RBI Digital Fraud New Rules: डिजिटल फ्रॉड होने पर अब बैंक लौटाएगा 85% तक पैसा, रिजर्व बैंक ने जारी किए नए कड़े नियम

RBI Digital Fraud New Rules: ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी का शिकार होने वाले बैंक ग्राहकों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक ऐतिहासिक और बेहद राहत भरी घोषणा की है। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते खतरों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने नए नियमों को नोटिफाई कर दिया है, जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति के साथ ₹50,000 तक का डिजिटल पेमेंट फ्रॉड होता है, तो उसके नुकसान के एक बहुत बड़े हिस्से की भरपाई बैंक को करनी होगी।

आरबीआई द्वारा 24 जून 2026 को जारी किए गए ये नए नियम आगामी 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में पूरी तरह लागू हो जाएंगे। इसे उन करोड़ों मध्यम और कम आय वर्ग के खाताधारकों के लिए संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी गाढ़ी कमाई पर साइबर अपराधी पलक झपकते ही डाका डाल देते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में ₹48,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी, कम आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

आरबीआई ने यह कड़ा कदम यूं ही नहीं उठाया है, बल्कि इसके पीछे डराने वाले आंकड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में देश के भीतर ₹48,000 करोड़ से भी अधिक के डिजिटल फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इन फ्रॉड का शिकार होने वाले अधिकांश लोग कम आय वर्ग (Low Income Group) से ताल्लुक रखते थे, जिनके लिए ₹10,000 या ₹20,000 की रकम भी जीवन भर की जमा-पूंजी जैसी होती है। इसी तबके के आर्थिक हितों की रक्षा करने और डिजिटल बैंकिंग के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए आरबीआई ने कंपनसेशन (मुआवजा) के नियमों में यह क्रांतिकारी बदलाव किया है।

नुकसान का 85% हिस्सा वापस पाने का हकदार होगा पीड़ित, जानिए क्या है गणित

आरबीआई के नए नियमों के तहत अब डिजिटल फ्रॉड का शिकार होने वाला व्यक्ति अपने कुल नुकसान के 85 फीसदी तक की भरपाई का कानूनी हकदार होगा। हालांकि, इसके लिए अधिकतम सीमा ₹25,000 तय की गई है।

नियम के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक किसी ऐसे फ्रॉड या अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन (EBT) की रिपोर्ट दर्ज कराता है, जिसमें उसका कुल नुकसान ₹50,000 तक का है, तो उसे उसके नेट लॉस का 85% या ₹25,000 (इनमें से जो भी राशि कम होगी) वापस दी जाएगी। लेकिन इस पैसे को वापस पाने के लिए ग्राहक को एक बेहद जरूरी शर्त पूरी करनी होगी, और वह है समय पर शिकायत दर्ज कराना।

5 दिनों के भीतर करनी होगी शिकायत, ₹500 से ऊपर के हर ट्रांजेक्शन पर अलर्ट जरूरी

केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को घटना की जानकारी होने या मैसेज मिलने के अधिकतम 5 दिनों के भीतर अपने बैंक में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज करानी होगी। यदि फ्रॉड बैंक की सुरक्षा प्रणाली में चूक या लापरवाही के कारण हुआ है, तो बैंक को बिना किसी आनाकानी के पूरी भरपाई करनी होगी।

इसके साथ ही, आरबीआई ने बैंकों पर नकेल कसते हुए नियम बनाया है कि ₹500 से अधिक के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन पर ग्राहक को तत्काल एसएमएस (SMS) या ईमेल अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा, ताकि ग्राहक को तुरंत फ्रॉड का पता चल सके।

45 दिनों में करना होगा केस का निपटारा, आरबीआई और बैंक मिलकर उठाएंगे खर्च का बोझ

आरबीआई ने बैंकों को अपनी शिकायत प्रणाली को अत्यधिक दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। अब हर बैंक को ग्राहकों की शिकायतों के रजिस्ट्रेशन के लिए 24 घंटे सातों दिन (24/7) काम करने वाला चैनल या हेल्पलाइन एक्टिव रखनी होगी। शिकायत मिलने के बाद बैंक को अधिकतम 45 दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर उसका निपटारा करना होगा। हालांकि, यदि फ्रॉड के तार विदेशों (International Fraud) से जुड़े हैं, तो बैंक को इसके लिए 60 दिनों का समय मिलेगा।

असाधारण बात यह है कि ₹29,412 से कम के फ्रॉड के मामलों में, जहां ग्राहक को 85% नुकसान का भुगतान किया जाना है, वहां बैंक पर पूरा बोझ नहीं पड़ेगा। इस कुल लागत का 65 फीसदी हिस्सा खुद आरबीआई वहन करेगा, जबकि 10 फीसदी हिस्सा पीड़ित ग्राहक के बैंक को और बाकी बचा 10 फीसदी हिस्सा उस बैंक को भुगतना होगा, जिस फ्रॉड अकाउंट में पैसा ट्रांसफर किया गया है। इससे बैंकों के बीच भी फ्रॉड रोकने को लेकर मुस्तैदी बढ़ेगी।

जागरूकता की भारी कमी: ठगी के बाद डरें नहीं, तुरंत दर्ज कराएं रिपोर्ट

बैंकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई के इस नए नियम से उन करोड़ों सीधे-साधे ग्राहकों को बहुत बड़ा वित्तीय सुरक्षा कवच मिलेगा, जो अब तक साइबर ठगों के आगे बेबस नजर आते थे। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर भी चिंता जताते हैं कि आज भी देश में डिजिटल फ्रॉड को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। अक्सर लोग फ्रॉड होने के बाद लोक-लाज या पुलिसिया कार्रवाई के डर से शिकायत ही दर्ज नहीं कराते, जिससे जालसाजों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं। अब समय आ गया है कि जनसंचार के सभी माध्यमों, सोशल मीडिया और टीवी विज्ञापनों के जरिए लोगों को इस नए नियम के प्रति जागरूक किया जाए ताकि हर पीड़ित समय रहते अपनी शिकायत दर्ज कराकर अपनी गाढ़ी कमाई वापस पा सके।