Wednesday , September 16 2026

Basti UP News: चार दिव्यांग बच्चों वाले बेबस परिवार के लिए मसीहा बनी योगी सरकार; टपकती पन्नी से निकालकर दिलाया पक्का आशियाना, व्हीलचेयर, पेंशन और स्कूल में दाखिला कराकर दूर की छत व पढ़ाई की चिंता

उत्तर प्रदेश में संवेदनशील और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की एक अत्यंत भावुक और मानवीय तस्वीर बस्ती जिले से सामने आई है। बस्ती के भैरोपुर क्षेत्र में रहने वाले रामकिशन पांडे का परिवार पिछले कई वर्षों से ऐसी भयानक गरीबी और बेबसी से जूझ रहा था, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें भर आएं। परिवार में एक या दो नहीं, बल्कि चार मासूम बच्चे गंभीर रूप से दिव्यांग हैं, जो न तो अपने पैरों पर खड़े हो सकते थे और न ही सामान्य बच्चों की तरह चल-फिर सकते थे। रहने के लिए सिर पर पक्की छत तक नहीं थी; बारिश और आंधी के बीच टपकती झोपड़ी और प्लास्टिक की पन्नी के सहारे पूरा परिवार रातें काटने को मजबूर था। मेहनत-मजदूरी करके जमीन के लिए जुटाए गए डेढ़ लाख रुपये डूब जाने के बाद लाचार मां के सामने बच्चों का पेट पालने के लिए भीख मांगने तक की नौबत आ गई थी। लेकिन जैसे ही इस बेबस परिवार की व्यथा की खबर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, सरकार ने पूरी संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़कर इस परिवार की बदहाली को हमेशा के लिए दूर कर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जब बस्ती के इस परिवार की दयनीय स्थिति, आवासहीनता और चार दिव्यांग बच्चों की पीड़ा की जानकारी मिली, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए जिला प्रशासन को व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का कड़ा निर्देश दिया। सीएम के स्पष्ट निर्देश थे कि सरकारी फाइलों और दफ्तरों के चक्कर कटवाने के बजाय अधिकारी स्वयं पीड़ित के दरवाजे पर जाएं और परिवार को सभी जरूरी सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही दिन में ऑन-द-स्पॉट उपलब्ध कराएं।

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बस्ती की जिलाधिकारी (DM) कृतिका ज्योत्स्ना और जिला समाज कल्याण विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई। प्रशासनिक अमले ने तत्काल मौके पर पहुंचकर परिवार की वास्तविक जरूरतों का आकलन किया और 24 घंटे के भीतर वह सब कुछ मुहैया करा दिया, जिसके लिए यह परिवार बरसों से तरस रहा था।

प्रशासन ने केवल आश्वासन नहीं दिया, बल्कि परिवार के जीवन स्तर को बुनियादी रूप से बदलने के लिए एक मुकम्मल कार्ययोजना लागू की:

सरकारी सहायता / योजना उपलब्ध कराई गई सुविधा परिवार पर प्रभाव व राहत
कांशीराम आवास योजना पक्का और सुरक्षित फ्लैट आवंटित बारिश में टपकती छत और पन्नी से मुक्ति, स्थायी सुरक्षित आश्रय
सहायक उपकरण (Wheelchairs) सभी दिव्यांग बच्चों के लिए व्हीलचेयर जमीन पर घिसटने से मुक्ति, सुगम आवाजाही और गतिशीलता
दिव्यांगजन पेंशन योजना बड़े बेटे अंकुर को नियमित मासिक पेंशन परिवार को दवाओं और जरूरी खर्चों के लिए नियमित वित्तीय सहारा
दिव्यांग प्रमाण पत्र दो बच्चों के जारी, दो की प्रक्रिया पूरी भविष्य की सभी राज्य व केंद्र सरकार की दिव्यांग योजनाओं की गारंटी
अंत्योदय राशन कार्ड 35 किलो मुफ्त राशन की व्यवस्था भूख और भुखमरी का डर खत्म, पौष्टिक अनाज की नियमित आपूर्ति
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना गैस चूल्हा और भरा हुआ एलपीजी सिलेंडर गीली लकड़ियों और धुएं से मुक्ति, स्वच्छ रसोई ईंधन

दिव्यांग बच्चों के पालन-पोषण में सबसे बड़ी चुनौती उनकी शिक्षा और मानसिक विकास को लेकर होती है। गरीबी और चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण ये बच्चे कभी स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच पाए थे।

सीएम योगी के विशेष निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने इन बच्चों की पढ़ाई का पूरा जिम्मा उठाया है:

  • बच्चों के स्तर और दिव्यांगता के प्रकार को ध्यान में रखते हुए उनका नजदीकी प्राथमिक विद्यालय और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के एकीकृत शिक्षा केंद्र में दाखिला कराया गया है।

  • बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को निर्देश दिए गए हैं कि स्पेशल एजुकेटर के माध्यम से बच्चों को उपचारात्मक और समावेशी शिक्षा दी जाए।

  • बच्चों के लिए मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें, स्टेशनरी और बैग की व्यवस्था प्रशासन द्वारा सुनिश्चित कर दी गई है।

वर्षों तक उपेक्षा और गरीबी का दंश झेलने वाले रामकिशन पांडे और उनकी पत्नी के चेहरे पर अब आंसुओं की जगह सुकून और कृतज्ञता के भाव हैं। पक्के मकान की चाबी और व्हीलचेयर हाथ में लेते हुए माता-पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा, “हम तो यह मान चुके थे कि हमारे बच्चों की जिंदगी इसी कीचड़ और पन्नी के नीचे घिसटते हुए बीत जाएगी। गरीबी ने ऐसा तोड़ा था कि हाथ फैलाने की नौबत आ चुकी थी। लेकिन महाराज जी (सीएम योगी) हमारे लिए भगवान बनकर आए हैं। उन्होंने एक झटके में हमें सिर पर छत दे दी, बच्चों को व्हीलचेयर और पेंशन दिला दी। अब हमारे बच्चे सम्मान के साथ जी सकेंगे और पढ़ सकेंगे। हम जीवन भर सरकार के इस उपकार को नहीं भूल सकते।”

बस्ती का यह मामला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीयत साफ और नेतृत्व संवेदनशील हो, तो व्यवस्था की लालफीताशाही टूट जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांग पेंशन को बढ़ाकर ₹1,000 प्रति माह करना, कृत्रिम अंग और मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल का मुफ्त वितरण और आवास योजनाओं में दिव्यांगों को प्राथमिकता देना जैसे कदम धरातल पर बदलाव ला रहे हैं। बस्ती के इस परिवार को मिला यह बहुआयामी संबल यह स्पष्ट संदेश देता है कि अंतिम पायदान पर खड़े सबसे लाचार व्यक्ति की पुकार भी आज सरकार के कानों तक सीधे पहुंच रही है।