
हिंदू धर्मग्रंथों में अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) को अध्यात्म और पुण्य कमाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वैसे तो यह पूरा महीना ही पवित्र होता है, लेकिन इसके अंतिम दिन यानी एकादशी तिथि से लेकर पूर्णिमा तिथि तक का समय सबसे ज्यादा लाभकारी और चमत्कारी माना गया है।
इस अवधि में भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना, माता लक्ष्मी की सेवा और तुलसी पूजन करने से न सिर्फ जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं, बल्कि कुंडली के कमजोर या अशुभ चल रहे ग्रहों को भी शांत और सही किया जा सकता है। आइए जानते हैं अधिकमास के इन खास दिनों का पूरा कैलेंडर, मुहूर्त और किए जाने वाले अचूक उपाय:
1. अधिकमास की कमला एकादशी (मां लक्ष्मी की कृपा का दिन)
अधिकमास की एकादशी को ‘पुरुषोत्तम कमला एकादशी’ या ‘पद्मिनी एकादशी’ कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और कथा सुनने से साक्षात माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
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तिथि विशेष: इस विशेष दिन ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि प्रातः 06:22 बजे तक रहेगी और उसके बाद द्वादशी तिथि लग जाएगी।
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विशेष सावधानी (भद्रा): इस दिन प्रातः 06:22 बजे तक भद्रा का साया रहेगा, इसलिए भद्रा समाप्ति के बाद ही मांगलिक या विशेष संकल्प वाले कार्य करें।
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उपाय: इस दिन भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं और माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल या कमल का फूल अर्पित करें।
2. अधिकमास प्रदोष व्रत: शिव-विष्णु की संयुक्त कृपा और ग्रह शांति
यूं तो अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों एक ही परम तत्व हैं। जब द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का संयोग होता है, तब प्रदोष व्रत रखा जाता है। अधिकमास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत और शिवरात्रि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
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तारीख और मुहूर्त (28 मई, गुरुवार): अधिकमास ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि प्रातः 07:58 बजे तक रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन प्रदोष व्रत का मुख्य संयोग बन रहा है। इसके अगले दिन यानी त्रयोदशी तिथि प्रातः 09:51 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी लग जाएगी।
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ग्रह दोषों से मुक्ति (शनि-राहु उपाय): यदि आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या राहु-केतु का कोई दोष (जैसे कालसर्प दोष) है, तो इस प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक अवश्य करें। इससे कुंडली के सभी उग्र और क्रूर ग्रह शांत होते हैं।
3. अधिकमास की पूर्णिमा: सत्यनारायण कथा और स्नान-दान का महायोग
अधिकमास की पूर्णिमा पर भगवान श्रीहरि और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, दीपदान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं। इस बार पूर्णिमा का संयोग दो दिनों (शनिवार और रविवार) तक रहेगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है:
व्रत और स्नान-दान की पूर्णिमा का पूरा शेड्यूल
| तिथि और दिन (Date & Day) | तिथि का समय और नक्षत्र | कौन सा व्रत/कार्य करें? |
| 30 मई (शनिवार) |
ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी तिथि प्रातः 11:58 बजे तक रहेगी, उसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी।
(भद्रा: प्रातः 11:58 से रात 01:06 बजे तक) |
श्री सत्यनारायण व्रत (व्रत की पूर्णिमा): इस दिन व्रत रखना और शाम को भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना अत्यंत शुभ रहेगा। |
| 31 मई (रविवार) |
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि दोपहर 02:15 बजे तक रहेगी, उसके बाद प्रतिपदा तिथि लग जाएगी।
(गंडमूल नक्षत्र: सायं 04:12 बजे से) |
स्नान-दान की पूर्णिमा (ज्येष्ठी पूर्णिमा): पवित्र नदियों (गंगा, यमुना आदि) में स्नान, दान, पितृ तर्पण और दीपदान के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है। |
अधिकमास के अंतिम दिनों में क्या करें? (सफलता के अचूक उपाय)
1.तुलसी जी की विशेष सेवा:उपाय 1.
इन अंतिम पांच दिनों में रोज शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।
2.सत्यनारायण कथा और महाप्रसाद:उपाय 2.
30 मई (शनिवार) को अपने घर में भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन करें। पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाकर अधिक से अधिक लोगों में वितरित करें। इससे पारिवारिक कलह दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है।
3.नदी स्नान और पितृ तर्पण:उपाय 3.
31 मई (रविवार) को सूर्योदय के समय किसी पवित्र नदी में स्नान करें (या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं)। इसके बाद तांबे के लोटे में काले तिल और जल भरकर पितरों को अर्घ्य दें (तर्पण करें) और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अनाज व वस्त्र का दान करें।
4.दीपदान (Deepdan) महात्म्य:उपाय 4.
पूर्णिमा की शाम को किसी मंदिर, नदी के किनारे, पीपल के पेड़ के नीचे या घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं (दीपदान करें)। पुरुषोत्तम मास में दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
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