
लगातार बढ़ती जा रही देशव्यापी महंगाई के बीच देश की आम जनता की जेब पर एक बार फिर एक कड़ा और बड़ा बोझ आ पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने वैश्विक हालातों की समीक्षा के बाद शनिवार को देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी कर दी है। हालांकि, राहत की बात इतनी है कि इस बार कीमतों में की गई वृद्धि एक रुपये से कम की है, लेकिन मई के महीने में बार-बार बढ़ रहे रेट्स ने आम मध्यमवर्गीय परिवारों और वाहन चालकों की चिंताओं को अत्यधिक बढ़ा दिया है।
अकेले मई 2026 के इस चालू महीने में यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में सीधे इजाफा किया गया है। कमोडिटी बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया रिकॉर्ड उछाल और पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का गंभीर असर इस वृद्धि की सबसे मुख्य वजह है। पेट्रोल-डीजल के महंगे होने से न केवल दैनिक परिवहन और वाहन चलाना खर्चीला हो गया है, बल्कि माल ढुलाई (Freight Cost) महंगी होने से फल, सब्जी और रोजमर्रा की आवश्यक चीजें भी आने वाले दिनों में महंगी हो सकती हैं।
दिल्ली में कितना बढ़ा दाम? जानिए नया रेट
देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार को हुई इस नई बढ़ोतरी के बाद ईंधन की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं:
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पेट्रोल: दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद अब दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल का नया भाव ₹99.51 पर पहुंच गया है, जो कि ₹100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से बेहद करीब है।
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डीजल: वहीं, कमर्शियल और भारी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले डीजल के दामों में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। इस कड़े बदलाव के बाद दिल्ली में अब एक लीटर डीजल के लिए ग्राहकों को ₹92.49 चुकाने होंगे।
आर्थिक राजधानी मुंबई में ईंधन का हाल
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की बात करें तो वहां टैक्स स्लैब अलग होने के कारण कीमतें पहले से ही काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बीते शुक्रवार (22 मई 2026) को मुंबई के सर्राफा और कमोडिटी क्षेत्र में पेट्रोल की कीमत ₹108.00 प्रति लीटर दर्ज की गई थी, जबकि डीजल का भाव ₹94.00 प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ था। शनिवार को हुई देशव्यापी बढ़ोतरी के बाद मुंबई में भी इन कीमतों में तदनुसार वृद्धि दर्ज की गई है।
अकेले मई महीने में ही लग चुकी है तेल की ‘तिहरी मार’
टैक्सपेयर्स और उपभोक्ताओं के लिए यह महीना ईंधन के मोर्चे पर बेहद कड़ा साबित हुआ है, क्योंकि पिछले कुछ ही दिनों में तेल कंपनियों ने तीन बार कीमतों में संशोधन किया है:
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ताजा बढ़ोतरी (23 मई): पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ।
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सप्ताह की शुरुआत में: इसी हफ्ते की शुरुआत में भी कंपनियों ने हूबहू पेट्रोल पर 87 पैसे और डीजल पर 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
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15 मई का कड़ा झटका: इससे पहले बीते 15 मई को सरकार और तेल कंपनियों ने दोनों ईंधनों की कीमतों में सीधे ₹3 प्रति लीटर की एकमुश्त भारी बढ़ोतरी कर उपभोक्ताओं की कमर तोड़ दी थी।
साल 2022 के बाद तेल का यह सबसे बड़ा और कड़ा उछाल
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, अप्रैल 2022 के बाद यह पहली बार है जब भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा इतने कम समय के अंतराल पर ईंधन की कीमतों में इतनी बड़ी और लगातार वृद्धि की गई है। साल 2022 के उस दौर में वैश्विक संकट के चलते तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹10 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए थे।
भारत की 85% निर्भरता और ईरान युद्ध का असली पेंच
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी दैनिक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक कुल कच्चे तेल का लगभग 85 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली छोटी सी हलचल या कच्चे तेल की प्रति बैरल कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा और त्वरित असर भारत के घरेलू पेट्रोल-डीजल रिटेल काउंटरों पर देखने को मिलता है।
वर्तमान में चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुख्य समुद्री व्यापारिक मार्गों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कमी की आशंका गहरा गई है। इसी वैश्विक दबाव के चलते भारतीय तेल कंपनियां अपने रिफाइनरी और इनपुट नुकसान की भरपाई करने के लिए देश के भीतर लगातार दाम बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा खामियाजा आम उपभोक्ता को अपनी जेब ढीली करके भुगतना पड़ रहा है।
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