
भोपाल/लखनऊ। उत्तराखंड के बाद अब देश के एक और बड़े राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। मनीकंट्रोल हिंदी (Moneycontrol Hindi) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश कैबिनेट (Madhya Pradesh Cabinet) ने राज्य में यूसीसी के अंतिम मसौदे को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय कैबिनेट बैठक में लिया गया यह फैसला राज्य की सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में एक युगांतरकारी बदलाव लाने वाला है। यूसीसी के इस नए कानून में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और विवाह प्रणालियों में एकरूपता लाने के लिए कई बेहद कड़े और ऐतिहासिक प्रावधान किए गए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship Rules) को लेकर बनाए गए सख्त नियमों की हो रही है।
शादीशुदा पुरुष अगर रहे लिव-इन में, तो मिलेगी कठोर जेल की सजा
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को नियमित करने और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए देश के सबसे सख्त कानून जोड़े गए हैं:
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शादीशुदा पुरुषों पर शिकंजा: नए कानून के प्रावधानों के मुताबिक, यदि कोई पहले से विवाहित (Married) पुरुष अपनी पत्नी को बिना कानूनी तलाक दिए किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो इसे एक गंभीर और संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) माना जाएगा।
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सीधे जेल का प्रावधान: ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पुरुष को सीधे जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। यह कदम पहली पत्नी के अधिकारों की रक्षा और परिवार को टूटने से बचाने के लिए उठाया गया है।
लिव-इन का रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्य, छिपाया सच तो भुगतना होगा अंजाम
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए मसौदे में लिव-इन में रहने वाले हर जोड़े के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं:
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अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Registration): राज्य में रहने वाले किसी भी लिव-इन पार्टनर को अब जिला प्रशासन के पास अपने संबंध का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
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गलत जानकारी देने पर जुर्माना: यदि कोई जोड़ा पंजीकरण के समय अपनी वैवाहिक स्थिति, उम्र या पहचान के बारे में गलत जानकारी देता है, या बिना रजिस्ट्रेशन के गुपचुप तरीके से साथ रहता है, तो उन्हें भारी आर्थिक जुर्माने के साथ कारावास की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।
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युवाओं की सुरक्षा: इस नियम का मुख्य उद्देश्य लिव-इन रिलेशनशिप में होने वाली धोखाधड़ी, घरेलू हिंसा और अपराधों पर लगाम लगाना है।
बहुविवाह पर पूर्ण रोक और पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबर हक
लिव-इन के अलावा, मध्य प्रदेश का यह यूसीसी बिल राज्य के सभी नागरिकों पर बिना किसी धर्म या जाति के भेदभाव के समान रूप से लागू होगा:
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बहुविवाह (Polygamy) का खात्मा: कानून लागू होने के बाद राज्य में किसी भी नागरिक को पहली पत्नी/पति के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। सभी धर्मों के लिए एक विवाह का नियम अनिवार्य होगा।
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लड़कियों को समान अधिकार: पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के बिल्कुल बराबर कानूनी अधिकार मिलेंगे। साथ ही, गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया और उत्तराधिकार के नियम भी सभी समुदायों के लिए एक समान कर दिए जाएंगे।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस ऐतिहासिक विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जाएगा, जहां इसे कानून के रूप में पारित कराया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी यूसीसी लागू करने का एक नया मॉडल तैयार करेगा।
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