
देश के नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शनिवार को घोषणा की है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने गुजरात में देश का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (Multi-Lane Free Flow – MLFF) टोल सिस्टम सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस नई तकनीक के बाद अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारें और बैरियर के खुलने का इंतजार बीती बात हो जाएगी।
सूरत-भरूच हाईवे पर मिली पहली कामयाबी
इस आधुनिक सिस्टम को ट्रायल के तौर पर NH-48 के सूरत-भरूच सेक्शन पर स्थित चौर्यासी टोल प्लाजा पर लागू किया गया है। शुरुआत के पहले ही दिन इस सिस्टम ने अपनी सफलता साबित कर दी, जब लगभग 41,500 वाहन बिना किसी रुकावट के इस टोल पॉइंट से फर्राटा भरते हुए निकल गए। मंत्रालय को इस नई तकनीक का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, जो भविष्य में पूरे देश के हाईवे नेटवर्क की तस्वीर बदल देगा।
कैसे काम करता है MLFF और ANPR सिस्टम?
MLFF सिस्टम पारंपरिक टोल प्लाजा से बिल्कुल अलग है। इसमें सड़क पर कोई फिजिकल बैरियर या फाटक नहीं होता। यह मुख्य रूप से दो तकनीकों पर काम करता है:
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ANPR (Automatic Number Plate Recognition): हाईवे पर लगे हाई-टेक कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को चलते हुए ही स्कैन कर लेते हैं।
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FASTag इंटीग्रेशन: कैमरे द्वारा डेटा रीड करते ही वाहन के FASTag से टोल की राशि अपने आप कट जाती है।
इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप शून्य है, जिससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि टोल वसूली में पारदर्शिता भी आती है।
ईंधन की बचत और प्रदूषण से मिलेगी राहत
सरकार का मानना है कि इस सिस्टम के व्यापक इस्तेमाल से कई बड़े फायदे होंगे। सबसे बड़ा लाभ समय और ईंधन की बचत के रूप में मिलेगा, क्योंकि गाड़ियों को टोल पर इंजन चालू रखकर खड़ा नहीं होना पड़ेगा। इसके अलावा, ट्रैफिक जाम कम होने से वाहनों से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण को सीधा फायदा पहुँचेगा।
सावधान! बैलेंस कम हुआ तो लगेगा दोगुना जुर्माना
NHAI ने हाईवे उपयोगकर्ताओं के लिए एक जरूरी सलाह भी जारी की है। इस ‘फ्री फ्लो’ सिस्टम का लाभ उठाने के लिए आपके FASTag में पर्याप्त बैलेंस होना अनिवार्य है।
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यदि बैलेंस कम पाया जाता है या FASTag अमान्य होता है, तो वाहन मालिक को ई-नोटिस भेजा जाएगा।
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नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर भुगतान न करने पर दोगुना टोल शुल्क वसूला जा सकता है।
पारदर्शी और आधुनिक होगा सफर
MLFF सिस्टम की शुरुआत भारत को ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ के हाईवे नेटवर्क की ओर ले जा रही है। इससे न केवल टोल वसूली सस्ती और कुशल होगी, बल्कि यात्रियों को एक ऐसा अनुभव मिलेगा जहाँ वे बिना किसी मानसिक तनाव के लंबी दूरी का सफर तय कर सकेंगे। मंत्रालय की योजना है कि गुजरात में मिली सफलता के बाद इस सिस्टम को जल्द ही देश के अन्य व्यस्त नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर भी लागू किया जाए
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