
भारत और ब्रिटेन वैश्विक पटल पर एक नए और बेहद मजबूत भविष्य के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दोनों देशों के बीच होने वाला आगामी ऐतिहासिक व्यापार समझौता (Trade Agreement) और रक्षा उद्योगों (Defense Industries) के विकास की महत्वाकांक्षी योजना इस साझेदारी को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाएगी। यह महत्वपूर्ण बात देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत दौरे पर आईं अपनी ब्रिटिश समकक्ष ईवेट कूपर के साथ नई दिल्ली में हुई एक द्विपक्षीय उच्च स्तरीय बैठक के दौरान कही। दोनों नेताओं ने माना कि यह समझौता वैश्विक स्तर पर बदलती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा।
पीएम मोदी और ब्रिटिश पीएम स्टार्मर की ऐतिहासिक यात्राओं ने बदली तस्वीर, जयशंकर ने बताया रिश्तों का नया रोडमैप
बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के प्रगाढ़ होते कूटनीतिक रिश्तों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय संबंधों में गजब की मजबूती और गति देखने को मिली है। इस रणनीतिक बदलाव की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2025 में हुई ब्रिटेन की सफल यात्रा और उसके ठीक बाद अक्टूबर 2025 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के भारत दौरे के दौरान रखी गई थी। इन दोनों शीर्ष नेताओं की मुलाकातों के बाद अब भारत और ब्रिटेन एक ऐसा व्यावहारिक व्यापार समझौता करने की बेहद मजबूत स्थिति में आ गए हैं, जो दोनों ही पक्षों के लिए समान रूप से लाभकारी (Win-Win Situation) साबित होगा। यह समझौता न केवल दोनों देशों की आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) को सुरक्षित और सुदृढ़ करेगा, बल्कि इसके जरिए व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और समग्र आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्रों में विकास की नई राहें भी खुलेंगी।
डिफेंस पार्टनरशिप और हाई-टेक सेक्टर में नया धमाका, भारत में खुलेगा लिवरपूल विश्वविद्यालय का परिसर
भारत और ब्रिटेन के बीच के संबंध सिर्फ आर्थिक मोर्चे तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ये गहरे ऐतिहासिक और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव को भी समेटे हुए हैं। विदेश मंत्री जयशंकर के अनुसार, अब दोनों देश मिलकर उच्च तकनीक (High-Tech Development) और रक्षा क्षेत्र के विकास के लिए नए और आधुनिक आयाम गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इस मजबूत होते रिश्ते की मिसाल देते हुए उन्होंने ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ‘लिवरपूल विश्वविद्यालय’ (University of Liverpool) द्वारा भारत में अपना अंतरराष्ट्रीय परिसर (Campus) स्थापित करने के बड़े और ऐतिहासिक निर्णय का विशेष रूप से उल्लेख किया। जयशंकर की इन बातों का गर्मजोशी से जवाब देते हुए ब्रिटेन की विदेश मंत्री ईवेट कूपर ने दोनों महाशक्तियों के संबंधों को ‘मजबूत से भी ज्यादा मजबूत’ करार दिया। उन्होंने हाल ही में आगे बढ़े व्यापार समझौते को दोनों देशों के भावी आर्थिक विकास की मुख्य धुरी बताया।
सुरक्षित होगी सप्लाई चेन! भारत और ब्रिटेन ने शुरू की दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) की मॉनिटरिंग के लिए बड़ी मुहिम
अपनी भारत यात्रा के दौरान ब्रिटिश विदेश मंत्री ईवेट कूपर ने केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि वैश्विक संसाधनों से जुड़े महत्वपूर्ण मोर्चों पर भी बड़ी प्रगति की। गुरुवार को ब्रिटिश विदेश मंत्री ने भारत के केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ एक विशेष और बेहद महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों ने संयुक्त रूप से ‘दुर्लभ खनिजों’ (Critical Minerals) की वैश्विक स्थिति और बाजार पर करीब से नजर रखने वाली एक विशेष अंतरराष्ट्रीय संस्था की शुरुआत की है। आधुनिक तकनीक, सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए बेहद जरूरी इन दुर्लभ खनिजों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना आज के समय में बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में भारत और ब्रिटेन की यह नई साझेदारी दुर्लभ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ भविष्य में उनकी आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे का पूरा सहयोग करेगी।
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