‘ कर्नाटक HC के जज की अपराधियों पर सबसे तीखी टिप्पणी, दुष्कर्म के आरोपी छात्र को जमानत देने से साफ इनकार

India News Live, Digital Desk : देश में लगातार बढ़ रहे महिलाओं के खिलाफ अपराधों और अपराधियों के बेखौफ हौसलों को लेकर न्यायपालिका का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक दुष्कर्म के मामले की सुनवाई के दौरान कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली को लेकर अब तक की सबसे सख्त और हैरान करने वाली मौखिक टिप्पणी की है। कोर्ट ने अपराधियों में कानून का डर न होने पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में कानून के दांत पूरी तरह से टूट चुके हैं क्योंकि गुनहगारों से कड़ाई से नहीं निपटा जा रहा है। जस्टिस आर. नटराज ने सुनवाई के दौरान यहाँ तक कह दिया कि अगर अपराध करने वालों के हाथ-पैर काट दिए जाएं, तो शायद समाज में लोग कानून का पालन करना और उसका सम्मान करना सीख जाएंगे। कोर्ट ने इस कड़े रुख के साथ ही अपनी सहपाठी से यौन उत्पीड़न करने के आरोपी 23 वर्षीय एक इंजीनियरिंग छात्र की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।

क्योंकि हमारा देश एक लोकतंत्र है, इसलिए हर कोई उठाता है इसका नाजायज फायदा

जस्टिस आर. नटराज की सिंगल बेंच इस गंभीर मामले की सुनवाई कर रही थी। जमानत याचिका पर तीखी बहस के दौरान जज ने समाज और न्यायिक प्रणाली की मौजूदा स्थिति पर उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि आज के समय में अपराध बहुत ही लापरवाही और बेखौफ अंदाज में किए जा रहे हैं क्योंकि अपराधियों के मन में सजा का कोई डर ही नहीं बचा है। जज ने भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि हमारा देश एक मजबूत लोकतंत्र है, इसलिए आज हर कोई कानून की ढील और लोकतांत्रिक अधिकारों का गलत फायदा उठाने में लगा हुआ है। इस स्थिति की गंभीरता को समझाने के लिए माननीय जज ने कुछ पश्चिम एशियाई देशों (Middle East Countries) का उदाहरण दिया, जहां संगीन अपराधों के लिए रूह कंपा देने वाली बेहद सख्त और त्वरित सजाएं सरेआम दी जाती हैं।

जेल में रहने दो ताकि आदत पड़ जाए, बचाव पक्ष की ‘दो महीने जेल’ वाली दलील पर भड़के जज

अदालत के भीतर आरोपी छात्र की तरफ से पेश हुए बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने एक ऐसे अपराध के लिए जेल में लगभग दो महीने का समय बिताया है जो उसने किया ही नहीं था। वकील ने यह भी कहा कि यह पूरा मामला साल 2023 यानी करीब तीन साल पुरानी कथित घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इस दलील पर जस्टिस नटराज ने बेहद कड़ा और दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि अगर आप नमक खाते हैं, तो आपको पानी भी पीना ही पड़ेगा। जज ने तंज कसते हुए आगे कहा कि आरोपी को अभी चार-पांच दिन और जेल के भीतर ही रहने दो ताकि उसे जेल की हवा खाने की आदत पड़ जाए, क्योंकि किसे पता कि कल को अगर ट्रायल में उसे दोषी ठहराकर सख्त सजा सुनाई गई, तो उसे दोबारा लंबे समय के लिए जेल वापस जाना ही पड़ेगा।

दोस्ती के बहाने अपार्टमेंट ले जाकर किया था यौन उत्पीड़न, राष्ट्रीय महिला आयोग की दखल के बाद दर्ज हुआ केस

इस पूरे मामले की पुलिस इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी इंजीनियरिंग छात्र अप्रैल 2026 की शुरुआत से ही न्यायिक हिरासत में बंद है। उस पर आरोप है कि उसने 12 सितंबर 2023 को अपनी एक पुरानी क्लासमेट (सहपाठी) को दोबारा दोस्ती की बातें करने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ एक अपार्टमेंट में चलने को कहा था। वहां ले जाकर आरोपी ने पीड़िता की मर्जी के खिलाफ उसके साथ गंभीर रूप से यौन उत्पीड़न की वारदात को अंजाम दिया। घटना से डरी-सहमी पीड़ित महिला ने स्थानीय पुलिस में सीधे शिकायत दर्ज कराने से पहले नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से संपर्क साधा था। महिला आयोग के कड़े निर्देश और दखल के बाद ही इस मामले में स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एफआईआर दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार किया। कर्नाटक हाई कोर्ट ने अब इस पूरे मामले में राज्य सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है और केस की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तारीख तय की है।