
भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता मई का महीना बेहद उतार-चढ़ाव और हलचल से भरा रहा। घरेलू शेयर बाजार में तेजी के दावों के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त बिकवाली कर हर किसी को हैरान कर दिया है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 55,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम निकालकर वापस चले गए हैं। इतनी बड़ी रकम की अचानक निकासी से बाजार के बड़े-बड़े दिग्गजों के कान खड़े हो गए हैं और खुदरा निवेशकों के मन में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ जो विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया। आइए एक्सपर्ट्स के जरिए समझने की कोशिश करते हैं मई महीने की इस बड़ी हलचल के पीछे की असली कहानी।
आखिर विदेशी निवेशकों ने क्यों की इतनी बड़ी बिकवाली और क्या थी मुख्य वजह
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मई महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई इस ऐतिहासिक बिकवाली के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। इसके साथ ही, चीनी शेयर बाजारों का वैल्यूएशन इस समय भारतीय बाजार के मुकाबले काफी आकर्षक और सस्ता हो गया था, जिसके चलते विदेशी फंड्स ने भारत से अपना मुनाफा निकालकर चीन और अन्य उभरते बाजारों की तरफ रुख करना बेहतर समझा। इस बड़े फंड शिफ्ट ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर सीधा और गहरा असर डाला है।
चुनावी सरगर्मी और ऊंचे वैल्यूएशन ने भी बढ़ाई निवेशकों की बेचैनी
मई के दौरान देश के भीतर चल रही लोकसभा चुनाव की सरगर्मी और उसके नतीजों को लेकर बने सस्पेंस ने भी विदेशी निवेशकों को थोड़ा सतर्क कर दिया। राजनीतिक स्थिरता और भविष्य की नीतियों को लेकर बाजार में जो कयास लगाए जा रहे थे, उसके चलते बड़े फंड हाउसेज ने ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाई और जोखिम कम करने के लिए भारतीय शेयरों में बिकवाली बढ़ानी शुरू कर दी। इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन (PE Multiple) पिछले कुछ समय से अपने रिकॉर्ड हाई के करीब चल रहा था, जिसे देखते हुए विदेशी निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) करना ज्यादा सुरक्षित समझा।
भारतीय शेयर बाजार के भविष्य और खुदरा निवेशकों पर क्या होगा इसका असर
भले ही विदेशी निवेशकों ने मई के महीने में बाजार से 55,000 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम निकाल ली हो, लेकिन भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह धराशायी नहीं हुआ। इसके पीछे की सबसे बड़ी ढाल हमारे घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) और देश के करोड़ों खुदरा निवेशक बने, जिन्होंने म्यूचुअल फंड और एसआईपी (SIP) के जरिए बाजार में लगातार पैसा झोंकना जारी रखा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एफपीआई की यह बिकवाली फौरी तौर पर बाजार में वोलाटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव तो पैदा कर सकती है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को देखते हुए लंबी अवधि के निवेशकों को इससे घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। चुनाव के बाद स्थितियां साफ होते ही विदेशी निवेशकों की घर वापसी की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
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