Rajya Sabha Number Game: नवनिर्वाचित सांसदों की शपथ से बदला गणित; क्या उच्च सदन में NDA रचने जा रहा है इतिहास?

देश की राजनीति और संसद के उच्च सदन (Rajya Sabha) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों के शपथ ग्रहण के साथ ही सदन का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुका है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का पलड़ा अब राज्यसभा में पहले से कहीं ज्यादा भारी और मजबूत हो गया है. इस बड़े फेरबदल के बाद मोदी सरकार के पास उच्च सदन में ‘दो-तिहाई बहुमत’ का ऐतिहासिक आंकड़ा हासिल करने का एक बड़ा मौका बनता दिख रहा है.

यदि सरकार आगामी सत्रों में लोकसभा की सीटें बढ़ाने (परिसीमन) और आगामी आम चुनाव से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जमीन पर उतारने से जुड़े बड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों को अमलीजामा पहनाने की कोशिश करती है, तो राज्यसभा का यह नया गणित गेमचेंजर साबित होने वाला है.

निर्दलीयों और नामांकित सांसदों के दम पर साधारण बहुमत से आगे

वर्तमान में 242 प्रभावी सदस्यों वाली राज्यसभा में एनडीए के अपने सांसदों की संख्या बढ़कर 141 हो चुकी है. इसके अलावा, विधायी कामकाज के दौरान सरकार को 10 नामांकित (Nominated) और निर्दलीय सांसदों का भी साथ मिलना तय माना जा रहा है. इन दोनों को मिलाकर एनडीए का पक्का आंकड़ा 151 तक पहुंच जाता है, जो सदन में किसी भी सामान्य बिल को पास कराने के लिए जरूरी साधारण बहुमत के आंकड़े से काफी आगे है. हालांकि, संविधान संशोधन जैसे बड़े फैसलों के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत की दहलीज को छूने के लिए एनडीए अभी भी जादुई आंकड़े से 11 सीट पीछे चल रहा है.

बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस संभालेंगी किंगमेकर की भूमिका

संसद के इस नए समीकरण में दो क्षेत्रीय ताकतें- ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD- 5 सांसद) और आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP- 4 सांसद) इस समय किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रही हैं. ये दोनों दल न तो एनडीए का हिस्सा हैं और न ही विपक्षी ‘INDIA’ ब्लॉक से जुड़े हैं. लेकिन संसदीय इतिहास गवाह है कि इन दोनों पार्टियों ने अतीत में भी कई जटिल मुद्दों पर केंद्र सरकार के बड़े और मुख्य लेजिस्लेटिव एजेंडे का खुलकर समर्थन किया है. यदि इन 9 सांसदों का परोक्ष या प्रत्यक्ष साथ सरकार को मिलता है, तो राज्यसभा में एनडीए का ग्राफ सीधा 160 तक पहुंच जाएगा.

क्या उपचुनाव और विपक्ष की बगावत दिलाएगी ‘जादुई 164’?

संविधान संशोधन का गणित: राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत (Two-Third Majority) के लिए पूरे सदन की स्थिति में 164 वोटों की आवश्यकता होती है, और एनडीए अब इसके बेहद करीब है.

पश्चिम बंगाल की तीन खाली राज्यसभा सीटों पर आने वाले समय में उपचुनाव होने वाले हैं. राज्य विधानसभा में भाजपा के मौजूदा विधायकों की संख्या को देखते हुए इन सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जिससे यह आंकड़ा 163 तक पहुंच सकता है. इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुटों का दावा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ और सांसद पाला बदल सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो एनडीए के लिए 164 का जादुई आंकड़ा हासिल करना बेहद आसान हो जाएगा.

विपक्ष में बिखराव से लोकसभा की राह भी होगी आसान?

राज्यसभा में जहां सरकार के लिए रास्ता पूरी तरह साफ दिख रहा है, वहीं असली परीक्षा लोकसभा में होनी है. हालांकि, विपक्षी खेमे में मची आंतरिक कलह ने सत्ता पक्ष की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं. संसद का चौथा सबसे बड़ा दल रहने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की सुगबुगाहट है, तो वहीं तमिलनाडु में द्रमुक (DMK) और कांग्रेस के बीच अनबन की खबरों ने विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की स्थिति को कमजोर किया है.

अगर लोकसभा स्पीकर द्वारा टीएमसी और शिवसेना (UBT) के बागी धड़ों के विलय को औपचारिक हरी झंडी मिल जाती है, तो लोकसभा में भी एनडीए की संख्यात्मक ताकत अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाएगी. हालांकि, इसके बावजूद 540 सदस्यीय निचले सदन में संविधान संशोधन के लिए आवश्यक 360 के विशाल आंकड़े तक पहुंचना एनडीए के लिए अब भी एक चुनौतीपूर्ण डगर होगी.