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NHAI का नया फीचर: टोल प्लाजा पर हुई परेशानी तो सीधे सरकार तक पहुंचेगी बात, क्या फीडबैक सिस्टम से बदलेंगे हाईवे के हालात?

देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेसवे पर गाड़ी दौड़ाते समय जब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में फंसना पड़ता है, या फास्टैग होने के बावजूद स्कैनर काम न करने पर अतिरिक्त पैसे मांगे जाते हैं, तो हर मुसाफिर का सफर बेमजा हो जाता है। इसके अलावा टोल बूथ कर्मचारियों की अभद्रता, वॉशरूम में गंदगी और पीने के साफ पानी की अनुपलब्धता हाईवे यात्रियों के लिए सालों से सिरदर्द बनी हुई है। लेकिन अब टोल ऑपरेटरों की इस मनमानी और अव्यवस्था पर सीधी नकेल कसने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। एनएचएआई ने अपने आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन ‘राजमार्गयात्रा’ (Rajmargyatra) में एक अत्याधुनिक रियल-टाइम सिटीजन फीडबैक और ग्रीवेंस मॉड्यूल लॉन्च किया है।

इस नए फीचर का सबसे बड़ा उद्देश्य हाईवे उपयोगकर्ताओं को सीधी शक्ति (Empowerment) देना है। अब हाईवे पर चलने वाला कोई भी सामान्य चालक किसी भी टोल प्लाजा को पार करते ही अपने स्मार्टफोन से कुछ ही सेकंड में टोल की सेवाओं को स्टार रेटिंग दे सकेगा और अपनी शिकायत सीधे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा एनएचएआई मुख्यालय तक पहुंचा सकेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय का मानना है कि इस पारदर्शी डिजिटल तंत्र से टोल कंपनियों की जवाबदेही तय होगी और हाईवे पर मिलने वाली नागरिक सुविधाओं में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिलेगा।

भारत में फास्टैग (FASTag) लागू होने के बाद टोल कटने का समय काफी हद तक घटा जरूर है, लेकिन जमीनी स्तर पर यात्रियों की समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। अक्सर देखने में आता है कि पीक आवर्स या त्योहारी सीजन में टोल प्लाजा पर 100 मीटर से लंबी गाड़यों की लाइनें लग जाती हैं। एनएचएआई के स्पष्ट नियम हैं कि यदि 100 मीटर की पीली लाइन से पीछे तक कतार हो या किसी गाड़ी को टोल पार करने में 10 सेकंड से अधिक का समय लगे, तो उस वाहन को बिना टोल वसूले मुफ्त पास करने का नियम है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर टोलकर्मी इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं।

इसके अलावा फास्टैग वॉलेट से दो बार टोल कट जाना (Double Deduction), तकनीकी खराबी के चलते ब्लैकलिस्टेड बताकर दोगुना नकद वसूलना, एंबुलेंस या इमरजेंसी वाहनों को वीआईपी लेन से रास्ता न देना और हाईवे के सार्वजनिक शौचालयों में भारी गंदगी होना आम शिकायतें रही हैं। अब तक यात्रियों के पास केवल 1033 हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने का विकल्प था, जहां व्यस्तता या कॉल ड्रॉप के चलते शिकायत दर्ज कराने में समय लगता था। नया इन-ऐप फीडबैक फीचर इसी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और ऑटोमेटेड बना देता है।

एनएचएआई का यह नया फीचर जियो-फेंसिंग और जीपीएस तकनीक पर आधारित है। जैसे ही आपकी गाड़ी किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा के दायरे में पहुंचेगी या उसे पार करेगी, ऐप अपने आप उस विशिष्ट टोल बूथ की पहचान कर लेगा। यात्री इस प्रक्रिया के तहत अपनी बात दर्ज करा सकते हैं:

  1. राजमार्गयात्रा ऐप खोलें: अपने एंड्रॉइड या आईओएस स्मार्टफोन में एनएचएआई का आधिकारिक ‘Rajmargyatra App’ ओपन करें।

  2. टोल प्लाजा का स्वतः चयन: ऐप में ‘Toll Feedback & Facilities’ टैब पर टैप करें। जीपीएस लोकेशन के आधार पर जिस टोल को आपने अभी पार किया है, उसका नाम स्क्रीन पर अपने आप आ जाएगा (या आप सर्च बार में टोल का नाम खुद चुन सकते हैं)।

  3. रेटिंग और श्रेणी चुनें: उपयोगकर्ता को 1 से 5 स्टार रेटिंग देने का विकल्प मिलता है। इसके साथ ही समस्या का सटीक वर्ग चुनना होता है—जैसे लंबी वेटिंग लाइन, फास्टैग स्कैनर में खराबी, कर्मचारियों का दुर्व्यवहार, अमान्य ओवरचार्जिंग, या शौचालय व पेयजल सुविधाओं की बदहाली।

  4. फोटो/वीडियो और कमेंट जोड़ें: यात्री सीधे कैमरे से मौके की लाइव तस्वीर, छोटा वीडियो या टोल पर्ची का स्क्रीनशॉट अपलोड कर सकते हैं और अपनी बात संक्षेप में लिख सकते हैं।

  5. यूनिक टिकट नंबर: सबमिट करते ही यात्री को एक डिजिटल ट्रैकिंग आईडी मिल जाती है, जिसके जरिए वे देख सकते हैं कि उनकी शिकायत पर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी ने क्या संज्ञान लिया।

अक्सर सरकारी पोर्टल्स पर शिकायत दर्ज कराने के बाद यह शंका बनी रहती है कि क्या केवल फीडबैक देने से जमीनी हकीकत बदलेगी? इस बार एनएचएआई ने इस फीडबैक सिस्टम को सीधे टोल कंपनियों के अनुबंध और वित्तीय हितों से जोड़ दिया है।

एनएचएआई के नए नीतिगत ढांचे के तहत, देश के सभी टोल प्लाजा को उपयोगकर्ताओं से मिलने वाली रेटिंग के आधार पर एक ‘मासिक परफॉर्मेंस स्कोर’ (Monthly Key Performance Indicator – KPI) दिया जाएगा। यदि किसी टोल प्लाजा को लगातार खराब रेटिंग मिलती है और वहां बार-बार लंबी कतारों या गंदगी की शिकायतें दर्ज होती हैं, तो एनएचएआई उस टोल रियायतग्राही (Concessionaire/Contractor) पर भारी वित्तीय जुर्माना (Financial Penalty) लगाएगा। इसके अलावा, अनुबंध के कड़े नियमों के तहत यदि किसी एजेंसी की रेटिंग लगातार कई महीनों तक ‘पुअर’ बनी रहती है, तो उसका टोल कलेक्शन का ठेका समय से पहले रद्द कर उसे भविष्य के हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकेगा।

नए डिजिटल फीडबैक फीचर के साथ-साथ एनएचएआई ने अपनी 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन संख्या 1033 को भी इस सिस्टम के साथ पूरी तरह एकीकृत किया है। यदि किसी यात्री को टोल प्लाजा पर किसी सुरक्षा खतरे, हिंसा, मेडिकल इमरजेंसी या वाहन दुर्घटना का सामना करना पड़ता है, तो वह 1033 पर सीधे एसओएस (SOS) अलर्ट भेज सकता है।

कॉल दर्ज होते ही नजदीकी हाईवे पेट्रोलिंग वैन और टोल मैनेजर को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। इसके अलावा, फास्टैग के गलत डिडक्शन की शिकायतों के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और जारीकर्ता बैंकों के नोडल सिस्टम को भी ऐप के जरिए रियल-टाइम डिस्प्यूट रेजोल्यूशन से जोड़ा जा रहा है, ताकि अतिरिक्त कटा हुआ पैसा सीधे यात्री के बैंक खाते में रिफंड हो सके।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने के लिए हर नागरिक अपनी जेब से भारी टोल टैक्स चुकाता है। इस भुगतान के बदले सुगम, सुरक्षित, गड्ढा-मुक्त सड़क और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा पाना हर मुसाफिर का वैधानिक अधिकार है। टोल बूथ पर बदइंतजामी देखकर चुपचाप आगे बढ़ जाना या मन मारकर असुविधा झेलना अव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

एनएचएआई का यह नया फीडबैक फीचर नागरिकों के हाथ में एक सशक्त डिजिटल हथियार की तरह है। जब भी आप हाईवे पर निकलें, अपने फोन में राजमार्गयात्रा ऐप को सक्रिय रखें और टोल प्लाजा की अच्छी या बुरी व्यवस्था का निष्पक्ष फीडबैक जरूर दर्ज करें। जनता की यह सामूहिक डिजिटल आवाज ही हाईवे ऑपरेटरों की मनमानी पर लगाम लगाएगी और भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित व तनावमुक्त बनाएगी।