Lucknow Eco Garden Protest: लखनऊ में छात्रों के गुस्से के आगे झुके अभिजीत दीपके, बिना भाषण दिए उल्टे पैर भागने को हुए मजबूर!

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वीआईपी धरना स्थल ईको गार्डन में शुक्रवार को उस समय भारी हंगामा और सियासी ड्रामा देखने को मिला, जब छात्रों के बीच पहुंचे एक बड़े नेता को युवाओं के जबरदस्त गुस्से का सामना करना पड़ा। पिछले सप्ताह ही देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके को लखनऊ में करारा झटका लगा है। ईको गार्डन में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के रिजल्ट और घोटालों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों के भारी विरोध और तीखी नारेबाजी के बीच दीपके को बिना अपना भाषण पूरा किए ही बैरंग वापस लौटना पड़ा।

विभिन्न शिक्षक भर्तियों और हाल के दिनों में रद हुई कई सरकारी परीक्षाओं को लेकर महीनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच जैसे ही अभिजीत दीपके पहुंचे, वैसे ही माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। अभ्यर्थियों ने उन पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने और अपनी सियासी रोटियां सेंकने का सीधा आरोप लगाया। देखते ही देखते धरना स्थल पर हंगामा और विरोध इस कदर बढ़ गया कि अभिजीत दीपके को अपना संबोधन बीच में ही अधूरा छोड़कर वहां से रफूचक्कर होना पड़ा।

संविधान की किताब लेकर पहुंचे थे नेताजी, 5000 छात्रों ने कर दिया खेल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को लखनऊ के ईको गार्डन में उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों से आए हजारों अभ्यर्थी विभिन्न सरकारी भर्तियों के अटके होने और परीक्षाओं के निरस्त होने के खिलाफ एक विशाल महाधरने के लिए जुटे थे। सुबह 10 बजे से शुरू हुए इस प्रदर्शन में देखते ही देखते पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों की भारी भीड़ जमा हो गई। दोपहर करीब डेढ़ बजे कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके अपने हाथ में संविधान की पुस्तक लेकर छात्रों के इस मंच पर पहुंचे। लेकिन उनके कदम रखते ही छात्रों ने उनके खिलाफ ही मोर्चेबंदी शुरू कर दी।

भारी विरोध और तीखी नारेबाजी के बीच दीपके ने बिना किसी माइक और मंच के ही चिल्लाते हुए अपनी बात रखनी शुरू की। दीपके ने चिल्लाते हुए कहा, ‘अगर इस देश में इतिहास में बड़े आंदोलन नहीं हुए होते, तो आज हमें आजादी भी नहीं मिली होती। इमरजेंसी के दौर में अगर तानाशाही के खिलाफ आंदोलन न होता, तो आज देश में लोकतंत्र भी जिंदा न बचता। हक के लिए लड़ना और आंदोलन करना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है। चाहे लेखपाल भर्ती हो, यूपीएसआई (UPSI) हो, नीट (NEET) हो या फिर सीबीएसई, सभी परीक्षाओं के पेपर लीक करने वाले मुख्य दोषियों और मंत्रियों को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना होगा।’

“15 दिन पहले हमने बनाई रणनीति, इन्हें पता तक नहीं…” छात्रों ने खोला मोर्चा

अभिजीत दीपके अभी अपनी बात कह ही रहे थे कि वहां मौजूद छात्र भड़क उठे और ‘पेपर लीक बंद करो’ और ‘यूपीएसआई स्कोर कार्ड तुरंत जारी करो’ जैसे गगनभेदी नारे लगाने लगे। इस दौरान प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता नितिन, आनंद और अविरल तनेजा सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों ने कॉकरोच जनता पार्टी और अभिजीत दीपके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्रों ने दोटूक शब्दों में कहा, ‘हमारे इस पूरी तरह निष्पक्ष और छात्र हितों के आंदोलन का कॉकरोच जनता पार्टी या किसी भी अन्य राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। दीपके यहां छात्रों की मदद करने नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ अपनी गंदी राजनीति चमकाने आए हैं।’

नाराज अभ्यर्थियों का साफ कहना था कि लखनऊ के इस आंदोलन की पूरी रूपरेखा और रणनीति उन्होंने आज से ठीक 15 दिन पहले खुद मिलकर तैयार की थी, जबकि दिल्ली से आए दीपके को इस आंदोलन की जमीनी हकीकत के बारे में पता तक नहीं है। वे केवल कैमरे के सामने राजनीति करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने के लिए छात्रों के मंच का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। जब छात्रों का विरोध हद से ज्यादा तेज हो गया और उनके खिलाफ नारेबाजी होने लगी, तो दीपके ने माहौल भांपते हुए अभ्यर्थियों को आगामी 20 जून को दिल्ली आने का न्योता दिया और तुरंत ईको गार्डन से बाहर निकल गए। छात्रों के इस रुख ने साफ कर दिया है कि वे अपनी लड़ाई में किसी भी नेता को सियासी फायदा नहीं उठाने देंगे।