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IRDAI का ऐतिहासिक प्रस्ताव: पॉलिसीधारकों की होगी बल्ले-बल्ले, डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन में भारी कटौती से सस्ता होगा प्रीमियम और बंद होगी मिस-सेलिंग

देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों और आम बीमा ग्राहकों के लिए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने एक क्रांतिकारी सुधार की रूपरेखा पेश की है। बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, पॉलिसीधारकों को अधिक वैल्यू देने और लंबे समय से चल रही बेतहाशा कमीशनखोरी पर लगाम लगाने के लिए नियामक ने ‘रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन’ (Recalibrating Economics of Insurance Distribution) कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इस नए प्रस्ताव से जहां एक तरफ इंश्योरेंस ब्रोकर्स, कॉर्पोरेट एजेंट्स (बैंकों) और बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स की भारी-भरकम कमाई पर जोरदार कैंची चलने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आम पॉलिसीधारकों के लिए प्रीमियम सस्ता होने, मिस-सेलिंग रुकने और सेविंग्स पॉलिसियों पर बेहतर रिटर्न मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

अब तक इंश्योरेंस सेक्टर में ग्राहक द्वारा चुकाए जाने वाले प्रीमियम का एक बड़ा हिस्सा एजेंट्स, बैंकों और मीडिएटर्स की कमीशन जेब में चला जाता था। IRDAI के नए नियमों से उपभोक्ताओं को सीधे ये 5 बड़े लाभ मिलने जा रहे हैं:

  • सस्ता हो सकता है प्रीमियम: डिस्ट्रीब्यूशन लागत और कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च (Expenses of Management – EoM) में कमी आने से बीमा कंपनियों के पास प्रीमियम घटाने की गुंजाइश बनेगी। विशेष रूप से हेल्थ इंश्योरेंस और मोटर इंश्योरेंस में इसका असर दिख सकता है।

  • कर्ज के साथ जबरन इंश्योरेंस पर पूर्ण प्रतिबंध: बैंक और एनबीएफसी (NBFCs) अब होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन देते समय ग्राहकों को जबरन अपनी पार्टनर इंश्योरेंस कंपनी की पॉलिसी थोपने (Compulsory Bundling) का दबाव नहीं बना सकेंगे। यह पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करेगा।

  • बैंकों के कमीशन पर सख्त कैप: लोन के साथ इंश्योरेंस बेचने वाले बैंकों और लेंडर्स का कमीशन घटाकर मात्र 2% से 5% के दायरे में सीमित करने का प्रस्ताव है। इससे बैंक शाखाओं में ग्राहकों को जबरन इंश्योरेंस बेचने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी।

  • मिस-सेलिंग और धोखेबाजी पर रोक: बीमा कंपनियों और एजेंट्स के लिए ग्राहक की जरूरत और प्रोडक्ट उपयुक्तता (Suitability Analysis) का लिखित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। यानी केवल मोटा कमीशन कमाने के लिए किसी बुजुर्ग या कम आय वाले व्यक्ति को गलत यूलिप या एंडोमेंट पॉलिसी नहीं बेची जा सकेगी।

  • पॉलिसी सरेंडर करने पर कम नुकसान: लाइफ इंश्योरेंस में भारी फ्रंट-लोडेड कमीशन घटने से पहले साल से ही पॉलिसी का एसेट बिल्ड-अप बेहतर होगा, जिससे पॉलिसी बीच में छोड़ने पर ग्राहक की गाढ़ी कमाई पूरी तरह डूबने से बचेगी।

नियामक के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच जहां मोटर प्रीमियम में 34% की बढ़ोतरी हुई, वहीं डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले कमीशन में 259% का अप्रत्याशित उछाल देखा गया। इसी तरह लाइफ इंश्योरेंस में नए प्रीमियम में 28% की वृद्धि हुई, जबकि बैंकों व कॉर्पोरेट एजेंट्स को मिले भुगतान में 125% की भारी वृद्धि दर्ज की गई। इस बेलगाम खर्च पर रोक लगाने के लिए नियामक ने नए प्रोडक्ट-वाइज कमीशन कैप प्रस्तावित किए हैं:

इंश्योरेंस का प्रकार मौजूदा स्थिति (औसत कमीशन) डिस्ट्रीब्यूशन फर्म्स/ब्रोकर्स के लिए नया कैप व्यक्तिगत एजेंट्स के लिए नया कैप
हेल्थ इंश्योरेंस (पहली बार) 30% से 35% तक अधिकतम 15% अधिकतम 20%
हेल्थ रिन्यूअल / पोर्टिंग 15% से 25% मात्र 5% मात्र 10%
मोटर थर्ड पार्टी (नई गाड़ियां) 20% से 24% शून्य (0% कमीशन) 2.5%
मोटर ओन-डैमेज (नई गाड़ियां) 25% से 40% तक मात्र 5% 10%
टर्म लाइफ इंश्योरेंस (मल्टी-ईयर) 35% से 40% तक 25% (पहले साल) 30% (पहले साल)

IRDAI ने केवल कमीशन ही नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों के कुल संचालन खर्च (Expenses of Management) को भी सख्ती से सीमित करने के लिए 5 साल का ‘ग्लाइड पाथ’ तय किया है:

  • लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां: वर्तमान खर्च सीमा को घटाकर अगले 2 साल में 15% और 5 साल के भीतर 12.5% पर लाना होगा।

  • जनरल इंश्योरेंस कंपनियां: कंपनियों को अपने प्रबंधन खर्च को घटाकर 2 साल में 25% और 5 वर्षों के भीतर 20% तक सीमित करना होगा।

  • ऑडिट और अप्रत्यक्ष भुगतान पर शिकंजा: अब गिफ्ट, रिवॉर्ड, फॉरेन ट्रिप्स और स्पॉन्सरशिप जैसे अप्रत्यक्ष भुगतानों को भी ‘कमिशन’ की परिभाषा में शामिल कर लिया गया है, ताकि पिछले दरवाजे से एजेंट्स को अतिरिक्त फायदा न दिया जा सके।

इस पूरे सुधार का अंतिम लक्ष्य ‘बीमा सुगम’ (Bima Sugam) और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) के जरिए बीमा बिक्री को बिचौलियों के जाल से निकालकर एक पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करना है। जैसे यूपीआई ने पेमेंट्स की दुनिया बदल दी, वैसे ही बीमा सुगम के जरिए आम नागरिक विभिन्न कंपनियों की पॉलिसियों की सीधी तुलना करके बिना किसी कमीशन एजेंट के कम कीमत में ऑनलाइन पॉलिसी खरीद सकेंगे।

नियामक ने इस कंसल्टेशन पेपर पर सभी हितधारकों, बीमा कंपनियों, एजेंट संगठनों और आम जनता से 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव और प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम रेगुलेशन जारी किए जाएंगे। अगर यह प्रस्ताव अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होता है, तो यह भारतीय बीमा उद्योग के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा ग्राहक-हितैषी कदम साबित होगा।