
आयकर रिटर्न (Income Tax Return – ITR) दाखिल करने के बाद करदाताओं को सबसे ज्यादा इंतजार अपने टैक्स रिफंड (Tax Refund) के बैंक खाते में आने का होता है। अधिकांश मामलों में आईटीआर प्रोसेस होने के कुछ ही दिनों या हफ्तों के भीतर आयकर विभाग द्वारा रिफंड सीधे बैंक खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है। हालांकि, लाखों करदाता ऐसे हैं जिन्होंने समय सीमा से पहले रिटर्न दाखिल कर दिया, ई-वेरिफिकेशन भी पूरा कर लिया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उनका रिफंड खाते में नहीं पहुंचा है।
यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो परेशान होने के बजाय सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि रिफंड की प्रक्रिया किस चरण पर रुकी हुई है। आयकर विभाग के सीपीसी (CPC – सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर) द्वारा रिफंड रोके जाने या जारी होने के बाद बैंक में अटकने के कई तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारण हो सकते हैं।
रिफंड में देरी के पीछे आमतौर पर निम्नलिखित में से कोई एक तकनीकी या वैधानिक कारण होता है:
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बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट (Pre-Validated) न होना: आयकर रिफंड केवल उसी बैंक खाते में भेजा जाता है जो ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘Pre-Validated’ हो और जिस पर ‘Electronic Clearing Service (ECS)’ सक्रिय हो। यदि बैंक का आईएफएससी (IFSC) कोड बदल गया है या नाम पैन से मेल नहीं खाता, तो रिफंड फेल हो जाता है।
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पैन और बैंक खाते के नाम में अंतर: यदि आपके पैन कार्ड में दर्ज नाम और बैंक पासबुक में दर्ज नाम की स्पेलिंग में थोड़ा भी अंतर है, तो बैंक का ऑटोमेटेड सिस्टम रिफंड क्रेडिट करने से इनकार कर देता है।
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आईटीआर का ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) अधूरा होना: रिटर्न भरने के 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग से ई-वेरिफाई करना अनिवार्य होता है। यदि ई-वेरिफिकेशन नहीं हुआ है, तो विभाग उस रिटर्न को प्रोसेस ही नहीं करता।
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धारा 143(1) के तहत मिसमैच या नोटिस: यदि आपके द्वारा क्लेम किए गए टीडीएस (TDS) और फॉर्म 26AS या एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दर्ज टीडीएस में अंतर है, तो विभाग प्रोसेसिंग रोक देता है और स्पष्टीकरण मांगता है।
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पुराने बकाया टैक्स के साथ समायोजन (Adjustment Under Section 245): यदि पिछले किसी वित्तीय वर्ष का कोई टैक्स बकाया है, तो विभाग नए रिफंड को उस पुराने बकाए में समायोजित कर सकता है।
आप घर बैठे आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने रिफंड का लाइव स्टेटस जांच सकते हैं:
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पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले इनकम टैक्स के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जाएं।
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लॉगिन करें: यूजर आईडी के रूप में अपना पैन (PAN) नंबर, पासवर्ड और कैप्चा दर्ज कर लॉगिन करें।
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e-File मेन्यू चुनें: लॉगिन के बाद डैशबोर्ड के ऊपरी मेन्यू बार में ‘e-File’ टैब पर जाएं।
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Income Tax Returns पर क्लिक करें: ड्रॉपडाउन सूची में से ‘Income Tax Returns’ चुनें और फिर ‘View Filed Returns’ पर क्लिक करें।
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असेसमेंट ईयर का स्टेटस देखें: संबंधित असेसमेंट ईयर के सामने आपको अपने रिटर्न की वर्तमान स्थिति दिखाई देगी:
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Return Processing Completed: रिटर्न प्रोसेस हो चुका है।
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Refund Issued: रिफंड जारी कर दिया गया है (इसमें रेफरेंस नंबर और तारीख दी होती है)।
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Refund Failed: किसी बैंक या तकनीकी गड़बड़ी के कारण रिफंड ट्रांसफर असफल रहा।
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यदि ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘Refund Issued’ दिख रहा है लेकिन पैसे बैंक में नहीं पहुंचे हैं, तो आप NSDL (Protean) की वेबसाइट पर बैंक ट्रांसफर का स्टेटस देख सकते हैं:
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NSDL TIN की आधिकारिक वेबसाइट ([tin.tin.nsdl.com/oltas/refundstatuslogin.html](https://tin.tin.nsdl.com/oltas/refundstatuslogin.html)) पर जाएं।
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अपना 10 अंकों का पैन (PAN) नंबर दर्ज करें।
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संबंधित Assessment Year चुनें।
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कैप्चा कोड भरकर ‘Submit’ पर क्लिक करें।
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स्क्रीन पर रिफंड जारी होने की सही तारीख, भुगतान का तरीका (NECS/Direct Credit) और बैंक रिजेक्शन का स्पष्ट कारण सामने आ जाएगा।
यदि आपके स्टेटस में ‘Refund Failed’ लिखा आ रहा है, तो इसका मतलब है कि विभाग ने पैसे भेजे थे लेकिन बैंक ने अस्वीकार कर दिए। इसे ठीक करने के लिए:
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सबसे पहले अपने प्रोफाइल में जाकर बैंक अकाउंट की डिटेल्स सही करें और उसे दोबारा Pre-validate करें।
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ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘Services’ टैब में जाएं और ‘Refund Re-issue’ विकल्प पर क्लिक करें।
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‘Create Refund Re-issue Request’ चुनें, संबंधित रिटर्न सिलेक्ट करें और सही वैलिडेटेड बैंक अकाउंट को चुनकर आधार ओटीपी से सबमिट कर दें। कुछ ही दिनों में रिफंड पुनः प्रोसेस होकर खाते में आ जाएगा।
| स्थिति / एरर | संभावित कारण | समाधान |
| Under Processing | सीपीसी द्वारा रिटर्न की जांच जारी | कुछ दिन प्रतीक्षा करें, AIS/TIS की जांच करें |
| Refund Failed | बैंक खाता अमान्य / नाम मिसमैच | बैंक प्री-वैलिडेट करें और Refund Re-issue रिक्वेस्ट डालें |
| Adjusted against Demand | पुराने वर्ष का टैक्स बकाया | धारा 245 के तहत ‘Response to Outstanding Demand’ चेक करें |
| Defective Return 139(9) | गणना में गड़बड़ी या गलत फॉर्म | निर्धारित समयसीमा में संशोधित रिटर्न (Revised ITR) दाखिल करें |
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