
मासिक धर्म यानी पीरियड्स हर महिला के स्वस्थ शरीर और प्रजनन तंत्र (Reproductive System) की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। हर महीने होने वाले इस ब्लीडिंग चक्र के दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। हालांकि, कई बार महिलाएं पीरियड्स के दौरान होने वाली कुछ असहज समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। पीरियड ब्लड में से गाढ़े थक्के (Clots) निकलना और उसमें से अत्यधिक तेज या सड़न जैसी बदबू आना ऐसी ही दो समस्याएं हैं, जो केवल खराब हाईजीन का नतीजा नहीं होतीं, बल्कि शरीर में पनप रही किसी गंभीर अंदरूनी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती हैं। अगर इन लक्षणों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर ये बांझपन (Infertility) या गर्भाशय से जुड़ी बड़ी जटिलताओं का कारण बन सकती हैं।
पीरियड्स में खून के थक्के और बदबू आने के 5 मुख्य कारण
पीरियड्स में कभी-कभी छोटे थक्के (सिक्के जितने छोटे) आना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर इनका आकार बड़ा हो और साथ में दुर्गंध भी आ रही हो, तो इसके पीछे कई चिकित्सीय कारण हो सकते हैं:
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बैक्टीरियल वेजिनोसिस और वजाइनल इन्फेक्शन: अगर पीरियड ब्लड से तेज मछली जैसी (Fishy Odor) या सड़न जैसी बदबू आ रही है, तो इसका सबसे बड़ा कारण बैक्टीरियल वेजिनोसिस (Bacterial Vaginosis) या यीस्ट इन्फेक्शन हो सकता है। यह वजाइना में गुड और बैड बैक्टीरिया के संतुलन बिगड़ने पर होता है।
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गर्भाशय में गांठ या फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids): गर्भाशय की दीवारों में बनने वाली गैर-कैंसर ट्यूमर या गांठें (Fibroids) अत्यधिक ब्लीडिंग और बड़े-बड़े खून के थक्कों का मुख्य कारण होती हैं। जब यह थक्का गर्भाशय में ज्यादा देर तक रुका रहता है, तो बैक्टीरिया के संपर्क में आकर इसमें से बदबू आने लगती है।
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हार्मोनल असंतुलन (PCOS / PCOD): एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में उतार-चढ़ाव होने पर गर्भाशय की अंदरूनी परत (Endometrium) बहुत मोटी बन जाती है। जब यह परत झड़ती है, तो भारी मात्रा में ब्लीडिंग होती है और बड़े-बड़े क्लॉट्स बनते हैं।
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पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID): यह महिलाओं के प्रजनन अंगों में होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। पीआईडी होने पर पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द, बदबूदार डिस्चार्ज और बड़े थक्के आने लगते हैं।
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एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): जब गर्भाशय की अंदरूनी परत के टिश्यूज गर्भाशय के बाहर (जैसे फैलोपियन ट्यूब या ओवरी पर) उगने लगते हैं, तो यह भयंकर दर्द, हैवी फ्लो और थक्कों का कारण बनता है।
नॉर्मल और एब्नॉर्मल क्लॉट्स में अंतर कैसे पहचानें?
हर महिला को यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन से थक्के सामान्य हैं और कौन से खतरनाक। जब पीरियड फ्लो बहुत तेज होता है, तो शरीर में मौजूद नेचुरल एंटी-कोगुलेंट्स (रक्त को पतला करने वाले तत्व) पूरा काम नहीं कर पाते, जिससे खून जमने लगता है और छोटे-मोटे क्लॉट्स बाहर निकलते हैं। अगर क्लॉट्स का आकार 1 रुपये के सिक्के से छोटा है, उनका रंग गहरा लाल या मैरून है और वे केवल भारी फ्लो वाले दिनों (जैसे पहले या दूसरे दिन) आते हैं, तो यह सामान्य बात है।
लेकिन, अगर थक्कों का आकार गोल्फ की बॉल या नींबू जितना बड़ा है, उनका रंग बहुत डार्क या काला है, और वे पीरियड्स के सभी दिनों में लगातार आ रहे हैं, तो यह एक एब्नॉर्मल स्थिति है। इसके साथ ही अगर आपको हर 1-2 घंटे में पैड बदलना पड़ रहा है, तो इसे मेडिकल भाषा में ‘मेनोरेजिया’ (Menorrhagia) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए।
पीरियड्स में तेज बदबू आने का कारण और हाइजीन से जुड़ी गलतियां
पीरियड ब्लड में लोहे (Iron) और टिश्यूज की हल्की गंध होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह गंध बहुत तेज और असहनीय हो जाए, तो यह इन्फेक्शन की ओर इशारा करती है। खराब पर्सनल हाइजीन भी इसका बड़ा कारण होती है। कई महिलाएं एक ही सेनेटरी पैड को 8 से 10 घंटे तक लगाए रखती हैं। पैड पर जमा पसीना और खून बैक्टीरिया के पनपने का सबसे बड़ा ठिकाना बन जाता है, जिससे तेज दुर्गंध आने लगती है।
इसके अलावा, वजाइना के अंदरूनी हिस्से को कठोर साबुन या केमिकल युक्त इंटीमेट वॉश से बार-बार धोना भी हानिकारक होता है। इससे वजाइना का प्राकृतिक पीएच (pH) लेवल बिगड़ जाता है, जिससे इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। टाम्पोन या पैड को सही समय पर न बदलना और सुखाए बिना नमी वाले अंडरगार्मेंट्स पहनना भी दुर्गंध और क्लॉट्स का मुख्य कारण बनता है।
इन गंभीर समस्याओं से बचने के लिए जरूर फॉलो करें ये 5 हाइजीन रूल्स
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हर 4-6 घंटे में पैड बदलें: चाहे फ्लो हल्का ही क्यों न हो, 4 से 6 घंटे के भीतर सेनेटरी पैड या टाम्पोन जरूर बदलें। मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कर रही हैं, तो उसे 8-12 घंटे में खाली कर अच्छे से साफ करें।
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केवल सादे पानी का करें इस्तेमाल: प्राइवेट पार्ट की सफाई के लिए केवल हल्के गुनगुने या सादे पानी का इस्तेमाल करें। किसी भी तेज खुशबूदार साबुन या केमिकल वॉश से बचें।
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कॉटन और ब्रीदेबल अंडरगार्मेंट्स पहनें: सिंथेटिक कपड़ों की जगह सूती (Cotton) अंडरवियर पहनें ताकि त्वचा सांस ले सके और पसीना न जमे।
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सही डाइट और भरपूर पानी: पीरियड्स में खुद को हाइड्रेटेड रखें। पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और इन्फेक्शन का खतरा कम होता है। डाइट में विटामिन-सी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और प्रोबायोटिक्स (जैसे दही) शामिल करें।
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इंटीमेट एरिया को सूखा रखें: वॉशरूम इस्तेमाल करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की तरफ (Front to Back) सफाई करें और एरिया को पूरी तरह सूखा रखें ताकि बैक्टीरिया न पनपें।
कब तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाना है अनिवार्य?
अगर आपको पीरियड्स के दौरान खून के थक्कों और बदबू के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी नजर आए, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर की सलाह लें:
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थक्कों का आकार 1-2 इंच से बड़ा होना और हर घंटे पैड बदलने की नौबत आना।
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पीरियड साइकिल खत्म होने के बाद भी लगातार बदबूदार वजाइनल डिस्चार्ज होना।
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पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में तेज और असहनीय दर्द होना।
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पीरियड्स के साथ-साथ तेज बुखार, ठंड लगना या चक्कर आना।
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पीरियड्स 7 से 8 दिनों से ज्यादा समय तक खिंचना।
मासिक धर्म महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य का आईना होता है। पीरियड्स में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को शर्म या झिझक के कारण छिपाना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। खून के बड़े थक्के और तेज बदबू शरीर द्वारा दिए जाने वाले चेतावनी के संकेत हैं। समय पर सही डॉक्टरी जांच, अल्ट्रासाउंड और सही हाइजीन रूटीन अपनाकर आप गर्भाशय और इन्फेक्शन से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रह सकती हैं।
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