
विदेश यात्रा की योजना बना रहे परिवारों और नन्हे-मुन्ने बच्चों के माता-पिता के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा आधिकारिक अपडेट जारी किया गया है। यदि आप अपने 15 साल से कम उम्र के बच्चे का नया पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं या पुराने पासपोर्ट को री-इश्यू कराने की तैयारी में हैं, तो पुराने ढर्रे और पुराने नियमों के भरोसे रहना भारी पड़ सकता है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट नियम, 1980 में बड़ा संशोधन करते हुए ‘पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026’ (Passports Amendment Rules, 2026) को आधिकारिक गजट में अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। केंद्र सरकार के मुख्य पासपोर्ट अधिकारी और संयुक्त सचिव द्वारा हस्ताक्षरित इस नई अधिसूचना के तहत 15 वर्ष से कम आयु वाले नाबालिगों (Minors) के पासपोर्ट की वैधता, नवीनीकरण की शर्तें और आवेदन शुल्क संरचना में दूरगामी बदलाव कर दिए गए हैं। दिल्ली, लखनऊ, पटना, मुंबई, चंडीगढ़, कोलकाता, जयपुर और बेंगलुरु जैसे तमाम शहरों के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों (RPO) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों (POPSK) पर यह नई गाइडलाइन तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है।
संशोधित नियमों के तहत सबसे बुनियादी बदलाव नियम 12 के उप-नियम (1A) में किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार, 15 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को जारी किया जाने वाला 36 पन्नों का सामान्य भारतीय पासपोर्ट जारी होने की तारीख से अधिकतम 5 वर्ष की अवधि के लिए अथवा बच्चे के 18 वर्ष की आयु पूरी करने तक ही वैध माना जाएगा, इनमें से जो भी पहले हो। इसे व्यावहारिक उदाहरण से समझना बेहद आसान है: यदि किसी 10 वर्ष के बच्चे का पासपोर्ट जारी होता है, तो वह पूरे 5 साल यानी बच्चे के 15 साल का होने तक कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य रहेगा। किंतु यदि किसी बच्चे का पासपोर्ट 14 या 14.5 वर्ष की उम्र में जारी कराया जाता है, तो वह पूरे 5 साल तक नहीं चलेगा, बल्कि जैसे ही बच्चा 18 वर्ष का होकर बालिग (Adult) की श्रेणी में पहुंचेगा, उस पासपोर्ट की वैधता उसी क्षण स्वतः समाप्त हो जाएगी। 18 वर्ष की आयु पूर्ण होते ही उस व्यक्ति को बालिग नागरिक के रूप में नए सिरे से सामान्य वयस्क पासपोर्ट के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। इस नियम का सीधा मकसद बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ उनके चेहरे के बदलते नैन-नक्श, बायोमेट्रिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय इमिग्रेशन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह चाक-चौबंद बनाए रखना है।
वैधता के साथ-साथ विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट नियम के नियम 8(1) के अंतर्गत आवेदन शुल्क की नई दरें भी अधिसूचित कर दी हैं, जो अब संशोधित अनुसूची-IV के अनुसार ली जा रही हैं। अब बच्चों के लिए भी पासपोर्ट बनवाना पहले की तुलना में अधिक खर्चीला हो गया है। नए संशोधित शुल्क ढांचे के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग बच्चों के लिए 36 पन्नों वाले नए फ्रेश पासपोर्ट अथवा पुराने पासपोर्ट के री-इश्यू (सामान्य श्रेणी) के आवेदन का सरकारी शुल्क ₹1,000 से बढ़ाकर अब ₹1,750 कर दिया गया है। वहीं यदि किसी आपात स्थिति, स्कूल ट्रिप, खेल प्रतियोगिता या अचानक बनी पारिवारिक यात्रा के चलते किसी बच्चे का पासपोर्ट ‘तत्काल’ (Tatkal) श्रेणी में बनवाना पड़ता है, तो उसके लिए अभिभावकों को अब ₹3,000 की जगह ₹4,250 का शुल्क अदा करना होगा। हालांकि सरकार ने छोटे बच्चों के परिवारों को राहत देते हुए यह स्पष्ट किया है कि 8 वर्ष से कम आयु के नन्हे बच्चों के ‘फ्रेश’ यानी पहली बार बनने वाले नए पासपोर्ट आवेदन पर 10 प्रतिशत की निर्धारित छूट पूर्ववत जारी रहेगी। अभिभावकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि यह 10 प्रतिशत की रियायत केवल पहली बार नए आवेदन पर मिलेगी, पुराने पासपोर्ट के री-इश्यू अथवा रिन्यूअल के मामलों में यह छूट लागू नहीं होगी।
अक्सर अभिभावक यह सवाल पूछते हैं कि आखिर वयस्कों को जहां 10 वर्ष की पूर्ण वैधता वाला पासपोर्ट दिया जाता है, वहीं नाबालिगों के लिए यह सीमा अधिकतम 5 वर्ष तक ही सीमित क्यों रखी गई है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के वैश्विक दिशा-निर्देशों के अनुसार बचपन से किशोरावस्था के दौरान बच्चों के शारीरिक विकास में सबसे तीव्र गति से परिवर्तन आता है। एक 5 साल के बच्चे की शक्ल 10 या 12 साल की उम्र तक आते-आते पूरी तरह बदल जाती है। इसके अलावा 5 साल से कम उम्र के बच्चों के फिंगरप्रिंट्स और आईरिस स्कैन पासपोर्ट सेवा केंद्र में कैप्चर नहीं किए जाते, केवल उनकी सफेद बैकग्राउंड वाली पासपोर्ट साइज फोटो ही स्वीकार की जाती है। जब बच्चा बड़ा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-गेट और फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) पुराने फोटो से मौजूदा चेहरे का मिलान नहीं कर पाते। यदि पासपोर्ट में मौजूद फोटो और बच्चे के वर्तमान चेहरे में भारी अंतर दिखता है, तो विदेशी इमिग्रेशन काउंटर पर पूछताछ, संदेह और कई बार बोर्डिंग से रोके जाने जैसी गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी वैश्विक जोखिम से भारतीय परिवारों को बचाने के लिए यह सख्त नियम लागू किया गया है।
कई बार माता-पिता अपने बच्चों के पासपोर्ट की अंतिम एक्सपायरी डेट को लेकर गंभीर लापरवाही बरतते हैं, जिसके चलते पूरी अंतरराष्ट्रीय यात्रा रद्द होने की नौबत आ जाती है। दुनिया के अधिकांश प्रमुख देशों—जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), यूरोपीय शेंगेन देश, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और कनाडा—का यह सख्त अंतरराष्ट्रीय इमिग्रेशन नियम है कि आपकी यात्रा की तारीख पर यात्री के पासपोर्ट की न्यूनतम वैधता कम से कम 6 महीने शेष होनी चाहिए। यदि आपके 15 साल से कम उम्र के बच्चे का पासपोर्ट तकनीकी रूप से 4 या 5 महीने बाद एक्सपायर हो रहा है, तो कोई भी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन आपको भारत के हवाई अड्डे से उड़ान भरने के लिए बोर्डिंग पास जारी नहीं करेगी। नए 5 वर्षीय नियम के लागू होने के बाद अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चे के पासपोर्ट की एक्सपायरी से कम से कम 9 से 10 महीने पहले ही री-इश्यू का आवेदन पासपोर्ट सेवा केंद्र में जमा कर दें, ताकि एनवक्त पर तत्काल कोटे की ऊंची फीस और मानसिक तनाव से पूरी तरह बचा जा सके।
नए नियमों के तहत पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) या पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) में नाबालिग का आवेदन जमा करते समय माता-पिता को दस्तावेजों का सही सेट साथ ले जाना अनिवार्य है। बच्चे का नगर निगम या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate), माता-पिता दोनों के मूल पासपोर्ट और उनकी स्वप्रमाणित फोटोकॉपी, माता-पिता के आधार कार्ड और पते का प्रमाण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होता है। यदि माता-पिता में से किसी एक के पास भी वैध पासपोर्ट उपलब्ध है, जिसमें जीवनसाथी का नाम दर्ज है, तो बच्चे के मामले में पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को बहुत त्वरित और सरल बना दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, यदि माता-पिता में से कोई एक विदेश में कार्यरत है या एकल अभिभावक (सिंगल पैरेंट/तलाकशुदा) का मामला है, तो संबंधित एनेक्सचर (जैसे Annexure C या D) पर विधिवत घोषणा पत्र देना आवश्यक होता है। पासपोर्ट सेवा केंद्र में बच्चे की शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य होती है, जहां लाइव कैमरा से उसका नया फोटो लिया जाता है और दस्तावेजों की गहन जांच की जाती है।
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