
हमारे समाज में शादी के कुछ साल बीत जाने के बाद भी अगर किसी महिला को संतान सुख नहीं मिलता, तो उसे तरह-तरह के मानसिक और पारिवारिक दबावों से गुजरना पड़ता है। इस चिंता और मां बनने की बेताबी में कई बार महिलाएं समझदारी भूलकर अंधविश्वास के जाल में फंस जाती हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और आंखें खोल देने वाला मामला हाल ही में मशहूर गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका के सामने आया, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आज भी लोग मेडिकल साइंस से ज्यादा चमत्कारों पर भरोसा करने लगते हैं।
डॉ. प्रियंका के क्लीनिक में एक महिला पहुंची और उसने बेहद उम्मीद के साथ कहा, “मैडम, एक बाबा जी ने मेरी माला देखकर कहा है कि मैं प्रेग्नेंट हूं। मेरे पिछले 4 महीने से पीरियड्स भी नहीं आए हैं, इसलिए आप एक बार अच्छी तरह से जांच कर लीजिए।” महिला की बात सुनकर डॉक्टर ने जब उसकी जांच की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली।
पीरियड न आने का मतलब हर बार प्रेग्नेंसी नहीं होता
डॉक्टर ने जब महिला का अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) टेस्ट किया, तो पाया कि उसके गर्भ में कोई बच्चा नहीं है और उसकी बच्चेदानी (Uterus) पूरी तरह खाली है। जब डॉक्टर ने उसे बताया कि वह प्रेग्नेंट नहीं है, तो महिला हैरान रह गई। उसे अपनी कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसके मन में बाबा की बात और 4 महीने से पीरियड न आने का पक्का भरोसा था।
डॉक्टर ने जब उससे पूछा कि क्या उसने घर पर यूरिन टेस्ट (Urine Pregnancy Test) किया था, तो महिला ने बताया कि टेस्ट में केवल एक ही लाइन आई थी। इसके बाद डॉक्टर ने उसे प्यार से समझाया कि टेस्ट किट में एक लाइन आने का मतलब होता है कि रिजल्ट नेगेटिव है। प्रेग्नेंसी तभी मानी जाती है जब किट में दो साफ लाइनें दिखाई दें।
मेडिकल साइंस बनाम अंधविश्वास: क्या है दोनों में अंतर?
महिला की जिद और बाबा पर उसके भरोसे को देखते हुए डॉक्टर ने उसे समझाया कि अगर सिर्फ किसी बाबा की माला देखने से बच्चे होने लगते, तो दुनिया में इतनी बड़ी-बड़ी मशीनों, डॉक्टरों और मेडिकल टेस्ट्स की कोई जरूरत ही नहीं रह जाती।
इस तरह की स्थिति में महिलाओं को जागरूक करने के लिए नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है कि पीरियड रुकने के असली कारण क्या होते हैं:
फॉल्स प्रेग्नेंसी का शिकार क्यों होती हैं महिलाएं?
डॉक्टर की सलाह: अंधविश्वास से दूर रहें
डॉक्टर प्रियंका ने महिला को ढांढस बंधाते हुए कहा, “मैं आपकी भावनाएं समझ सकती हूँ। आपकी शादी को 7 साल हो चुके हैं और मां बनने की चाहत स्वाभाविक है। लेकिन इस मानसिक फिक्र के कारण आपके शरीर के हार्मोन्स बिगड़ गए हैं, जिसकी वजह से पिछले 4 महीने से आपके पीरियड्स रुके हुए हैं। यह ‘फॉल्स प्रेग्नेंसी’ का मामला है, जिसमें महिला का मन इतना ज्यादा बच्चा चाहता है कि उसका शरीर झूठे लक्षण दिखाने लगता है। इसलिए बाबाओं के चक्कर में अपना समय और पैसा बर्बाद न करें और सही डॉक्टरी इलाज पर भरोसा रखें।”
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शादी के कई सालों बाद भी गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, तो पति-पत्नी दोनों को किसी अच्छे फर्टिलिटी एक्सपर्ट या गाइनेकोलॉजिस्ट से मिलकर अपनी जांच करानी चाहिए। सही समय पर सही इलाज कराने से माता-पिता बनने का सपना सच हो सकता है, जबकि अंधविश्वास के चक्कर में पड़ने से उम्र और सेहत दोनों का नुकसान होता है।
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