
भारतीय क्रिकेट के दो उभरते हुए सितारों, यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) ने इन दोनों खिलाड़ियों को ‘व्हेयरअबाउट्स क्लॉज’ (Whereabouts Failure) के उल्लंघन के मामले में आधिकारिक नोटिस जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों खिलाड़ी पिछले साल (2025) तय समय पर डोप टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं थे, जिसे नियमों की पहली बड़ी चूक माना गया है। इसकी जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को भी दे दी गई है।
क्या है पूरा मामला? क्यों मिला नोटिस?
यशस्वी जायसवाल और शेफाली वर्मा नाडा के रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल (RTP) का हिस्सा हैं। इस नियम के तहत, खिलाड़ियों को हर तिमाही अपनी लोकेशन की जानकारी देनी होती है ताकि डोप कंट्रोल ऑफिसर (DCO) बिना किसी पूर्व सूचना के उनका टेस्ट ले सकें।
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यशस्वी जायसवाल: 17 दिसंबर 2025 को जब अधिकारी उनके बताए पते पर पहुंचे, तो वे वहां मौजूद नहीं थे।
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शेफाली वर्मा: 7 नवंबर 2025 को शेफाली भी अपने निर्धारित स्थान पर नहीं पाई गईं। नाडा ने इस साल फरवरी में दोनों से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर अब औपचारिक नोटिस भेजकर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
3 गलतियां और 4 साल का बैन: क्या कहते हैं नियम?
एंटी-डोपिंग नियमों (अनुच्छेद 2.4) के मुताबिक, अगर कोई एथलीट 12 महीने के भीतर तीन बार अपना डोप टेस्ट मिस करता है या लोकेशन की गलत जानकारी देता है, तो इसे ‘डोपिंग उल्लंघन’ माना जाता है।
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पहली और दूसरी चूक पर चेतावनी दी जाती है।
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तीसरी चूक होने पर खिलाड़ी पर 2 से 4 साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यशस्वी और शेफाली के लिए यह पहली आधिकारिक चूक (First Missed Test) दर्ज की गई है, जिसका मतलब है कि अब उन्हें अगले एक साल तक बेहद सतर्क रहना होगा।
BCCI का रुख: ‘ओलंपिक प्रोटोकॉल’ पर जोर
बीसीसीआई ने नाडा से नोटिस मिलने की पुष्टि की है। बोर्ड के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, “हमें सूचना मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं कि यह चूक कैसे हुई। चूंकि क्रिकेट अब 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का हिस्सा है, इसलिए हमें डोपिंग के सभी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना होगा।” वर्तमान में टीम इंडिया के 13 खिलाड़ी (जिनमें शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह शामिल हैं) नाडा की इस निगरानी सूची में हैं।
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