Jauhar University Controversy: जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में कूदे असदुद्दीन ओवैसी! सहारनपुर से सरकार पर बोला तीखा हमला, कहा—मुस्लिम शिक्षा और भविष्य को बनाया जा रहा निशाना

सहारनपुर/लखनऊ। रामपुर की बहुचर्चित जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासी गर्माहट अब राजधानी लखनऊ और रामपुर से निकलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों तक फैल गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा छात्रों और अभिभावकों को लिखे गए भावुक पत्र के बाद, अब इस विवाद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की भी एंट्री हो गई है।

टीवी9 हिंदी की एक विशेष राजनीतिक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने जौहर विश्वविद्यालय पर हो रही प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयों को लेकर सूबे की भाजपा सरकार पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार की यह कार्रवाई किसी कानूनी कमी को सुधारने के लिए नहीं, बल्कि एक खास समुदाय (मुस्लिमों) की आधुनिक शिक्षा और उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को जानबूझकर टारगेट करने की सोची-समझी राजनीति का हिस्सा है।

सहारनपुर से ओवैसी की हुंकार: यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी पर हमला नहीं है

असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर के मंच से जनसभा को संबोधित करते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे को सीधे तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों से जोड़ दिया। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में सरकार को घेरते हुए कहा:

  • शिक्षा को रोकने की साजिश: ओवैसी का आरोप है कि आजादी के बाद से ही अल्पसंख्यकों को उच्च शिक्षा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने से रोकने के प्रयास होते रहे हैं। जौहर यूनिवर्सिटी जैसी बेहतरीन यूनिवर्सिटी पर हो रही एकतरफा कार्रवाई इसी दमनकारी सोच का ताजा उदाहरण है।

  • सपनों को कुचलने का प्रयास: एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि इस संस्थान में पढ़ रहे हजारों गरीब और होनहार बच्चों के करियर को दांव पर लगा दिया गया है। सरकार बिना किसी ठोस कानूनी आधार के सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) के चलते इस संस्थान को खत्म करना चाहती है।

अखिलेश यादव के बाद ओवैसी के तीखे सुर, यूपी में नया सियासी समीकरण?

गौरतलब है कि यह विवाद तब और बड़ा हो गया जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को ‘शिक्षा विरोधी’ करार दिया था। अब ओवैसी द्वारा भी इसी सुर में सरकार पर हमला बोलने से उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

  • दोगुनी कार्रवाई का आरोप: ओवैसी ने अपने भाषण में तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कई ऐसे संस्थान और स्कूल चल रहे हैं जिनके पास पूरे कागजात नहीं हैं, लेकिन सरकार की नजर केवल चुनिंदा संस्थानों पर ही क्यों पड़ती है? उन्होंने कहा कि जब बात मुसलमानों द्वारा बनाए गए किसी बड़े और आधुनिक शिक्षण संस्थान की आती है, तो पूरी मशीनरी उसे ध्वस्त करने या बंद करने में जुट जाती है।

संसद के मानसून सत्र से पहले बढ़ा राजनीतिक पारा

असदुद्दीन ओवैसी का यह आक्रामक बयान ऐसे समय पर आया है जब ठीक एक दिन बाद, यानी 20 जुलाई 2026 से दिल्ली में संसद का मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session) शुरू हो रहा है। माना जा रहा है कि ओवैसी संसद के भीतर भी इस मुद्दे को पूरी प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से अल्पसंख्यकों के शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल पूछेंगे।

सहारनपुर की इस रैली के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है और कोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है, जबकि ओवैसी और अन्य विपक्षी दल इसे आगामी राजनीतिक लाभ और ध्रुवीकरण की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।