
गर्मियों के मौसम में आम का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। भारत में लंगड़ा, चौंसा, दशहरी और हाफूस जैसी आम की सैकड़ों किस्में मिलती हैं और लोग इन्हें बड़े चाव से खाते हैं। आम को अमूमन ‘फलों का राजा’ कहा जाता है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे आम के बारे में बताने जा रहे हैं जो राजाओं का भी राजा है। इस आम का नाम है ‘मियाजाकी’ (Miyazaki)। इसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि इसे केवल दुनिया के बेहद अमीर लोग ही खरीद पाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके एक किलोग्राम की कीमत करीब दो से तीन लाख रुपये तक चली जाती है।
इस महंगे और लग्जरी आम को लेकर इन दिनों भारत में एक दिलचस्प मामला सामने आया है। ओडिशा के एक साधारण किसान देबा पधियामी ने अपने खेत में इस कीमती आम को उगाने का बड़ा रिस्क तो उठा लिया और वे इसमें कामयाब भी रहे। लेकिन अब उनकी रातों की नींद उड़ी हुई है। देबा परेशान हैं कि इतने महंगे आम को स्थानीय बाजार में खरीदेगा कौन? दूसरी बड़ी आफत यह है कि जब तक यह आम पेड़ पर रहेगा, तब तक इसके चोरी होने का डर बना रहेगा। इसलिए वे दिन-रात लाठी लेकर अपने बाग की रखवाली कर रहे हैं और सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि इस फल को सही जगह बेचने में उनकी मदद की जाए।
क्या है मियाजाकी आम का इतिहास और यह इतना महंगा क्यों है?
अब आप सोच रहे होंगे कि पेड़ पर उगने वाले एक फल की कीमत लाखों में कैसे हो सकती है? असल में मियाजाकी आम पूरी तरह से कुदरती प्रजाति नहीं है, बल्कि इसे इंसानी समझ और विज्ञान की मदद से तैयार किया गया है।
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जापान से है कनेक्शन: साल 1980 के दशक में जापान के क्यूशू राज्य में स्थित मियाजाकी शहर के कुछ रिसर्चर्स और स्थानीय किसानों ने मिलकर इस अनोखी तकनीक पर काम शुरू किया था।
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विशेष मिट्टी और तकनीक: वहां के वैज्ञानिकों ने इलाके की मिट्टी और जलवायु को इस पौधे के हिसाब से ढाला और नई ब्रीडिंग टेक्नोलॉजी की मदद से इस पौधे को विकसित किया।
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लंबी शेल्फ लाइफ: मेहनत रंग लाई और जो आम पैदा हुआ, उसका नाम शहर के नाम पर ही ‘मियाजाकी’ रख दिया गया। यह आम खाने में बेहद रसीला तो था ही, साथ ही इसकी शेल्फ लाइफ बहुत लंबी थी, यानी इसे बहुत दिनों तक बिना खराब हुए स्टोर किया जा सकता था। इसमें कीड़े लगने का खतरा भी न के बराबर था।
‘सूर्य का अंडा’ (Egg of the Sun) और इसकी अनोखी खेती
इस आम का सबसे बड़ा आकर्षण इसका रंग रूप है। यह आम बाकी आमों की तरह पकने के बाद पीला या हरा नहीं दिखाई देता। जब यह पेड़ पर पूरी तरह पक जाता है, तो इसका रंग गहरा बैंगनी से बदलकर एकदम चटक लाल (Ruby Red) हो जाता है। इसी खूबसूरत रंगत की वजह से इसे जापान में ‘एग ऑफ द सन’ यानी सूर्य का अंडा भी कहा जाता है।
खेती का अनूठा तरीका:
मियाजाकी आम की देखरेख किसी छोटे बच्चे की तरह की जाती है। इसकी सिंचाई के लिए किसी भी साधारण पानी का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि इसके लिए बेहद साफ और फिल्टर किए गए पानी का उपयोग किया जाता है। इसके पौधों को अप्रैल से अगस्त के महीनों में विशेष तापमान में रखा जाता है। जब आम पक जाते हैं, तो उन्हें तोड़ने के लिए किसी डंडे या मशीन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता। फलों को किसी भी तरह की खरोंच या नुकसान से बचाने के लिए इन्हें बेहद सावधानी से हाथों से तोड़ा जाता है। बाजार में भेजने से पहले हर एक आम का कड़ा सरकारी क्वालिटी चेक होता है।
मियाजाकी आम की मुख्य विशेषताएं (At a Glance)
| विशेषता / खूबी | विवरण (Details) |
| अनुमानित कीमत | ₹2,00,000 से ₹3,00,000 प्रति किलोग्राम |
| मूल देश और शहर | मियाजाकी शहर, जापान (1980 के दशक से शुरुआत) |
| पकने पर रंग | गहरा बैंगनी से बदलकर पूरी तरह चटक लाल हो जाना |
| लोकप्रिय नाम | ‘Egg of the Sun’ (सूर्य का अंडा) |
| तोड़ने का नियम | केवल हाथों से बेहद सटीकता और सावधानी के साथ |
सेहत के लिए कितना फायदेमंद है यह लग्जरी आम?
लाखों रुपये की कीमत वाले इस आम के हेल्थ बेनेफिट्स भी काफी शानदार हैं। मियाजाकी आम के अंदर शरीर के लिए जरूरी कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व कूट-कूट कर भरे होते हैं:
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इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन-ए और विटामिन-सी पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी और चेहरे की स्किन को चमकदार बनाए रखने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
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इसमें भारी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं।
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भरपूर फाइबर होने के कारण यह पाचन तंत्र को भी एकदम दुरुस्त रखता है।
हालांकि, डाइटीशियन और डॉक्टर्स यह सलाह भी देते हैं कि जो लोग पहले से किसी गंभीर बीमारी या एलर्जी से जूझ रहे हैं, उन्हें बिना डॉक्टरी परामर्श के इस तरह के किसी भी नए या अत्यधिक मीठे फल का सेवन नहीं करना चाहिए। ओडिशा के किसान देबा की इस कहानी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय किसान किसी भी वैश्विक तकनीक को अपना सकते हैं, बस अब उन्हें सही बाजार और सुरक्षा की दरकार है।
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