
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम आश्रम की ख्याति आज पूरी दुनिया में फैल चुकी है। देश के प्रधानमंत्री से लेकर एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग जैसी वैश्विक हस्तियों ने जिस पावन भूमि पर सिर झुकाया, उस धाम के प्रति देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं में अटूट श्रद्धा है। कैंची धाम में प्रतिदिन उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अब बाबा नीम करोली महाराज के भक्तों के लिए उत्तर प्रदेश से भी एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या, काशी और मथुरा-वृंदावन के बाद अब पूज्य नीम करोली बाबा से जुड़े ऐतिहासिक व पावन स्थलों को भव्य स्वरूप देने की विशाल योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत बाबा की जन्मस्थली से लेकर उनकी तपोभूमि और समाधि स्थल तक के पूरे परिक्षेत्र का कायाकल्प किया जाएगा, जिससे यह पूरा मार्ग एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सर्किट के रूप में विकसित हो सके।
नीम करोली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले छोटे और शांत गांव अकबरपुर में एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वर्षों तक उपेक्षित रहे इस पावन गांव को अब आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। नई विकास योजना के अनुसार आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग से अकबरपुर गांव को जोड़ने वाले सभी पहुंच मार्गों को फोर लेन में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे दिल्ली, लखनऊ या आगरा से आने वाले श्रद्धालुओं को सफर में कोई असुविधा न हो।
गांव में प्रवेश के लिए एक भव्य और नक्काशीदार ‘नीम करोली बाबा स्मृति द्वार’ का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही मंदिर परिसर के आसपास आधुनिक दर्शन दीर्घा, विशाल सत्संग भवन, स्वच्छ पेयजल बूथ, वातानुकूलित प्रतीक्षालय और सैकड़ों वाहनों की क्षमता वाले व्यवस्थित पार्किंग स्थल का निर्माण कराया जाएगा। मंदिर के चारों तरफ हरियाली, आकर्षक लाइटें और श्रद्धालुओं के लिए ध्यान केंद्र बनाए जाएंगे ताकि यहां पहुंचने वाले हर भक्त को कैंची धाम जैसी ही आत्मिक शांति का अनुभव हो सके।
फिरोजाबाद की जन्मस्थली के साथ-साथ फर्रुखाबाद जिले का ‘नीब करौरी’ गांव भी इस महापरियोजना का एक अभिन्न हिस्सा है। यही वह पावन स्थान है जहां बाबा ने वर्षों तक भूमिगत रहकर गुप्त तपस्या की थी और इसी गांव के नाम पर बाद में उनका नाम ‘नीम करोली बाबा’ पड़ा था। रेलवे लाइन के किनारे स्थित इस तपोभूमि की ऐतिहासिक गुफा और हनुमान जी के प्राचीन मंदिर का संरक्षण कर उसे एक आध्यात्मिक धरोहर केंद्र का रूप दिया जा रहा है।
योजना के तहत फर्रुखाबाद और आसपास के रेलवे स्टेशनों जैसे कानपुर, इटावा और कासगंज से नीब करौरी तक आवागमन को सुगम बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों और शटल सेवाओं का संचालन शुरू करने का प्रस्ताव है। रेलवे प्रशासन के समन्वय से स्थानीय रेलवे स्टेशन के सुंदरीकरण और वहां तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष हॉल्ट व विश्रामालय विकसित करने की तैयारी चल रही है, ताकि ट्रेन से आने वाले बुजुर्ग और दूर-दराज के श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के बाबा की तपोस्थली के दर्शन कर सकें।
नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को कान्हा की पावन नगरी वृंदावन में अपनी भौतिक देह का त्याग किया था। वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर स्थित नीम करोली बाबा का समाधि स्थल और आश्रम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए असीम आस्था का केंद्र है। वर्तमान में वृंदावन आने वाला लगभग हर तीर्थयात्री बांके बिहारी मंदिर के साथ-साथ बाबा के समाधि स्थल पर नतमस्तक होना नहीं भूलता।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे मथुरा-वृंदावन पुनर्विकास मास्टर प्लान के तहत परिक्रमा मार्ग पर स्थित बाबा के आश्रम के आसपास के पूरे क्षेत्र का चौड़ीकरण और सुंदरीकरण किया जाएगा। समाधि स्थल के आसपास पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष पाथवे, सुरक्षा जांच चौकियां, अत्याधुनिक सीसीटीवी निगरानी प्रणाली और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सर्वसुविधायुक्त अतिथि गृहों के निर्माण की रूपरेखा बनाई गई है। इससे परिक्रमा के दौरान लगने वाले भारी जाम से भी मुक्ति मिलेगी और श्रद्धालु सहजता से समाधि के दर्शन कर सकेंगे।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाबा नीम करोली से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों—फिरोजाबाद (अकबरपुर), फर्रुखाबाद (नीब करौरी), लखनऊ (हनुमान सेतु मंदिर) और मथुरा (वृंदावन समाधि स्थल) को एक एकीकृत ‘बाबा नीम करोली आध्यात्मिक सर्किट’ के रूप में जोड़ना है।
इस कॉरिडोर के विकसित होने से न केवल उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर होटल, होमस्टे, हस्तशिल्प, परिवहन और खानपान से जुड़े स्थानीय युवाओं और व्यापारियों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। जिस तरह कैंची धाम के विकास ने उत्तराखंड के सुदूर पर्वतीय इलाके की आर्थिक सूरत बदल दी है, ठीक उसी तरह इस भव्य कॉरिडोर के निर्माण से उत्तर प्रदेश के इन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास देखने को मिलेगा।
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