
भारतीय रेल के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में रेलवे बोर्ड ने एक और बड़ा सुधारात्मक कदम उठाया है। रेल मंत्रालय के अंतर्गत रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, भारतीय रेल के सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों (Production Units), कार्यशालाओं, अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) तथा केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में पदस्थापित राजभाषा (हिंदी) संवर्ग के अधिकारियों की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (Annual Performance Appraisal Report – APAR) अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा विकसित ‘स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो’ यानी स्पैरो (SPARROW – Smart Performance Appraisal Report Recording Online Window) पोर्टल के माध्यम से ही अब राजभाषा संवर्ग के अधिकारियों का स्व-मूल्यांकन (Self-Appraisal), रिपोर्टिंग (Reporting) और रिव्यूइंग (Reviewing) की प्रक्रिया संपन्न होगी। इसके साथ ही दशकों से चली आ रही पारंपरिक भौतिक फाइलों (Physical Paper APAR) के जरिए होने वाले मूल्यांकन को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
रेलवे बोर्ड द्वारा सभी जोनल महाप्रबंधकों (General Managers) और कार्मिक व राजभाषा विभागाध्यक्षों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय की गई है:
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भौतिक प्रतियां अब पूरी तरह अमान्य: निर्धारित मूल्यांकन वर्ष से किसी भी राजभाषा अधिकारी—जिनमें सहायक निदेशक (राजभाषा), उप निदेशक (राजभाषा), वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी और मुख्य राजभाषा अधिकारी शामिल हैं—की कोई भी गोपनीय रिपोर्ट कागजी प्रारूप में स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि कोई रिपोर्ट ऑफलाइन भेजी जाती है, तो उसे विनियामक रूप से अमान्य माना जाएगा।
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टाइम-बाउंड वर्कफ्लो (समयसीमा की सख्त पाबंदी): स्पैरो पोर्टल पर स्वतः सृजित होने वाली समयसीमा (Time-Bound Generation) लागू रहेगी। निर्धारित अंतिम तिथि समाप्त होते ही स्व-मूल्यांकन की विंडो स्वतः बंद हो जाएगी और यदि रिपोर्टिंग या रिव्यूइंग अधिकारी ने तय समय में अंकन नहीं किया, तो सिस्टम स्वतः ‘नो रिमार्क्स’ के साथ फाइल को अगले स्तर पर प्रेषित कर देगा।
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डिजिटल हस्ताक्षर (DSC/e-Sign) अनिवार्य: मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनधिकृत प्रविष्टि या हेरफेर को रोकने के लिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) या आधार-आधारित ई-साइन (Aadhaar e-Sign) के माध्यम से ही अनुमोदन मान्य होगा।
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पारदर्शिता और त्वरित अपील अधिकार: जैसे ही रिव्यूइंग अधिकारी द्वारा मूल्यांकन पूरा कर रिपोर्ट स्वीकृत की जाएगी, अधिकारी के व्यक्तिगत स्पैरो लॉगिन डैशबोर्ड पर उसकी पूरी रिपोर्ट और अंतिम ग्रेडिंग तुरंत प्रदर्शित हो जाएगी। किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी (Adverse Remarks) या कम ग्रेडिंग की स्थिति में अधिकारी तय 15 दिनों के भीतर डिजिटल पोर्टल पर ही अपना अभ्यावेदन (Representation) दर्ज करा सकेंगे।
भारतीय रेलवे में भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS), भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (IRPS), भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) और विभिन्न इंजीनियरिंग संवर्गों के ग्रुप-ए अधिकारियों के लिए स्पैरो प्रणाली पहले से सफलतापूर्वक क्रियान्वित की जा रही थी। हालांकि, राजभाषा संवर्ग के कई अधिकारी जोनल स्तर पर और अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में संलग्न होने के कारण अक्सर कागजी मूल्यांकन प्रणाली पर ही निर्भर थे।
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पदोन्नति में देरी पर लगाम: मैनुअल व्यवस्था में सबसे बड़ी खामी यह थी कि अधिकारियों की पदोन्नति (Promotion), वरिष्ठ वेतनमान (Senior Scale), चयन ग्रेड (Selection Grade) या विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकों के समय पुरानी वर्षों की एसीआर/अपार फाइलें गुम हो जाने या अपूर्ण रहने के कारण अधिकारियों के करियर प्रमोशन महीनों और सालों तक लटके रहते थे।
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सटीक रिकॉर्ड कीपिंग: केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से रेल मंत्रालय के पास सभी राजभाषा अधिकारियों की समग्र कार्यक्षमता, हिंदी के प्रगामी प्रयोग के वार्षिक लक्ष्यों की प्राप्ति और उनकी शैक्षणिक व प्रशासनिक योग्यताओं का पारदर्शी और सुरक्षित रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध रहेगा।
केंद्र सरकार के राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) के वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक मंत्रालय और विभाग को अनिवार्य लक्ष्य दिए जाते हैं। रेलवे बोर्ड के इस डिजिटल सुधार से न केवल राजभाषा अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार होगा:
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निष्पक्ष मूल्यांकन: ऑनलाइन व्यवस्था होने से मूल्यांकन में व्यक्तिपरक पूर्वाग्रहों की संभावना कम होगी और अधिकारियों द्वारा वर्ष भर किए गए वास्तविक कार्यों—जैसे हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन, कोड व मैनुअल का अनुवाद, राजभाषा कार्यान्वयन समिति (OLIC) की नियमित बैठकें और कम्प्यूटरीकरण में हिंदी का उपयोग—का सही और समयबद्ध आकलन हो सकेगा।
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कागजरहित और पर्यावरण-अनुकूल कार्यशैली: रेलवे के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘ग्रीन रेलवे’ मिशन के अनुरूप हजारों पृष्ठों के कागजी रिकॉर्ड, फाइलों की ढुलाई और उनके भौतिक संरक्षण पर होने वाला खर्च शून्य हो जाएगा।
रेलवे बोर्ड ने सभी संबंधित क्षेत्रीय रेलों के मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों (प्रशासन) और आईटी सेल को निर्देश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से शेष बचे सभी राजभाषा अधिकारियों के प्रोफाइल स्पैरो प्रणाली पर मैप करें और उन्हें यूजर आईडी व डिजिटल क्रेडेंशियल्स आवंटित कर आगामी मूल्यांकन चक्र को शत-प्रतिशत त्रुटिरहित और ऑनलाइन संचालित करना सुनिश्चित करें।
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