India-Sri Lanka DTAA: टैक्स चोरी करने वालों पर भारत सरकार का बड़ा प्रहार, भारत-श्रीलंका टैक्स संधि में हुआ ऐतिहासिक बदलाव, कागजी कंपनियों पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली/लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैक्स चोरी करने वालों और गलत तरीके से टैक्स छूट का फायदा उठाने वाले शातिर निवेशकों पर भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा और निर्णायक प्रहार किया है। केंद्र सरकार ने भारत और श्रीलंका के बीच दशकों पुराने डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) यानी दोहरे कराधान से मुक्ति समझौते में एक बड़ा ऐतिहासिक संशोधन किया है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, इस बदलाव के तहत अब एक ऐसा कड़ा और नया नियम लागू किया गया है, जिसके बाद केवल टैक्स बचाने या हेरफेर करने के उद्देश्य से किए गए किसी भी लेन-देन या कृत्रिम कारोबारी ढांचे को इस द्विपक्षीय टैक्स समझौते का कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। दोनों देशों की आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह संशोधन 19 जून 2026 से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो चुका है, जबकि भारत में इसका जमीनी असर वित्त वर्ष 2027-28 से अर्जित होने वाली आय पर साफ दिखाई देगा।

लागू हुआ ‘प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट’ (PPT) का ब्रह्मास्त्र, समझिए क्या है नया नियम

इस नए संशोधन के तहत टैक्स संधि में प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट (Principal Purpose Test – PPT) नाम का एक बेहद प्रभावी नियम जोड़ा गया है। आसान और व्यावहारिक भाषा में समझें तो, यदि भारतीय टैक्स अधिकारियों (Tax Authorities) को गहन जांच के दौरान यह ठोस सबूत मिलता है कि किसी विदेशी कंपनी या व्यक्ति द्वारा किए गए किसी विशिष्ट लेन-देन या व्यापारिक ढांचे का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य केवल टैक्स में भारी छूट हासिल करना था, तो उसे भारत-श्रीलंका टैक्स संधि के तहत मिलने वाले सभी विशेष लाभों से तुरंत वंचित कर दिया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी भारत में टैक्स देने से बचने के लिए श्रीलंका में केवल कागजों पर एक फर्जी या शेल कंपनी (Shell Company) खड़ी करती है और वहां उसका कोई वास्तविक भौतिक अस्तित्व, कर्मचारी या वास्तविक कारोबार नहीं है, तो अब जांच के बाद उसे किसी भी प्रकार की टैक्स राहत नहीं मिलेगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि कागजी कंपनियों के जरिए होने वाली इस ‘टैक्स प्लानिंग’ पर अब पूरी तरह ताला लग जाएगा।

वास्तविक और नियम सम्मत कारोबार करने वाली कंपनियों को कोई चिंता नहीं

वित्त मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में इस बात को पूरी तरह स्पष्ट किया है कि जिन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और वास्तविक निवेशकों का कामकाज पूरी तरह वैध, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप है, उन्हें इस नए बदलाव से रत्ती भर भी घबराने या चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि किसी व्यावसायिक लेन-देन का मुख्य उद्देश्य वास्तविक व्यापार का विस्तार करना, बुनियादी ढांचों में निवेश करना या कोई वैध आर्थिक गतिविधि संचालित करना है और वह इस टैक्स समझौते की मूल भावना के अनुकूल है, तो उन्हें पहले की तरह ही सभी कर लाभ और रियायतें बिना किसी बाधा के मिलती रहेंगी।

टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं, पारदर्शिता बढ़ाना है मुख्य उद्देश्य

टैक्स विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सरकार के इस कदम से घरेलू या विदेशी बाजार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस संशोधन के तहत न तो कोई नया टैक्स (New Tax) लगाया गया है और न ही वर्तमान में लागू टैक्स दरों (Tax Rates) में कोई फेरबदल किया गया है। इसका एकमात्र उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि दोनों मित्र देशों के बीच हुए इस समझौते का कोई गलत इस्तेमाल न कर सके और कृत्रिम तरीकों से टैक्स बेस को कम करने वाली प्रवृत्तियों पर लगाम लगाई जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक बदलाव वैश्विक स्तर पर चल रहे जी-20 और ओईसीडी के उन साझा प्रयासों का हिस्सा है, जिनका मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी और मुनाफे को दूसरे कम टैक्स वाले देशों में स्थानांतरित करने (Base Erosion and Profit Shifting – BEPS) पर रोक लगाना है। इससे भारत की कर व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक स्वस्थ व भरोसेमंद निवेश का माहौल तैयार होगा।