Navratri: हाथी पर पधारीं मां दुर्गा, मुर्गे पर होगी विदाई; जानिए देश-दुनिया में उथल-पुथल और राजनीतिक संकट के क्या हैं बड़े संकेत

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि सनातन परंपरा में शक्ति उपासना का महापर्व मानी जाती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत आराधना की जाती है। हिंदू धर्मशास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यद्यपि जगतजननी मां जगदंबा का स्थाई वाहन सिंह (शेर) है, लेकिन नवरात्रि में पृथ्वी लोक पर उनके आगमन (आने) और प्रस्थान (वापसी) का वाहन अलग-अलग होता है, जो घटस्थापना और विजयादशमी के दिन पड़ने वाले वार (दिन) के आधार पर तय होता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ रविवार को होने के कारण मां दुर्गा का आगमन ‘गज’ यानी हाथी पर हुआ है, जबकि विजयादशमी का पर्व मंगलवार को पड़ने से देवी का गमन ‘मुर्गे’ (चरणायुध/कुक्कुट) पर होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से आगमन का वाहन जहां बेहद कल्याणकारी और शुभ माना गया है, वहीं विदाई का वाहन देश-दुनिया के लिए भारी उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक टकराव के गंभीर संकेत दे रहा है।

शास्त्रों में मां भगवती के आने और जाने के वाहनों के निर्धारण को लेकर स्पष्ट श्लोक वर्णित हैं:

आगमन विचार:

शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।

गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥

अर्थात यदि नवरात्रि का प्रारंभ रविवार या सोमवार को हो तो माता रानी हाथी पर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को घोड़े (तुरगंम), गुरुवार या शुक्रवार को डोली (पालकी) और बुधवार को नौका पर सवार होकर आती हैं।

प्रस्थान विचार:

शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।

शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला॥

बुध शुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।

सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥

अर्थात यदि विजयादशमी रविवार या सोमवार को हो तो देवी भैंसे पर जाती हैं। शनिवार या मंगलवार को विजयादशमी पड़ने पर मां दुर्गा की विदाई ‘चरणायुध’ यानी मुर्गे पर होती है। बुधवार या शुक्रवार को हाथी पर और गुरुवार को मनुष्य की सवारी (नरवाहन) पर प्रस्थान होता है।

रविवार को नवरात्रि का कलश स्थापित होने से मां दुर्गा का आगमन गजराज यानी हाथी पर हुआ। देवी भागवत में कहा गया है—’गजे च जलदा देवी’। हाथी को ज्ञान, शक्ति, स्थिरता और वैभव का प्रतीक माना जाता है।

  • कृषि और किसानों के लिए मंगलकारी: हाथी पर आगमन का सीधा अर्थ है कि आने वाले समय में अच्छी वर्षा के योग बनेंगे। भूमि में जलस्तर सुधरेगा, रबी फसलों की पैदावार बेहतरीन होगी और देश के अन्न भंडार भरे रहेंगे।

  • आर्थिक मजबूती: हाथी को धन की देवी मां लक्ष्मी का भी वाहन माना गया है। इससे व्यापार, उद्योग और जनसामान्य के जीवन में आर्थिक स्थिरता आने और महंगाई से राहत मिलने के संकेत मिलते हैं।

  • मानसिक शांति: गज पर आगमन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संतोष का संचार करता है।

विजयादशमी का पर्व मंगलवार को होने के कारण मां भगवती का प्रस्थान वाहन ‘चरणायुध’ (मुर्गा) बना है। मुर्गे को संस्कृत ग्रंथों में चरणायुध इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसके पैरों में कांटेनुमा हथियार जैसे नाखून होते हैं। ज्योतिष शास्त्र और मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) में मुर्गे पर देवी के गमन को शुभ नहीं माना जाता:

  • ‘करी विकला’ का अर्थ: श्लोक में स्पष्ट उल्लेख है कि मुर्गे पर विदाई से जनमानस ‘विकल’ यानी व्याकुल, परेशान और भयभीत होता है। यह वाहन समाज में कलह, हिंसा, वैचारिक कटुता और असंतोष का सूचक है।

  • राजनीतिक और कूटनीतिक संकट: मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, मुर्गे पर विदाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भीषण टकराव, सीमाओं पर तनाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में युद्ध जैसी स्थितियों को बढ़ावा देती है। शासकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • प्राकृतिक आपदाएं और रोग-शोक: यह वाहन असामान्य मौसमी बदलावों, भूकंप, आंधी-तूफान जैसी प्राकृतिक विभीषिकाओं और मौसमी महामारियों या संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका को दर्शाता है।

जब आगमन अत्यंत शुभ और विदाई कष्टकारी हो, तो इसका मिला-जुला फल यह होता है कि भौतिक सुख-सुविधाएं और पैदावार तो भरपूर रहेगी, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस नकारात्मक प्रभाव को शांत करने और देश-समाज में शांति बनाए रखने के लिए नवरात्रि के दौरान और विजयादशमी के दिन विशेष उपाय फलदायी होते हैं:

  1. दुर्गा सप्तशती का संपुटित पाठ: नवरात्रि की नवमी तिथि तक नियमित रूप से अर्गला, कीलक और कवच के साथ श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ या देवी के बत्तीस नामावली का जप करें।

  2. हवन और शांति अनुष्ठान: महानवमी और दशमी के दिन तिल, जौ, घी और गुग्गुल से माता को पूर्णाहूति समर्पित करें और राष्ट्र कल्याण व विश्व शांति की प्रार्थना करें।

  3. कन्या पूजन और जरूरतमंदों की सेवा: नवरात्रि में नौ कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें वस्त्र व फल दान करें। इसके साथ ही पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना अनिष्टकारी ग्रहों और अशुभ संकेतों के प्रभाव को शून्य कर देता है।

धार्मिक और ज्योतिषीय विधान लोक-मंगल और जन-चेतना को सचेत करने का माध्यम होते हैं। मां दुर्गा सदैव अपने अनन्य भक्तों के संकटों को हरने वाली हैं। श्रद्धा, सत्य और सेवा भाव से की गई आराधना हर प्रकार के अनिष्ट और उथल-पुथल को टालकर जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करती है।