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Post Office SCSS: पति-पत्नी मिलकर करें पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में निवेश, हर 3 महीने में खाते में आएंगे ₹57,400; सुरक्षित रेगुलर इनकम और टैक्स छूट का पूरा गणित समझें

नौकरी और व्यवसाय की लंबी जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद जब व्यक्ति 60 की उम्र पार करता है, तो उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने जीवन भर की जमा-पूंजी को सुरक्षित रखना और हर महीने या तिमाही पर एक निश्चित नियमित आय हासिल करना होती है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पेंशन की अनुपलब्धता और गिरती ब्याज दरों के दौर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन जाती है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में मिलने वाला आकर्षक रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम से बंधा होता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद उठाना हर बुजुर्ग के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला इंडिया पोस्ट यानी डाकघर (Post Office) बुजुर्गों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। डाकघर की ‘सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम’ (SCSS) देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे भरोसेमंद और सर्वाधिक ब्याज देने वाली लघु बचत योजना है। केंद्र सरकार की संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) से लैस होने के कारण इसमें एक भी रुपया डूबने का कोई जोखिम नहीं होता। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर से लेकर दिल्ली-एनसीआर, जयपुर और पटना जैसे शहरों में रहने वाले रिटायर्ड दंपती इस स्कीम के जरिए बिना किसी आर्थिक चिंता के अपना बुढ़ापा सम्मानपूर्वक गुजार रहे हैं।

डाकघर की वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की सबसे बड़ी ताकत इसका शानदार ब्याज और त्रैमासिक भुगतान (Quarterly Payout) की पारदर्शी व्यवस्था है। वर्तमान में सरकार इस योजना पर 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की आकर्षक ब्याज दर दे रही है। यदि कोई पति-पत्नी अपनी सेवानिवृत्ति के फंड से मिलकर इस योजना में 28 लाख रुपये की एकमुश्त राशि जमा करते हैं (उदाहरण के तौर पर दोनों ₹14-₹14 लाख का निवेश करते हैं), तो उनके घर में हर तीन महीने पर आने वाली ब्याज आय का हिसाब बेहद सुकून देने वाला होता है:

  • कुल संयुक्त निवेश राशि: ₹28,00,000 (28 लाख रुपये)

  • लागू वार्षिक ब्याज दर: 8.2% प्रति वर्ष

  • एक साल में मिलने वाला कुल ब्याज: ₹28,00,000 × 8.2% = ₹2,29,600

  • हर 3 महीने (तिमाही) में मिलने वाला ब्याज: ₹2,29,600 ÷ 4 = ₹57,400

  • औसत मासिक आमदनी: लगभग ₹19,133 प्रति माह

इस योजना का प्राथमिक कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। इन 5 वर्षों (20 तिमाहियों) के दौरान इस दंपती को कुल मिलाकर 11 लाख 48 हजार रुपये (₹57,400 × 20) केवल ब्याज के रूप में प्राप्त हो जाते हैं। यदि वे 5 साल बाद इस योजना को 3 वर्ष के लिए और आगे बढ़ा देते हैं, तो 8 साल में कुल ब्याज की कमाई लगभग 18 लाख 36 हजार 800 रुपये (₹18.37 लाख) तक पहुंच जाती है। सबसे खास बात यह है कि ब्याज की यह पूरी रकम खर्च करने के बावजूद मैच्योरिटी पर उनका मूलधन यानी पूरा 28 लाख रुपये पूरी तरह सुरक्षित वापस मिल जाता है।

केंद्र सरकार ने बजट में वरिष्ठ नागरिकों को ऐतिहासिक राहत देते हुए एससीएसएस में व्यक्तिगत निवेश की अधिकतम सीमा को 15 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 30 लाख रुपये कर दिया था। इस नियम के तहत एक वरिष्ठ नागरिक अपने नाम पर अधिकतम 30 लाख रुपये तक जमा कर सकता है। यदि पति और पत्नी दोनों की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो वे दोनों अलग-अलग व्यक्तिगत खाता खोलकर या एक-दूसरे के साथ संयुक्त (Joint Account) खाता खोलकर कुल 60 लाख रुपये (₹30 लाख + ₹30 लाख) तक का निवेश कर सकते हैं। डाकघर के नियमों के अनुसार, एससीएसएस में केवल पति या पत्नी (Spouse) के साथ ही जॉइंट खाता खोला जा सकता है। संयुक्त खाते में जमा की गई पूरी रकम पहले खाताधारक (First Holder) की निवेश सीमा में गिनी जाती है, इसलिए दोनों जीवनसाथी यदि अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो दोनों अपनी पूरी 30-30 लाख की सीमा का उपयोग कर सकते हैं। यदि कोई दंपती अधिकतम 60 लाख रुपये का निवेश करता है, तो 8.2% की दर से उन्हें सालाना 4 लाख 92 हजार रुपये यानी हर तीन महीने पर 1 लाख 23 हजार रुपये (लगभग ₹41,000 प्रति माह) की सुनिश्चित पेंशन-जैसी आय प्राप्त होगी।

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम केवल भारतीय नागरिकों के लिए है; अनिवासी भारतीय (NRI) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इसमें निवेश के पात्र नहीं हैं। योजना में शामिल होने के लिए पात्रता के स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं। सामान्य नागरिकों के लिए न्यूनतम प्रवेश आयु 60 वर्ष है। लेकिन सरकार ने समय से पहले सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया है। नागरिक सेवाओं, सार्वजनिक उपक्रमों या निजी कंपनियों से वीआरएस (VRS) अथवा सुपरएनुएशन के तहत 55 से 60 वर्ष की आयु के बीच रिटायर होने वाले कर्मचारी भी इस योजना में खाता खोल सकते हैं, बशर्ते वे अपने रिटायरमेंट लाभ प्राप्त होने के 1 महीने के भीतर आवेदन करें। इसके अतिरिक्त, देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों (आर्मी, नेवी, एयरफोर्स) के पूर्व सैनिकों के लिए उम्र सीमा में और अधिक ढील दी गई है; रक्षा क्षेत्र से सेवानिवृत्त कर्मी 50 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद ही इस उच्च ब्याज वाली योजना का लाभ ले सकते हैं।

अन्य बचत योजनाओं की तरह एससीएसएस में ब्याज का चक्रवृद्धिकरण (Compounding) नहीं होता, बल्कि यह एक विशुद्ध कैश-फ्लो इनकम स्कीम है। इसमें ब्याज की गणना साधारण ब्याज के रूप में की जाती है और सरकार द्वारा तय कैलेंडर के अनुसार हर वित्तीय तिमाही के पहले कार्यदिवस पर सीधे खाताधारक के बैंक या डाकघर बचत खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाता है। वर्ष की चार तिमाहियों का भुगतान 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर और 1 जनवरी को सुनिश्चित रूप से किया जाता है। खाताधारक अपने इस ब्याज को डाकघर के बचत खाते में ऑटो-क्रेडिट करवा सकते हैं या ईसीएस (ECS) व एनएसीएच (NACH) मैंडेट के जरिए किसी भी राष्ट्रीयकृत या निजी कमर्शियल बैंक के खाते में सीधे मंगा सकते हैं। हर तीसरे महीने आने वाली यह ₹57,400 की बंधी-बंधाई रकम बुजुर्ग दंपती के दवाइयों के खर्च, नियमित मेडिकल चेकअप, घरेलू बिलों, किराने के सामान और सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में आत्मनिर्भर बनाती है।

इस योजना में निवेश करते समय आयकर नियमों की पूरी जानकारी होना आवश्यक है। जब आप एससीएसएस में पैसा जमा करते हैं, तो पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत आयकर अधिनियम की धारा 80C में 1.5 लाख रुपये तक की कर कटौती (Tax Deduction) का लाभ मिलता है। हालांकि, मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य (Taxable) होता है और इसे निवेशक की ‘अन्य स्रोतों से आय’ में जोड़ा जाता है। वरिष्ठ नागरिकों को राहत देने के लिए धारा 80TTB के तहत किसी भी वित्तीय वर्ष में बैंक और डाकघर जमा से मिलने वाले ब्याज पर 50,000 रुपये तक की सीधी टैक्स छूट मिलती है। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की कुल वार्षिक ब्याज आय तय सीमा से अधिक होती है, तो डाकघर द्वारा 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस (TDS) काटा जाता है। लेकिन यदि किसी बुजुर्ग दंपती की कुल वार्षिक आय टैक्स स्लैब की न्यूनतम सीमा से कम है, तो वे प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में डाकघर में फॉर्म 15H (Form 15H) जमा करके टीडीएस कटौती से पूरी तरह छूट प्राप्त कर सकते हैं।

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम का खाता देश के किसी भी प्रधान डाकघर (Head Post Office), उप-डाकघर या अधिकृत बैंकों (जैसे SBI, PNB, Bank of Baroda, ICICI, HDFC आदि) में खोला जा सकता है। इसके लिए आवेदन फॉर्म (Form 1), दो पासपोर्ट साइज फोटो, पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड), आयु प्रमाण पत्र और पते का प्रमाण पत्र जमा करना होता है। 1 लाख रुपये तक की राशि नकद और उससे अधिक की राशि चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा की जाती है। योजना की परिपक्वता अवधि 5 वर्ष है, जिसे मैच्योरिटी के 1 वर्ष के भीतर फॉर्म भरकर 3 वर्ष के ब्लॉक के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी आपात स्थिति में 5 साल से पहले पैसा निकालना पड़े, तो 1 साल बाद खाता बंद करने पर मूलधन से 1.5% और 2 साल बाद बंद करने पर 1% की मामूली पेनाल्टी काटकर शेष राशि लौटा दी जाती है। सुरक्षित निवेश, सॉवरेन गारंटी और हर तिमाही पर सम्मानजनक ब्याज आमदनी के कारण यह योजना हर रिटायर्ड दंपती के वित्तीय पोर्टफोलियो की सबसे मजबूत रीढ़ है।