
टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का वो सबसे बड़ा रिकॉर्ड, जिसे कभी ‘असंभव’ माना जाता था, आज खतरे में नजर आ रहा है। क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों सिर्फ एक ही चर्चा जोरों पर है क्या इंग्लैंड के रन-मशीन जो रूट, महान सचिन तेंदुलकर के सबसे ज्यादा टेस्ट रनों के वर्ल्ड रिकॉर्ड को ध्वस्त कर पाएंगे? जब भी जो रूट क्रीज पर कदम रखते हैं, फैंस और क्रिकेट पंडित कैलकुलेटर लेकर बैठ जाते हैं।
सचिन तेंदुलकर ने जब टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया, तो उनके नाम 15,921 रन दर्ज थे। उस समय किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि मॉडर्न एरा का कोई बल्लेबाज इस आंकड़े के आस-पास भी फटकेगा, खासकर टी20 क्रिकेट के आने के बाद। लेकिन पिछले 5-6 सालों में जो रूट ने जिस तरह से रनों का अंबार लगाया है, उसने इस नामुमकिन को मुमकिन के करीब लाकर खड़ा कर दिया है।
सचिन और रूट के बीच की दूरी हुई बेहद कम
आंकड़ों की बात करें तो जो रूट अब ‘मास्टर ब्लास्टर’ के रिकॉर्ड से बहुत ज्यादा दूर नहीं हैं। दोनों दिग्गजों के बीच अब सिर्फ 1,978 रनों का फासला रह गया है। रूट फिलहाल 13,943 टेस्ट रनों के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे पायदान पर मजबूती से काबिज हैं। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि जिस प्रचंड फॉर्म में रूट इस समय खेल रहे हैं, अगर वह अगले दो साल तक किसी बड़ी इंजरी से बचे रहे, तो सचिन तेंदुलकर का यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड इतिहास के पन्नों में दब सकता है।
वर्ल्ड रिकॉर्ड के सवाल पर जो रूट ने तोड़ी चुप्पी
लगातार मीडिया और फैंस द्वारा पूछे जा रहे इस सवाल पर आखिरकार जो रूट ने अपनी खामोशी तोड़ी है। एक नामी खेल पत्रिका ‘द एथलेटिक’ को दिए इंटरव्यू में रूट ने खुलकर बात की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मुझसे यह सवाल अब इतनी बार पूछा जा चुका है कि मैं चाहकर भी अब इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता। सचिन के रिकॉर्ड की बराबरी या उसे तोड़ने की चर्चाओं पर रूट के चेहरे पर एक अलग ही सम्मान देखने को मिलता है।
‘मेरे जन्म से पहले उन्होंने डेब्यू किया था’ रूट ने जताया सम्मान
सचिन तेंदुलकर की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए जो रूट ने कहा कि सचिन ने इस खेल में जो कुछ भी हासिल किया है, वो अविश्वसनीय है। आपको मेरी बात पर भरोसा करना होगा कि सिर्फ उनके नाम के साथ मेरी बातचीत होना ही मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है। रूट ने एक दिलचस्प वाकया याद दिलाते हुए कहा कि उस महान खिलाड़ी ने मेरे पैदा होने से पहले टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू कर लिया था, और जब मैंने अपना टेस्ट डेब्यू किया, तब भी वह मैदान पर खेल रहे थे! इतने लंबे समय तक टॉप लेवल पर क्रिकेट खेलना और फिर टेस्ट में इतने रन बनाना अपने आप में चमत्कार है। यही नहीं, उनके नाम वनडे में भी 49 शतक दर्ज हैं।
रिकॉर्ड्स नहीं, बल्लेबाजी में सुधार है असली मकसद
क्रिकेट के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित माइलस्टोन के बेहद करीब होने के बावजूद जो रूट के पैर जमीन पर हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका ध्यान आंकड़ों के खेल या किसी का रिकॉर्ड तोड़ने पर नहीं है। रूट का पूरा फोकस अपनी बल्लेबाजी को दिन-ब-दिन और बेहतर बनाने पर टिका है।
इंग्लैंड के इस पूर्व कप्तान ने अपनी बैटिंग फिलॉसफी को समझाते हुए कहा कि मैं हमेशा खुद को इवॉल्व करने और अपनी बैटिंग में नई चीजें जोड़ने की कोशिश करता हूं। मेरा मकसद सिर्फ इतना होता है कि मैं तकनीकी रूप से इतना मजबूत महसूस करूं कि जब मैदान पर उतरूं, तो मुझे तकनीक की चिंता न करनी पड़े। क्रीज पर जाने के बाद मैं सिर्फ सामने आ रही परिस्थितियों और मैच की रणनीति पर ध्यान देता हूं। यह सुनने में भले ही बहुत आसान लगता है, लेकिन जब मैं बीच मैदान पर होता हूं, तो मेरा इकलौता लक्ष्य सिर्फ खेल का आनंद लेना होता है।
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