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RuPay Credit Card on UPI: क्रेडिट कार्ड से UPI भुगतान पर नहीं लगेगा नया 0.4% MDR, सरकार और NPCI ने दूर किया बड़ा भ्रम

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय द्वारा 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के आदेश के बाद व्यापारियों और क्रेडिट कार्ड धारकों के बीच एक नया भ्रम पैदा हो गया था। सोशल मीडिया और व्यापारिक संगठनों में यह सवाल तेजी से उठ रहा था कि क्या स्मार्टफोन से लिंक रूपे क्रेडिट कार्ड (RuPay Credit Card on UPI) या बैंकों द्वारा दी जाने वाली क्रेडिट लाइन से किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर भी अब 0.4% का नया एमडीआर कटेगा? व्यापारियों को यह चिंता सता रही थी कि क्या क्रेडिट कार्ड से होने वाले बड़े भुगतानों पर लगने वाला 1.5% से 2% का पुराना एमडीआर घटकर 0.4% हो जाएगा, या फिर क्रेडिट कार्ड से स्कैन करने पर कोई दोहरा शुल्क लगेगा? इस गहराते संशय को पूरी तरह समाप्त करते हुए वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) और एनपीसीआई ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 0.40% का नया रियायती एमडीआर ढांचा विशुद्ध रूप से प्रत्यक्ष बैंक-खाते-से-मर्चेंट (Bank Account to Merchant) के सौदों के लिए है। क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई ट्रांजैक्शन—जिसमें रूपे क्रेडिट कार्ड और बैंकों की स्वीकृत क्रेडिट लाइन शामिल हैं—इस नए 0.4% फ्रेमवर्क के दायरे में नहीं आते हैं और वे अपने पुराने स्वतंत्र नियमों से ही संचालित होते रहेंगे।

सरकार द्वारा जारी विस्तृत फैक्ट-शीट (FAQ) के अनुसार, प्रत्यक्ष बचत खाते (Savings Account) से होने वाले यूपीआई भुगतान और क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले यूपीआई भुगतान की वित्तीय प्रकृति में जमीन-आसमान का फर्क है। जब कोई उपभोक्ता अपने बैंक खाते से सीधे यूपीआई पिन डालकर पैसे भेजता है, तो वह उसका अपना जमा धन होता है जो रियल-टाइम में एक खाते से कटकर दूसरे खाते में ट्रांसफर होता है। इसमें बैंक को कोई क्रेडिट रिस्क (डिफॉल्ट का जोखिम) नहीं उठाना पड़ता और न ही किसी को उधार देना होता है। इसलिए इस बुनियादी नेटवर्क के मेंटेनेंस के लिए ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.40% (अधिकतम ₹300 कैप) की न्यूनतम दर तय की गई है।

इसके विपरीत, जब कोई उपभोक्ता अपने रूपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से लिंक करके क्यूआर कोड स्कैन करता है, तो वहां बैंक ग्राहक को 45 से 50 दिनों के लिए बिना ब्याज का अल्पकालिक कर्ज (Credit) उपलब्ध कराता है। इस प्रक्रिया में जारीकर्ता बैंक (Card Issuing Bank) को पूंजी की लागत (Cost of Funds), बिलिंग चक्र का खर्च, रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और सबसे बढ़कर ग्राहक द्वारा समय पर पैसा न चुकाने पर डिफॉल्ट का पूरा वित्तीय जोखिम उठाना पड़ता है। यही वजह है कि क्रेडिट उत्पादों को कभी भी सामान्य बचत खाते के पेमेंट स्विच के साथ एक ही दर पर नहीं रखा जा सकता। एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि क्रेडिट-लिंक्ड डिजिटल लेन-देन को उसके जोखिम और लागत के अनुरूप क्रेडिट कार्ड उत्पादों के लिए तय मौजूदा नियामक व्यवस्था के तहत ही नियंत्रित किया जाएगा।

क्रेडिट कार्ड से यूपीआई को जोड़ने की अनुमति भारत में केवल स्वदेशी ‘रूपे’ (RuPay) नेटवर्क वाले क्रेडिट कार्ड्स को दी गई है। इस पर लागू मौजूदा एमडीआर व्यवस्था को समझना हर व्यापारी और कार्डधारक के लिए आवश्यक है:

  • ₹2,000 तक के भुगतान पर शून्य MDR: छोटे व्यापारियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई के विशेष नियम के तहत, यदि कोई ग्राहक किसी छोटे मर्चेंट को रूपे क्रेडिट कार्ड से यूपीआई के जरिए ₹2,000 तक का भुगतान करता है, तो उस पर शून्य एमडीआर (Zero MDR) लागू होता है। यानी छोटे दुकानदार से कोई कमीशन नहीं काटा जाता।

  • ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर मानक क्रेडिट कार्ड दरें: यदि कोई ग्राहक किसी बड़े मर्चेंट, मॉल, सुपरमार्केट या शोरूम में रूपे क्रेडिट कार्ड के जरिए ₹2,000 से अधिक का भुगतान करता है, तो उस मर्चेंट पर सामान्य क्रेडिट कार्ड वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट ही लागू होता है, जो आमतौर पर 1.50% से लेकर 2.0% के बीच होता है।

  • नया 0.4% नियम यहां लागू नहीं: सरकार ने साफ किया है कि 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाला 0.40% का नियम इस श्रेणी पर लागू नहीं होगा। यदि कोई व्यापारी किसी ग्राहक से रूपे क्रेडिट कार्ड के जरिए ₹5,000 का यूपीआई पेमेंट स्वीकार करता है, तो उस पर 0.4% (₹20) नहीं, बल्कि क्रेडिट कार्ड के तय मर्चेंट अनुबंध के अनुसार लगभग 1.5% से 2% का ही एमडीआर लागू रहेगा।

इस पूरे नीतिगत घटनाक्रम में आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा और सुखद पहलू यह है कि ग्राहक की जेब पर शून्य असर पड़ेगा। चाहे आप अपने बचत खाते से यूपीआई करें या अपने रूपे क्रेडिट कार्ड से क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करें, एक ग्राहक के रूप में आपको ₹1 भी अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पूरी तरह से ‘मर्चेंट-साइड’ यानी दुकानदार और उसके बैंक के बीच का वाणिज्यिक समझौता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त नियमों के अनुसार, कोई भी व्यापारी किसी उत्पाद या सेवा की एमआरपी (MRP) से ज्यादा पैसे नहीं मांग सकता और न ही क्रेडिट कार्ड से यूपीआई भुगतान करने पर ग्राहक के बिल में ‘क्रेडिट कार्ड सरचार्ज’ या ‘कन्वीनियंस फीस’ जोड़ सकता है। यदि आप किसी स्टोर पर ₹3,500 के जूते खरीदते हैं और अपने रूपे क्रेडिट कार्ड वाले यूपीआई से पेमेंट करते हैं, तो आपके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में ठीक ₹3,500 ही डेबिट होंगे। यदि कोई दुकानदार आपसे यह कहकर अतिरिक्त 2% की मांग करता है कि “आपने क्रेडिट कार्ड वाले यूपीआई से स्कैन किया है”, तो आप तत्काल राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर या उस बैंक से शिकायत कर सकते हैं जिसकी क्यूआर मशीन उस दुकान पर लगी है।

देश भर के छोटे व्यापारियों, किराना दुकानों और चाय-नाश्ते के स्टॉल्स को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा था कि क्या उन्हें अब ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स पर भारी कमीशन देना पड़ेगा। एनपीसीआई ने इसका समाधान पहले ही बहुत स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से कर रखा है:

  • P2PM मर्चेंट्स पूरी तरह सुरक्षित: वे सभी छोटे कारोबारी जिनका मासिक यूपीआई टर्नओवर ₹1 लाख तक है, वे P2PM (पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट) श्रेणी में आते हैं और उन पर कोई एमडीआर लागू नहीं होता।

  • क्रेडिट कार्ड पेमेंट स्वीकार करने या बंद करने की आजादी: मर्चेंट क्यूआर कोड उपलब्ध कराने वाले बैंक और फिनटेक ऐप्स (जैसे PhonePe Business, Google Pay for Business, Paytm Merchant) दुकानदारों को यह पूर्ण अधिकार देते हैं कि वे अपने क्यूआर कोड पर ‘RuPay Credit Card on UPI’ की सुविधा चालू रखना चाहते हैं या बंद। यदि कोई छोटा दुकानदार नहीं चाहता कि ₹2,000 से ऊपर के सौदों पर उससे क्रेडिट कार्ड का 1.5% से 2% एमडीआर कटे, तो वह अपने मर्चेंट ऐप की सेटिंग में जाकर ‘Accept Credit Card Payments’ को एक क्लिक में बंद (Disable) कर सकता है। ऐसा करने पर ग्राहक केवल अपने बचत खाते से ही उस क्यूआर पर पेमेंट कर पाएंगे।

उपभोक्ताओं और व्यापारियों की त्वरित समझ के लिए 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाले दोनों डिजिटल माध्यमों के शुल्क ढांचे की सीधी तुलना इस प्रकार है:

पैमाना / फीचर सामान्य UPI (बैंक खाते से) RuPay क्रेडिट कार्ड ऑन UPI
ग्राहक के लिए चार्ज 100% शून्य (पूर्णतः मुफ्त) 100% शून्य (पूर्णतः मुफ्त)
P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफर) पूरी तरह फ्री (कोई चार्ज नहीं) लागू नहीं (केवल मर्चेंट को ही पे संभव)
₹2,000 तक मर्चेंट भुगतान 0% MDR (कानूनन अनिवार्य छूट) 0% MDR (छोटे व्यापारियों के लिए छूट)
₹2,000 से ऊपर मर्चेंट भुगतान 0.40% MDR (अधिकतम ₹300 कैप) 1.50% से 2.0% मानक क्रेडिट कार्ड MDR
यूटिलिटी एवं सरकारी बिल ₹2,000 से ऊपर पर फ्लैट ₹5 टोकन फीस संबंधित बैंक के क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड/फीस नियम
लागू होने की समयसीमा नया फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से मौजूदा क्रेडिट कार्ड नियम पहले की तरह जारी

सरकार और एनपीसीआई के इस दोहरे स्पष्टीकरण के बाद डिजिटल इंडिया का मार्ग पूरी तरह पारदर्शी और विवाद-रहित हो चुका है। क्रेडिट कार्ड से जुड़े यूपीआई भुगतानों को अलग रखकर केंद्रीय बैंक ने यह सुनिश्चित किया है कि बैंकों का क्रेडिट रिस्क मैनेजमेंट अक्षुण्ण रहे और ग्राहकों को मिलने वाले 50 दिनों के ब्याज-मुक्त क्रेडिट और रिवॉर्ड पॉइंट्स की व्यवस्था पर कोई आंच न आए।

एक जागरूक उपभोक्ता के रूप में आपके लिए सबसे बेहतरीन रणनीति यह है कि रोजमर्रा के छोटे-मोटे खर्चों—जैसे दूध, सब्जी, फल, दवाइयां और यूटिलिटी बिलों—के लिए अपने सामान्य बचत खाते से जुड़े यूपीआई का इस्तेमाल करें। वहीं, बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल बुकिंग, हवाई टिकट या संगठित ब्रांडेड स्टोर्स से की जाने वाली खरीदारी में अपने रूपे क्रेडिट कार्ड वाले यूपीआई का उपयोग करें, ताकि आपको रिवॉर्ड पॉइंट्स और 50 दिनों की क्रेडिट अवधि का पूरा लाभ मिले। अफवाहों और अधकचरी खबरों से दूर रहकर सही नियमों की जानकारी ही आपको एक सशक्त और वित्तीय रूप से समझदार नागरिक बनाती है।