Fuel Price Hike Update: भारत में पिछले चार सालों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन अब यह सिलसिला खत्म होने के संकेत मिल रहे हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार (12 मई, 2026) को सीआईआई (CII) एनुअल बिजनेस समिट में साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) भारी वित्तीय दबाव में हैं। मंत्री ने चेतावनी दी कि तेल कंपनियां वर्तमान में हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा सह रही हैं।
OMCs का मुनाफा खत्म होने का डर
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो वित्त वर्ष 2026 (FY26) में तेल कंपनियों द्वारा कमाया गया पूरा मुनाफा महज एक तिमाही के घाटे में स्वाहा हो सकता है। अनुमान के मुताबिक, चालू तिमाही में इन कंपनियों का कुल घाटा 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। मंत्री ने कहा, “सरकार ने पिछले चार वर्षों से कीमतों को स्थिर रखकर उपभोक्ताओं को वैश्विक झटकों से बचाया है, लेकिन अब यह देखना होगा कि कंपनियां कब तक इस बोझ को झेल सकती हैं।”
स्टॉक पर्याप्त, लेकिन ‘कठिन फैसलों’ की जरूरत
देश में ईंधन की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है। उन्होंने बताया कि:
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कच्चा तेल और LNG: 69 दिनों का पर्याप्त स्टॉक।
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LPG (रसोई गैस): 45 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है।
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LPG उत्पादन: सरकार ने घरेलू उत्पादन को 35,000 टन से बढ़ाकर 55,000 टन प्रतिदिन कर दिया है।
हालांकि, आपूर्ति में कोई कमी नहीं होने के बावजूद, पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव और ईरान-अमेरिका संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार जल्द ही ईंधन की कीमतों को लेकर ‘कठिन आर्थिक फैसले’ ले सकती है।
पीएम मोदी की ‘किंजूसी’ वाली अपील का समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से तेल की खपत कम करने और सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इस पर हरदीप पुरी ने कहा कि पीएम की यह अपील विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और वैश्विक संकट के प्रभाव को कम करने के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के अधिक उपयोग पर जोर देने को कहा ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।
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