
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पारंपरिक बुनकरी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राजधानी लखनऊ में आयोजित यूपी टेक्स-2026 कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी GI टैग मिल चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पारंपरिक वस्त्र और हस्तशिल्प अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
कृषि के बाद रोजगार देने वाला बड़ा सेक्टर है टेक्सटाइल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। कृषि के बाद यह देश में सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2030 तक भारत की टेक्सटाइल इकोनॉमी को 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में उत्तर प्रदेश की भूमिका बेहद अहम होगी।
योगी ने कहा कि प्रदेश के पास टेक्सटाइल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विरासत, हुनर, विशाल बाजार और बड़ी युवा कार्यशक्ति जैसी मजबूत ताकत मौजूद है। सरकार का प्रयास है कि इन संसाधनों को आधुनिक तकनीक और निवेश के साथ जोड़कर उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित किया जाए।
17 उत्पादों को GI टैग मिलने से बढ़ी उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को GI टैग हासिल हो चुका है। इससे प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को औपचारिक मान्यता मिली है। सरकार का जोर इन उत्पादों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने पर है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन पारंपरिक उत्पादों से बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में टेक्सटाइल क्षेत्र को बढ़ावा देने का सीधा असर रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
पांच लाख बुनकरों को बताया टेक्सटाइल सेक्टर का ‘रियल हीरो’
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के करीब पांच लाख बुनकरों को इस क्षेत्र की असली ताकत बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बुनकर सदियों पुरानी कला और तकनीक को आगे बढ़ा रहे हैं। बनारस, कानपुर, सीतापुर और मेरठ जैसे शहरों में टेक्सटाइल क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है।
उन्होंने बताया कि देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत है। सरकार अब इस क्षमता को आधुनिक टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ने पर जोर दे रही है।
फाइबर से ग्लोबल मार्केट तक तैयार होगी पूरी वैल्यू चेन
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की जरूरत है। इसका मतलब कच्चे फाइबर से लेकर उत्पादन, प्रोसेसिंग, तैयार उत्पाद, ब्रांडिंग और उसके बाद वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने की पूरी व्यवस्था उत्तर प्रदेश में तैयार करना है।
सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को बेहतर सुविधाएं, मजबूत लॉजिस्टिक्स, कुशल मानव संसाधन और आधुनिक औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराया जाए। इससे टेक्सटाइल उद्योग में नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
यूपी टेक्स-2026 में उद्योग जगत ने भी रखे सुझाव
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय यूपी टेक्स-2026 कॉन्क्लेव का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने के लिए निवेश और उद्योगों को आकर्षित करना है। सम्मेलन में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और उद्यमियों ने भी हिस्सा लिया।
उद्योग जगत की ओर से प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षित श्रमिक, सस्ती बिजली-पानी और आसान कारोबारी व्यवस्था को टेक्सटाइल सेक्टर के विस्तार के लिए जरूरी बताया गया। विशेषज्ञों ने बदलती तकनीक के दौर में कुशल मैनपावर तैयार करने पर भी जोर दिया।
करीब 3.69 अरब डॉलर का टेक्सटाइल निर्यात
कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उद्योग प्रतिनिधियों के मुताबिक प्रदेश वर्तमान में करीब 3.69 अरब डॉलर का टेक्सटाइल निर्यात करता है, जो राज्य के कुल निर्यात का लगभग 10 प्रतिशत है।
उद्योग जगत का मानना है कि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ओमान और यूरोपीय बाजारों के साथ व्यापारिक अवसरों का फायदा उठाकर उत्तर प्रदेश अपने टेक्सटाइल निर्यात को और आगे ले जा सकता है। इसके लिए प्रोसेसिंग सुविधाओं को मजबूत करना और उत्पादन क्षमता का विस्तार करना महत्वपूर्ण होगा।
सरकार का फोकस निवेश और रोजगार बढ़ाने पर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार के लिए नीतिगत स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं और निवेशकों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि प्रदेश में उत्पादन और रोजगार की पूरी श्रृंखला तैयार करना है। GI टैग वाले पारंपरिक उत्पादों को ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार से जोड़कर स्थानीय कारीगरों और बुनकरों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
यूपी टेक्स-2026 के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश अपनी पारंपरिक टेक्सटाइल विरासत को आधुनिक उद्योग और वैश्विक बाजार के साथ जोड़कर रोजगार, निर्यात और निवेश के नए अवसर पैदा करना चाहता है। 17 टेक्सटाइल उत्पादों को GI टैग मिलना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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