
लखनऊ। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में एक अच्छी व सुकून भरी नींद (Good Sleep) आना किसी वरदान से कम नहीं है। शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद बेहद आवश्यक है। हालांकि, बदलती जीवनशैली, ऑफिस का तनाव, देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण आज बड़ी संख्या में लोग अनिद्रा (Insomnia) का शिकार हो रहे हैं। कई लोगों की शिकायत होती है कि वे बिस्तर पर लेटने के बाद घंटों करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन नींद आंखों से कोसों दूर रहती है। वहीं, कुछ लोगों की रात में बार-बार आंख खुल जाती है। लगातार नींद पूरी न होने की वजह से अगले दिन शरीर में भारी थकान, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और कार्यक्षेत्र में ध्यान लगाने में गंभीर परेशानी होने लगती है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कभी-कभार नींद आने में देरी हो तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अगर यह समस्या आपकी रोज की आदत बन चुकी है, तो आपको तुरंत सचेत हो जाना चाहिए। प्रसिद्ध हेल्थ वेबसाइट ‘हेल्थलाइन’ (Healthline) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी कुछ आदतों में छोटे-बड़े सकारात्मक बदलाव करके और विशेष रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाकर इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पाई जा सकती है।
जल्दी और गहरी नींद लाने के लिए आजमाएं ये 3 जादुई ट्रिक्स:
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1. जादुई 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक (4-7-8 Breathing Method): यह अनिद्रा को दूर करने का एक प्रामाणिक और बेहद असरदार तरीका है। बिस्तर पर लेटने के बाद सबसे पहले 4 सेकंड तक अपनी नाक से फेफड़ों में गहरी सांस भरें। इसके बाद अगले 7 सेकंड तक अपनी सांस को पूरी तरह अंदर ही रोककर रखें (Hold)। अंत में, 8 सेकंड के समय में अपने मुंह से धीरे-धीरे पूरी सांस को बाहर छोड़ें। इस चक्र को 4 से 5 बार दोहराने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे दिमाग तुरंत शांत होता है और गहरी नींद आने लगती है।
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2. प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन और मेडिटेशन: सोने से ठीक पहले थोड़ी देर ध्यान (Meditation) लगाना काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा आप प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन तकनीक अपना सकते हैं। इसमें पैर के अंगूठे से लेकर चेहरे तक की शरीर की सभी मांसपेशियों को कुछ सेकंड के लिए हल्का सा सिकोड़ कर या कसकर फिर पूरी तरह ढीला (Relax) छोड़ दिया जाता है। इससे शरीर का शारीरिक तनाव मिनटों में गायब हो जाता है।
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3. 20 मिनट का स्लीप रूल (20-Minute Rule): यदि आपको बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद तक भी नींद न आए, तो जबरदस्ती आंखें बंद करके लेटे न रहें। इससे दिमाग में बेचैनी बढ़ती है। ऐसे में तुरंत बिस्तर से उठ जाएं और मंद रोशनी में कोई हल्की ज्ञानवर्धक किताब (Reading) पढ़ें या शांत संगीत सुनें। जब दोबारा झपकी आने लगे, तभी बिस्तर पर लौटें।
शांतिपूर्ण नींद के लिए सोने से पहले इन 4 बुरी आदतों से बना लें दूरी:
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कैफीन और भारी भोजन से तौबा: सोने से कम से कम 4-5 घंटे पहले चाय, कॉफी या किसी भी तरह के कैफीन युक्त कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन बंद कर दें। इसके अलावा रात का डिनर हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए, अत्यधिक मसालेदार या भारी भोजन पाचन तंत्र को बिगाड़कर नींद में खलल डालता है।
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डिजिटल डिटॉक्स (स्क्रीन टाइम): बिस्तर पर जाने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन को पूरी तरह बंद कर दें। इन गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू लाइट (Blue Light) शरीर में नींद लाने वाले ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन के स्राव को रोक देती है।
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बेडरूम का वातावरण: आपके सोने के कमरे का तापमान हमेशा आरामदायक और थोड़ा ठंडा होना चाहिए। कमरे में पूरी तरह अंधेरा रखें या बहुत हल्की (Dim) लाइट का प्रयोग करें और शोर-शराबे को पूरी तरह ब्लॉक कर दें।
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असमय वर्कआउट पर रोक: दिन में नियमित रूप से एक्सरसाइज या योग करना सेहत और नींद दोनों के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन सोने से ठीक पहले जिम जाना या भारी वर्कआउट (Heavy Workout) करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ जाती है और नींद गायब हो जाती है।
रेड अलर्ट: कब हो जाता है डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी?
चिकित्सकों के अनुसार, यदि लाइफस्टाइल बदलने के बावजूद हफ्तों से लगातार आपकी नींद प्रभावित हो रही है, रात में सांस रुकने या घबराहट जैसा महसूस होता है, या फिर सोते समय बहुत तेज खर्राटे (Snoring / Sleep Apnea) आते हैं, तो यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना कोई घरेलू नुस्खा आजमाए तुरंत किसी स्लीप स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से मिलकर उचित चिकित्सीय परामर्श और जांच करानी चाहिए, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।
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