Clots) बनने से हार्ट अटैक और पैरालिसिस का जोखिम पैदा होता है।
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एंटी-प्लेटलेट गुण: कच्चे लहसुन में प्राकृतिक एंटी-थ्रोम्बोटिक गुण होते हैं। यह रक्त की प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने और गाढ़ा थक्का बनाने से रोकता है।
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सर्कुलेशन में सुधार: यह पूरे शरीर में, विशेषकर हाथ-पैरों की बारीक सूक्ष्म रक्त नलिकाओं में भी रक्त के प्रवाह को तेज और निर्बाध बनाए रखता है।
कच्चा लहसुन एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों की खान है।
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सफेद रक्त कोशिकाओं की सक्रियता: इसमें मौजूद सल्फर यौगिक शरीर की रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं (T-Cells और Macrophages) की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
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सर्दी-जुकाम से मुक्ति: जो लोग रोजाना खाली पेट इसका सेवन करते हैं, उन्हें बदलते मौसम में होने वाले सामान्य सर्दी, जुकाम, गले में खराश और वायरल फीवर का संक्रमण 60 प्रतिशत तक कम होता है। साथ ही फेफड़ों में जमा बलगम को पिघलाकर बाहर निकालने में भी यह बेहद असरदार है।
लहसुन यकृत (लिवर) और आंतों दोनों की गहरी सफाई करने में सक्षम है।
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लिवर डिटॉक्स एंजाइम्स: लहसुन लिवर के उन एंजाइम्स को सक्रिय करता है जो शरीर से भारी धातुओं (जैसे सीसा और पारा) और जहरीले टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
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हानिकारक परजीवियों का खात्मा: इसमें मौजूद रोगाणुरोधी गुण आंतों के हानिकारक बैक्टीरिया और पेट के कीड़ों (Parasites) को नष्ट करते हैं, जिससे पाचन अग्नि मजबूत होती है और पेट का भारीपन दूर होता है।
गलत तरीके से लहसुन खाने से इसका पूरा फायदा नहीं मिलता और पेट में जलन हो सकती है। इसे खाने का वैज्ञानिक तरीका इस प्रकार है:
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सुबह 2 छोटी या मध्यम आकार की ताजी लहसुन की कलियां लें और उनका छिलका उतार लें।
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लहसुन को साबुत निगलने के बजाय उसे चाकू से बारीक काट लें या सिलबट्टे/खरल में हल्का सा कुचल (Crush) लें।
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10 मिनट का गोल्डन रूल: कुचलने के बाद लहसुन को तुरंत न खाएं, बल्कि 8 से 10 मिनट के लिए खुली हवा में छोड़ दें। इस दौरान हवा में मौजूद ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से अधिकतम ‘एलिसिन’ सक्रिय हो जाता है।
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10 मिनट बाद इसे अच्छी तरह चबा-चबाकर खाएं और ऊपर से एक गिलास हल्का गुनगुना पानी पिएं। यदि इसका तीखापन बर्दाश्त न हो, तो आप इसमें आधा चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर भी खा सकते हैं।
यद्यपि लहसुन प्राकृतिक है, किंतु हर किसी के शरीर की प्रकृति अलग होती है:
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एसिडिटी और अल्सर के मरीज: जिन लोगों को सीने में तेज जलन, हाइपर-एसिडिटी या पेट में पेप्टिक अल्सर की समस्या है, वे इसे खाली पेट न खाएं, क्योंकि लहसुन की तासीर गर्म और तीखी होती है।
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ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले: जो मरीज पहले से ही खून पतला करने वाली एलोपैथिक दवाएं (जैसे एस्पिरिन, वारफारिन या क्लोपिडोग्रेल) खा रहे हैं, वे डॉक्टर की सलाह के बिना अधिक मात्रा में कच्चा लहसुन न लें।
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सर्जरी से पहले: यदि आपकी कोई सर्जरी या दांत निकालने की प्रक्रिया तय है, तो रक्तस्राव के जोखिम से बचने के लिए कम से कम 10 दिन पहले कच्चा लहसुन बंद कर दें।
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गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान शरीर में अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए कच्चे लहसुन का अत्यधिक सेवन करने से बचें।
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