इजरायल ही नहीं, इन दो ताकतवर मुस्लिम देशों ने भी ईरान पर बरसाईं मिसाइलें?

दुबई/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते हालातों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। अब तक माना जा रहा था कि ईरान के खिलाफ केवल इजरायल और पश्चिमी देश ही मोर्चा खोले हुए हैं, लेकिन हालिया खुलासे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, दो प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ईरान के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई में हिस्सा लिया था। यह खुलासा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि इस्लामिक जगत के भीतर गहरे होते मतभेदों और बदलती रणनीतियों की ओर भी इशारा करता है।

UAE के लड़ाकू विमानों की गोपनीय स्ट्राइक सूत्रों का दावा है कि संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बेहद गुप्त सैन्य अभियान चलाया था। बताया जा रहा है कि UAE की वायुसेना ने ईरानी सीमा के भीतर स्थित कुछ रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि इस ऑपरेशन को काफी गोपनीय रखा गया था, लेकिन अब यह बात छनकर बाहर आ रही है कि खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए अब ‘रक्षात्मक’ के बजाय ‘आक्रामक’ रुख अपना लिया है। ईरान के बढ़ते प्रभाव और हालिया ड्रोन हमलों के जवाब में यह कार्रवाई एक बड़े संदेश के तौर पर देखी जा रही है।

सऊदी अरब की वायुसेना का पहली बार दिखा रौद्र रूप इतिहास में पहली बार ऐसी खबरें आई हैं कि सऊदी अरब की रॉयल एयरफोर्स ने ईरान के भीतर घुसकर बमबारी की है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने उन लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया जहाँ से उस पर हमले की साजिश रची जा रही थी। जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब अब अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता, इसीलिए उसने सीधी कार्रवाई का विकल्प चुना। इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व के समीकरण अब पूरी तरह से बदल चुके हैं और पुराने गठबंधन नए रूप ले रहे हैं।

हमले से पहले दी गई थी चेतावनी और शुरू हुई कूटनीति दिलचस्प बात यह है कि इन हमलों के तुरंत बाद पर्दे के पीछे कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई थी। बताया जा रहा है कि खाड़ी देशों ने तेहरान को स्पष्ट शब्दों में संदेश भेज दिया था कि अगर उकसावे की कार्रवाई नहीं रुकी, तो हमले और भी भीषण होंगे। इसके बाद अमेरिकी मध्यस्थता और क्षेत्रीय दबाव के कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव को कम करने के लिए अनौपचारिक बातचीत का दौर भी शुरू हुआ। फिलहाल, इस ‘इनसाइड स्टोरी’ के बाहर आने के बाद ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वैश्विक पटल पर यह चर्चा का विषय बन गया है।

बदलते क्षेत्रीय समीकरण और ईरान की चुनौती ईरान के खिलाफ इन मुस्लिम देशों की सक्रियता यह दर्शाती है कि अब धर्म से ऊपर क्षेत्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित आ गए हैं। इजरायल के साथ इन देशों के बढ़ते अनौपचारिक संबंधों और ईरान के साथ पुरानी रंजिश ने खाड़ी क्षेत्र को एक नए युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इन हमलों का जवाब कूटनीति से देता है या फिर मध्य पूर्व की आग और भी भड़केगी।