
दिल्ली विश्वविद्यालय के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में शुमार श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के खचाखच भरे सभागार में उस समय उत्साह की लहर दौड़ गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पारंपरिक औपचारिक भाषण को दरकिनार करते हुए आज की नई पीढ़ी यानी ‘जेन जी’ (Gen Z) के अपने अंदाज में संवाद की शुरुआत की। युवाओं के बीच प्रचलित आधुनिक मुहावरों और स्लैंग का सहजता से उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों को ‘ओजी’ (Original Gangster/Pioneer) और ‘धुरंधर’ कहकर संबोधित किया। मंच पर आते ही उन्होंने कहा कि आज का भारत पुरानी लकीरों पर चलने वाला नहीं, बल्कि लीक से हटकर नए रास्ते गढ़ने वाले धुरंधरों का देश है।
प्रधानमंत्री ने संवाद के दौरान यह दर्शाया कि शासन और नेतृत्व को युवा पीढ़ी की नब्ज, उनकी सोच और उनकी भाषा को गहराई से समझना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज के युवा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज और व्यवस्था में वास्तविक बदलाव (Disruption) लाने के सबसे बड़े माध्यम हैं। राजनीति और प्रशासनिक विमर्श के पारंपरिक ढांचे से बाहर निकलकर किए गए इस अनूठे संवाद ने ऑडिटोरियम में बैठे हजारों छात्रों को सहज ही अपना मुरीद बना लिया।
छात्रों को करियर और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का मंत्र देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा जोखिम कोई जोखिम न लेना ही है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के भीतर प्रयोग करने की जो भूख है, वही नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। अक्सर देखा जाता है कि परिवार और समाज की अपेक्षाओं के दबाव में युवा असफलता के डर से सहम जाते हैं। इस पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि जीवन के सफर में असफलता कभी ‘फुल स्टॉप’ (पूर्णविराम) नहीं होती, बल्कि यह केवल एक ‘कॉमा’ (अल्पविराम) होती है, जो आपको रुककर अपनी रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करने का मौका देती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में जितने भी बड़े आविष्कार और महान संस्थान बने हैं, उनके संस्थापकों ने दर्जनों बार असफलताओं का सामना किया था। यदि आप किसी नए विचार पर काम कर रहे हैं और पहली बार में मनचाहा परिणाम नहीं मिलता, तो इसे हार न समझें। यह एक सीख है जो आपको अगली बार और अधिक परिपक्व बनाती है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे ‘फोमो’ (FOMO – Fear of Missing Out) के दबाव में आने के बजाय अपनी अंतरात्मा और जुनून पर भरोसा रखें।
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने वाणिज्य, वित्त और प्रबंधन के छात्रों से अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब देश का सर्वश्रेष्ठ युवा केवल एक सुरक्षित नौकरी की तलाश में अपना पूरा जीवन खपा देता था, लेकिन बीते एक दशक में भारतीय युवाओं की मानसिकता में ऐतिहासिक बदलाव आया है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां टियर-2 और टियर-3 शहरों के सामान्य परिवारों से आने वाले युवा यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी कर रहे हैं।
पीएम ने कहा कि आज का युवा केवल ‘जॉब सीकर’ (नौकरी मांगने वाला) नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपनी मेधा से ‘जॉब क्रिएटर’ (रोजगार देने वाला) बन रहा है। उन्होंने स्पेस टेक्नोलॉजी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, फिनटेक और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते हुए क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने सभी क्षेत्रों के दरवाजे निजी उद्यमशीलता के लिए खोल दिए हैं। अब यह युवाओं पर निर्भर करता है कि वे किस तरह इन अवसरों को भुनाते हैं और वैश्विक स्तर पर भारतीय ब्रांड्स का परचम लहराते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब आज कॉलेज की कक्षाओं में बैठे छात्र ही देश के नीति निर्माता, उद्योगपति, वैज्ञानिक और समाज सुधारक की भूमिका में होंगे। विकसित भारत का निर्माण किसी सरकारी आदेश या योजना से नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों, विशेष रूप से युवा शक्ति के सम्मिलित पुरुषार्थ से संभव होगा।
उन्होंने छात्रों को आधुनिक तकनीक और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के बीच संतुलन साधने का सुझाव दिया। पीएम ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ब्लॉकचेन का भरपूर उपयोग करें, लेकिन इसके साथ ही मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और भारतीय परंपरा के नैतिक मूल्यों को कभी न भूलें। तकनीक जब करुणा और राष्ट्रहित के साथ जुड़ती है, तभी वह मानव कल्याण का साधन बनती है।
एसआरसीसी के अकादमिक योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संस्थान ने देश को शीर्ष अर्थशास्त्री, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट लीडर्स और नीति विशेषज्ञ दिए हैं। आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और मंदी के बादलों से घिरी है, तब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से खड़ा है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे यूपीआई (UPI), ओएनडीसी (ONDC) और आधार ने देश के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय समावेशन की पहुंच सुनिश्चित की है।
उन्होंने कहा कि कॉमर्स के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे वित्तीय साक्षरता को समाज के निचले तबके तक पहुंचाएं। भारत आज 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, और इस यात्रा में कॉमर्स के विशेषज्ञों की वित्तीय रणनीति, कर सुधारों के क्रियान्वयन और पूंजी निर्माण में भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है।
प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान ऑडिटोरियम कई बार ठहाकों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भाषण समाप्त होने के बाद छात्रों ने मीडिया से बातचीत में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि देश के प्रधानमंत्री उनके साथ उनकी अपनी भाषा में संवाद करेंगे। छात्रों का कहना था कि ‘ओजी’ और ‘धुरंधर’ जैसे शब्दों ने एक पल में उनके और प्रधानमंत्री के बीच की औपचारिक दूरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया। कई छात्रों ने कहा कि विफलता को सकारात्मक रूप से देखने और लीक से हटकर जोखिम उठाने की प्रधानमंत्री की सलाह उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास भरने वाली है।
यह कार्यक्रम न केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में एक यादगार घटना के रूप में दर्ज हो गया, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि देश का शीर्ष नेतृत्व युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को प्राथमिकता में रखकर भविष्य की नीतियां गढ़ने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
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