
भारतीय डेट म्यूचुअल फंड्स और बॉन्ड मार्केट में इस समय जबरदस्त रणनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है। ब्याज दरों (Interest Rates) के बदलते रुख और आर्थिक नीति के संकेतों के बीच देश के दिग्गज फंड मैनेजर्स के बीच निवेश की अवधि (Duration) को लेकर तीखी बहस और अलग-अलग दांव देखने को मिल रहे हैं। ₹22,000 करोड़ से ज्यादा के इस पूरे फिक्स्ड इनकम सेगमेंट में गिल्ट फंड्स (Gilt Funds) और डायनेमिक एसेट एलोकेशन वाले डायनेमिक बॉन्ड फंड्स (Dynamic Bond Funds) के बीच निवेशकों का पैसा लगाने को लेकर जंग छिड़ गई है।
ब्याज दरों के मोड़ पर फंड मैनेजर्स की अलग-अलग रणनीतियां
फंड मैनेजर्स इस समय बाजार की हर छोटी-बड़ी हलचल पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है, जिससे लंबी अवधि वाले गिल्ट फंड्स में शानदार रिटर्न मिलने की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ, बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए एक बड़ा धड़ा ऐसा भी है जो डायनेमिक बॉन्ड फंड्स को तरजीह दे रहा है। डायनेमिक फंड्स के पास यह फ्लेक्सिबिलिटी होती है कि वे बाजार के सेंटिमेंट के हिसाब से शॉर्ट टर्म से लॉन्ग टर्म ड्यूरेशन में तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं।
गिल्ट फंड्स में लॉन्ग ड्यूरेशन का दांव और उसके नफा-नुकसान
गिल्ट फंड्स मुख्य रूप से सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश करते हैं, जिसके कारण इनमें क्रेडिट रिस्क यानी पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है। जब ब्याज दरें घटने की उम्मीद होती है, तो फंड मैनेजर्स लॉन्ग ड्यूरेशन (लंबी अवधि) के सरकारी बॉन्ड्स में आक्रामक तरीके से खरीदारी करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्याज दरें गिरने पर इन बॉन्ड्स की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जिससे निवेशकों को कैपिटल गेन का बड़ा फायदा मिलता है। हालांकि, अगर ब्याज दरें उम्मीद के मुताबिक नहीं गिरीं, तो लंबी अवधि के इन फंड्स में अस्थिरता का जोखिम भी बढ़ जाता है।
डायनेमिक बॉन्ड फंड्स: बदलती हवा के साथ रणनीति बदलने का हुनर
इस जंग में दूसरा बड़ा दावेदार डायनेमिक बॉन्ड फंड्स हैं। इन फंड्स के मैनेजर्स किसी एक फिक्स्ड ड्यूरेशन के जाल में नहीं फंसते। यदि उन्हें लगता है कि बाजार में अनिश्चितता है या ब्याज दरें कुछ समय के लिए स्थिर रहेंगी, तो वे तुरंत अपनी होल्डिंग्स को कम अवधि वाले पेपर्स (Short-term Debt) में ट्रांसफर कर लेते हैं। यह रणनीति उन निवेशकों के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है जो खुद बाजार को ट्रैक नहीं कर पाते और फंड मैनेजर के अनुभव और सक्रिय प्रबंधन (Active Management) पर भरोसा करना चाहते हैं।
लोकल इन्वेस्टर्स और मेट्रो शहरों के निवेशकों के लिए क्या है सलाह
भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों (Geographical Markets) जैसे मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों के खुदरा निवेशकों में भी फिक्स्ड इनकम को लेकर जागरूकता बढ़ी है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर ही फैसला लेना चाहिए। जो लोग पूरी तरह सुरक्षित रहकर लंबी अवधि के लिए टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं, वे गिल्ट का रुख कर रहे हैं, जबकि मध्यम अवधि और फ्लेक्सिबिलिटी चाहने वाले लोग डायनेमिक फंड्स में अपना एलोकेशन बढ़ा रहे हैं।
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