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NSE IPO पर ब्रोकरेज फर्म्स क्यों फिदा: 93% बाजार हिस्सेदारी और BSE से सस्ते वैल्यूएशन वाली 5 बड़ी वजहें

भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक निर्गमों में शामिल नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ को लेकर दलाल स्ट्रीट के प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज का रुख बेहद सकारात्मक और आक्रामक बना हुआ है। घरेलू व संस्थागत निवेशकों के बीच एनएसई के पब्लिक इश्यू को लेकर जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। सैमको सिक्योरिटीज (SAMCO Securities) और एसबीआई सिक्योरिटीज (SBI Securities) सहित प्रमुख शोध फर्मों ने इस मेगा आईपीओ को दीर्घावधि (Long-Term) वेल्थ क्रिएशन के लिए सब्सक्राइब करने की स्पष्ट अनुशंसा दी है। बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट तर्क है कि एनएसई केवल एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह भारत के तेजी से विस्तार करते वित्तीय तंत्र, इक्विटी कल्चर और अभूतपूर्व पूंजी बाजार वृद्धि की अनिवार्य बुनियादी रीढ़ (Core Market Infrastructure) है। संस्थागत गहराई, अप्रतिद्वंद्वी तरलता (Liquidity), आधुनिकतम सर्वर आर्किटेक्चर और मजबूत वित्तीय बैलेंस शीट के संगम के चलते यह निर्गम लंबी अवधि में निवेशकों के पोर्टफोलियो को शानदार सुरक्षा और रिटर्न दिलाने की पूरी क्षमता रखता है।

किसी भी एक्सचेंज कारोबार की सबसे बड़ी ताकत उसका ट्रेडिंग वॉल्यूम और नेटवर्क इफेक्ट होता है, और इस मोर्चे पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपने प्रतिस्पर्धियों से मीलों आगे खड़ा दिखाई देता है। कारोबारी वर्ष 2026 के आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, कैश इक्विटी सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 92.99 प्रतिशत के विशाल स्तर पर दर्ज की गई है। वहीं, इक्विटी फ्यूचर्स सेगमेंट में एक्सचेंज का दबदबा लगभग पूर्ण एकाधिकार जैसा है, जहां इसकी बाजार हिस्सेदारी 99.79 प्रतिशत रही है। इसके अलावा, भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में भी एनएसई ने 74.71 प्रतिशत की मजबूत पकड़ बनाए रखी है। एसबीआई सिक्योरिटीज ने अपनी विस्तृत शोध रिपोर्ट में एनएसई को भारतीय वित्तीय परिदृश्य की सबसे अभेद्य और शक्तिशाली फ्रेंचाइजी करार दिया है। विशाल पैमाने, व्यापक तरलता, एकीकृत क्लियरिंग सिस्टम (NSE Clearing), और करोड़ों खुदरा व विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के अटूट भरोसे का सीधा लाभ एनएसई को लगातार परिचालन दक्षता के रूप में मिल रहा है।

आईपीओ के ऊपरी मूल्य दायरे (Upper Price Band) 1,785 रुपये प्रति शेयर पर एनएसई का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2026 की कुल कमाई के आधार पर लगभग 42.9 गुना (P/E Ratio 42.9x) बैठता है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार यह वैल्यूएशन निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक और उचित अवसर प्रस्तुत करता है, क्योंकि शेयर बाजार में पहले से सूचीबद्ध इसके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का मौजूदा वैल्यूएशन लगभग 49.3 गुना के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जब उद्योग के निर्विवाद मार्केट लीडर का मूल्यांकन अपने छोटे प्रतिस्पर्धी से कम गुणक पर उपलब्ध हो, तो वह लिस्टिंग गेन और दीर्घकालिक निवेश दोनों ही पैमानों पर सुरक्षा मार्जिन प्रदान करता है। वित्तीय मजबूती की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में एनएसई ने अपने मुख्य परिचालनों से 16,601 करोड़ रुपये का शानदार राजस्व अर्जित किया, जिस पर 10,302 करोड़ रुपये का कर पश्चात शुद्ध मुनाफा (PAT) दर्ज हुआ। इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन 66.9 प्रतिशत के असाधारण स्तर पर रहा, जबकि इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 33 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो वैश्विक वित्तीय एक्सचेंजों के शीर्ष मानकों में गिना जाता है।

मौजूदा कारोबारी वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि एनएसई की विकास गति थमी नहीं है, बल्कि लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। पहली तिमाही के दौरान कंपनी के राजस्व में सालाना आधार पर 13.1 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ऑपरेटिंग एबिटा में 14.84 प्रतिशत का उछाल देखने को मिला। सबसे उत्साहजनक पहलू यह रहा कि इस अवधि के दौरान कैश मार्केट के औसत दैनिक ट्रेडिंग मूल्य (Average Daily Trading Volume – ADTV) में 25.25 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज हुई। ऐतिहासिक विश्लेषण को देखें तो वित्त वर्ष 2024 से लेकर वित्त वर्ष 2026 के बीच तीन वर्षों के दौरान एनएसई की शीर्ष कमाई में औसतन 6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर (CAGR) से इजाफा हुआ, जबकि बेहतर मार्जिन और लागत नियंत्रण के दम पर इसका शुद्ध मुनाफा 11 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है। यह स्थिर वित्तीय प्रदर्शन एक्सचेंज की वित्तीय परिपक्वता को दर्शाता है।

एनएसई की राजस्व संरचना का सबसे सकारात्मक पहलू इसका विविधीकरण (Diversification) है। एक्सचेंज की आय केवल खुदरा या संस्थागत सौदों पर लगने वाले एसटीटी और ट्रांजैक्शन चार्जेस पर निर्भर नहीं है। गैर-ट्रेडिंग वर्टिकल्स जैसे टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, इंडेक्स लाइसेंसिंग (NSE Indices) और मार्केट डेटा सेवाओं ने वित्त वर्ष 2026 के कुल राजस्व में करीब 12 प्रतिशत का अहम योगदान दिया है। इसके अलावा, एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज के माध्यम से गुजरात स्थित इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (GIFT City) में हो रहे वैश्विक डेरिवेटिव्स और डॉलर-मूल्यवर्गित अनुबंधों के विस्तार से भविष्य में नए राजस्व स्रोत खुलने की प्रबल संभावनाएं हैं। वेंचुरा सिक्योरिटीज की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, एनएसई का आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर वैश्विक स्तर पर सबसे आधुनिक है, जिसने एक ही कारोबारी सत्र में 21.9 बिलियन पीक ऑर्डर मैसेज को सफलतापूर्वक संभाला और 24 मार्च 2026 को एक ही दिन में 20.1 करोड़ ट्रेड प्रोसेस करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया।

सकारात्मक पक्षों के साथ-साथ ब्रोकरेज फर्मों ने निवेशकों को कुछ संरचनात्मक जोखिमों के प्रति भी आगाह किया है। एनएसई के रेवेन्यू मॉडल में सबसे बड़ा जोखिम डेरिवेटिव्स, विशेषकर इक्विटी ऑप्शंस ट्रेडिंग पर अत्यधिक निर्भरता है। वित्त वर्ष 2026 में एक्सचेंज के कुल परिचालन राजस्व का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग से प्राप्त हुआ था। इसके अलावा, इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में बीएसई की आक्रामक वापसी के चलते एनएसई की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2024 के 96.86 प्रतिशत से फिसलकर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 68.48 प्रतिशत पर आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) खुदरा निवेशकों की सुरक्षा के लिए फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) नियमों को और सख्त करता है, लॉट साइज में बदलाव करता है या ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरों में वृद्धि होती है, तो डेरिवेटिव्स वॉल्यूम में आने वाली किसी भी गिरावट का सीधा असर एनएसई की टॉपलाइन कमाई पर पड़ सकता है। इन जोखिमों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था के औपचारिक वित्तीयकरण और इक्विटी पैठ को देखते हुए अधिकांश विश्लेषक एनएसई को लंबी अवधि का अनिवार्य कोर निवेश मान रहे हैं।