
वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब के रणनीतिक ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए भीषण ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ (पेट्रोलाइन) को निशाना बनाए जाने के बाद ऐहतियातन इस पूरी पाइपलाइन के संचालन को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। खाड़ी क्षेत्र से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाने वाली यह पाइपलाइन सऊदी अरब की जीवनरेखा मानी जाती है। हमले की खबर फैलते ही वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंजों में खलबली मच गई और अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड तथा अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी तनाव के बीच इस पाइपलाइन के बंद होने से दुनिया भर के ऊर्जा विश्लेषक और तेल आयातक देश सकते में हैं, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा सुरक्षित गलियारा था जिसके जरिए फारस की खाड़ी के संकरे समुद्री रास्तों से बचे बिना तेल को सुरक्षित बाहर निकाला जाता था।
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय और तेल उत्पादक कंपनी अरामको के पाइपलाइन शटडाउन के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने पिछले चार महीनों के उच्चतम स्तर को छू लिया है। लंदन इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर ब्रेंट क्रूड 4.5 फीसदी से अधिक की दैनिक छलांग लगाते हुए 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करने लगा। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.2 फीसदी से अधिक मजबूत होकर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बीते एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक का भारी उछाल दर्ज किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और ओपेक (OPEC) के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार में पहले से ही सीमित तेल भंडार और कई देशों द्वारा उत्पादन में की गई कटौती की वजह से सप्लाई का दायरा बहुत संकरा था। ऐसे में इस ताजा भू-राजनीतिक हमले ने तेल के वायदा सौदों में घबराहट पैदा कर दी है, जिससे हेज फंड्स और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने क्रूड कॉन्ट्रैक्ट्स में भारी खरीदारी शुरू कर दी है।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता प्रतिदिन लगभग 50 लाख से 70 लाख बैरल कच्चा तेल ढोने की है। यह मात्रा पूरी दुनिया की कुल दैनिक तेल आपूर्ति का लगभग 4 से 5 प्रतिशत बैठती है। सामान्य दिनों में जब होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नौसेना या क्षेत्रीय विद्रोही गुटों की गतिविधियों के चलते व्यापारिक जहाजों का आवागमन बाधित होता है, तब सऊदी अरब इसी 1200 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के रास्ते अपने पूर्वी तेल कुओं से क्रूड को पश्चिमी तट पर स्थित यानबू (Yanbu) एक्सपोर्ट टर्मिनल तक भेजता है। अब इस पाइपलाइन पर हमला होने से यानबू टर्मिनल पर तेल की आवक ठप हो गई है और वहां मौजूद सीमित इन्वेंट्री केवल 5 से 7 दिनों के निर्यात के लिए ही पर्याप्त बताई जा रही है। दूसरी तरफ, यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और पेरीम द्वीप के आसपास व्यापारिक जहाजों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। ओमान के तट पर भी हाल ही में एक कमर्शियल ऑयल टैंकर पर हमला हुआ है। यानी समुद्र और जमीन दोनों ही मोर्चों पर तेल का सुरक्षित परिवहन ब्लॉक हो चुका है, जिसने 1970 के दशक जैसे तेल संकट की आशंकाओं को ताजा कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर से ऊपर की आग भड़कने के बाद भारत के 140 करोड़ नागरिकों और ऑटोमोबाइल चालकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने वाले हैं। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 से 88 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें सऊदी अरब भारत के शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। भारत आने वाले कुल सऊदी तेल का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा इसी यानबू बंदरगाह से लोड होकर आता था। राहत की बात यह है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने आज सुबह जारी किए गए दैनिक रेट कार्ड में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा है। भारतीय रिफाइनरियों के पास औसतन 15 से 20 दिनों का क्रूड स्टॉक और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है, जिसके चलते तात्कालिक रूप से पेट्रोल पंपों पर दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। हालांकि, पेट्रोलियम इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल अगले दो हफ्तों तक 100 डॉलर से ऊपर टिका रहा, तो तेल कंपनियों के अंडर-रिकवरी मार्जिन पर भारी दबाव पड़ेगा और समीक्षा बैठक के बाद रिटेल कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी का फैसला लेना पड़ सकता है।
भारतीय तेल कंपनियों द्वारा रोजाना सुबह 6 बजे देश भर के पेट्रोल पंपों के लिए ईंधन के दाम अपडेट किए जाते हैं। आज वैश्विक बाजार में क्रूड के 109 डॉलर छूने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी स्थिरता बनी हुई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल का भाव 94.65 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.76 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये में मिल रहा है। आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थानीय वैट और सेस के चलते पेट्रोल 103.44 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.97 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 103.94 रुपये और डीजल 90.76 रुपये प्रति लीटर है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 100.75 रुपये और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। देश में सबसे सस्ता ईंधन केंद्र शासित प्रदेश अंडमान-निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में उपलब्ध है, जहां पेट्रोल लगभग 84.10 रुपये और डीजल 79.74 रुपये प्रति लीटर है। इसके विपरीत, आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थानीय करों की अधिकता के कारण पेट्रोल 118.34 रुपये और डीजल 106.06 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर बिक रहा है।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर केवल गाड़ी की टंकी में तेल भरवाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे देश के व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। भारत सरकार के लिए क्रूड का 100 डॉलर के पार जाना चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और व्यापार घाटे को सीधे तौर पर बढ़ाने वाला कारक बनता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल 10 डॉलर प्रति बैरल महंगा होता है, तो भारत के आयात बिल में सालाना अरबों डॉलर की बढ़ोतरी हो जाती है, जिससे भारतीय रुपये पर डॉलर के मुकाबले दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा, देश के भीतर लंबी दूरी का लगभग 70 फीसदी माल परिवहन ट्रकों और भारी डीजल वाहनों के जरिए होता है। यदि भविष्य में डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो ट्रांसपोर्टर्स तुरंत माल ढुलाई भाड़ा (Freight Rates) बढ़ा देते हैं। इसका सीधा असर मंडियों में आने वाली हरी सब्जियों, फलों, दालों, खाद्य तेल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। नतीजतन, देश में खुदरा मुद्रास्फीति (CPI Inflation) में उछाल आने लगता है, जो अंततः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ब्याज दरों में कटौती करने से रोकता है।
मध्य पूर्व में छिड़े इस अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी है। भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पदुर में भूमिगत चट्टानी गुफाओं में स्थित सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves – SPR) मौजूद हैं, जो आपातकालीन स्थिति में देश की लगभग 9 से 10 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही भारतीय तेल रिफाइनरियों ने अपने कच्चे तेल के आयात का विविधीकरण (Diversification) काफी पहले से शुरू कर रखा है। रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका और पश्चिम अफ्रीकी देशों से भी भारत लगातार कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक देश या एक विशेष समुद्री रूट पर भारत की पूर्ण निर्भरता नहीं है। फिर भी, यदि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की मरम्मत में लंबा समय लगता है और होर्मुज तथा लाल सागर दोनों जगह जहाजों पर हमले जारी रहते हैं, तो वैश्विक शिपिंग फ्रेट और मरीन इंश्योरेंस का प्रीमियम कई गुना बढ़ जाएगा। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले 72 घंटे बेहद अहम हैं कि सऊदी अरब कितनी जल्दी पाइपलाइन के सुरक्षित संचालन को बहाल करने की घोषणा करता है।
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