नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया में इस बार बड़े बदलाव किए गए हैं। 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अलग-अलग टैक्सपेयर कैटेगरी के लिए नई समय-सीमाओं का ऐलान किया है। अगर आप समय पर अपना रिटर्न फाइल नहीं करते हैं, तो आपको न केवल भारी जुर्माना देना पड़ सकता है, बल्कि बकाया टैक्स पर मोटा ब्याज भी चुकाना होगा।
कैटेगरी के हिसाब से समझें अपनी डेडलाइन
सरकार ने इस बार टैक्सपेयर्स की सुविधा और ऑडिट की जटिलता को देखते हुए तारीखों में अंतर रखा है। अपनी कैटेगरी के अनुसार अंतिम तिथि नोट कर लें:
सैलरीड क्लास और पेंशनर्स (ITR-1 और ITR-2): यदि आपकी आय का जरिया केवल वेतन, पेंशन, एक मकान या ब्याज है, तो आपके लिए आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है।
फ्रीलांसर और छोटे बिजनेस (Non-Audit Cases): ऐसे प्रोफेशनल या छोटे कारोबारी जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य नहीं है, वे 31 अगस्त 2026 तक अपना रिटर्न भर सकते हैं।
टैक्स ऑडिट वाले मामले: जिन बिजनेसेस के लिए कानूनन ऑडिट जरूरी है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
डेडलाइन मिस होने पर क्या हैं विकल्प?
यदि किसी कारणवश आप तय समय तक रिटर्न फाइल नहीं कर पाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसके लिए आपको कीमत चुकानी होगी:
बिलेटेड रिटर्न (Belated Return): आप 31 दिसंबर 2026 तक अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं, लेकिन इसमें आपको लेट फीस और ब्याज देना होगा।
रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return): अगर फाइलिंग में कोई गलती हो गई है, तो उसे सुधारने का मौका भी 31 दिसंबर 2026 तक ही मिलेगा। विशेष परिस्थितियों में यह समय 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया जा सकता है।
अपडेटेड रिटर्न (ITR-U): पुरानी किसी आय को दिखाने या गलती सुधारने के लिए असेसमेंट ईयर खत्म होने के 4 साल बाद तक यानी 31 मार्च 2031 तक का समय मिलता है।
इनकम टैक्स एक्ट 2025: भविष्य की तैयारी
टैक्सपेयर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस साल की फाइलिंग अभी पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ के तहत ही होगी। हालांकि, अगले वित्त वर्ष (FY 2026-27) से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ प्रभावी हो जाएगा, जिसके लिए नए फॉर्म और नियम 1 अप्रैल 2027 से पहले जारी कर दिए जाएंगे।
देरी करने पर हो सकता है यह नुकसान
समय पर ITR फाइल न करने से न केवल पेनल्टी लगती है, बल्कि आप अपने पुराने घाटे (Losses) को भी आगे के वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाते। साथ ही, समय पर फाइलिंग से लोन अप्रूवल और वीजा आवेदन जैसी प्रक्रियाओं में आसानी होती है।
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