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Income Tax Department X Post Alert: 15 सितंबर की अंतिम तारीख और टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी चेतावनी

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने देश भर के करोड़ों करदाताओं के लिए एक अत्यंत जरूरी और समय-संवेदनशील अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट शब्दों में लिखा है—’बस एक दिन बाकी है!’ (Only 1 Day Left)। यह तात्कालिक चेतावनी किसी साधारण आयकर रिटर्न (ITR) की नहीं, बल्कि चालू वित्त वर्ष के लिए ‘एडवांस टैक्स’ (Advance Tax) की दूसरी किस्त जमा करने की अंतिम तारीख यानी 15 सितंबर को लेकर है। यदि आपने समय रहते अपनी टैक्स देनदारी का आकलन करके यह भुगतान नहीं किया, तो विभाग नियमों के अनुसार भारी ब्याज और दंडात्मक शुल्क वसूल करेगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी से लेकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में कारोबार करने वाले व्यापारियों, फ्रीलांसरों और अतिरिक्त आय वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह समय बेहद सतर्क रहने का है। आज की रात 11:59 बजे से पहले यह काम निपटाना कानूनी और वित्तीय दोनों लिहाज से अनिवार्य है।

साधारण भाषा में समझें तो एडवांस टैक्स का सिद्धांत ‘जैसे कमाओ, वैसे चुकाओ’ (Pay as you earn) की अवधारणा पर काम करता है। आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति या व्यावसायिक संस्था की किसी वित्तीय वर्ष में कुल अनुमानित शुद्ध कर देनदारी (TDS/TCS और अन्य टैक्स छूट घटाने के बाद) 10,000 रुपये या उससे अधिक बनती है, तो उसे पूरे साल के अंत का इंतजार किए बिना सरकार को किस्तों में टैक्स का अग्रिम भुगतान करना होता है। यह नियम केवल बड़े कॉर्पोरेट्स या कंपनियों के लिए ही नहीं है। इसके दायरे में प्रोप्राइटरशिप फर्म, साझेदारी फर्में, एलएलपी, डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंसल्टेंट्स, यूट्यूबर्स, डिजिटल क्रिएटर्स, रियल एस्टेट कारोबारी और वे सभी नौकरीपेशा लोग आते हैं जिनकी वेतन के अतिरिक्त अन्य स्रोतों से उल्लेखनीय कमाई होती है। बहुत से लोग यह सोचते हैं कि कंपनी उनकी सैलरी से टीडीएस काट रही है तो उन्हें एडवांस टैक्स से कोई मतलब नहीं, जबकि यही गलतफहमी बाद में आयकर विभाग के नोटिस का कारण बन जाती है।

आयकर विभाग द्वारा निर्धारित एडवांस टैक्स कैलेंडर के अनुसार, पूरे वर्ष की कर देनदारी को चार निश्चित तिमाहियों में विभाजित किया गया है। मानक करदाताओं के लिए पहला पड़ाव 15 जून था, जब कुल टैक्स का कम से कम 15 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य था। अब 15 सितंबर वह ऐतिहासिक तारीख है, जिस दिन तक करदाता को अपनी पूरे साल की अनुमानित कर देनदारी का संचयी (Cumulative) 45 प्रतिशत हिस्सा सरकारी खजाने में जमा करा देना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी करदाता की पूरे वित्त वर्ष की शुद्ध टैक्स देनदारी 1,00,000 रुपये बैठती है, तो 15 सितंबर तक उसके खाते से कुल 45,000 रुपये का एडवांस टैक्स जमा हो जाना चाहिए। यदि उसने 15 जून को 15,000 रुपये जमा कर दिए थे, तो इस दूसरी किस्त में उसे शेष 30,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके बाद तीसरा पड़ाव 15 दिसंबर होगा (जिसमें 75% तक भुगतान जरूरी है) और अंतिम व चौथा पड़ाव 15 मार्च होगा (जिसमें 100% टैक्स देनदारी का चुकता करना अनिवार्य होता है)।

यदि कोई करदाता 15 सितंबर की इस महत्वपूर्ण समयसीमा को नजरअंदाज करता है या निर्धारित 45 प्रतिशत से कम राशि जमा करता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234C के तहत दंडात्मक ब्याज लागू हो जाता है। धारा 234C के अंतर्गत बकाया या कम जमा की गई राशि पर 1 प्रतिशत प्रति माह (यानी तीन महीने की तिमाही के लिए सीधे 3 प्रतिशत) की दर से ब्याज वसूला जाता है। कानून में हालांकि एक छोटी सी राहत यह दी गई है कि यदि करदाता ने 15 सितंबर तक अपनी कुल देनदारी का कम से कम 36 प्रतिशत हिस्सा जमा कर दिया है, तो उस विशेष तिमाही के लिए 234C का ब्याज माफ हो सकता है; लेकिन 36% से कम होते ही पूरे 45% के अंतर पर ब्याज का मीटर चालू हो जाता है। इसके अलावा, यदि पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान कुल देय कर का 90 प्रतिशत हिस्सा एडवांस टैक्स के रूप में जमा नहीं कराया गया, तो अगले साल 1 अप्रैल से धारा 234B के तहत 1 फीसदी मासिक का अतिरिक्त ब्याज भी जुड़ने लगता है, जिससे आपकी मेहनत की कमाई बेवजह जुर्माने में कट जाती है।

नौकरीपेशा (Salaried) कर्मचारियों के बीच यह सबसे बड़ा मिथक है कि उनका नियोक्ता फॉर्म-16 के अनुसार टीडीएस काट ही रहा है, इसलिए उन्हें एडवांस टैक्स की चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन मौजूदा समय में अधिकांश मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा लोगों की आय केवल सैलरी तक सीमित नहीं है। यदि आपने बैंकों या पोस्ट ऑफिस में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करा रखी है और उससे मोटा ब्याज मिल रहा है, या आपको घर-दुकान से किराया (Rental Income) प्राप्त हो रहा है, तो उस पर विचार करना जरूरी है। इसके अलावा, शेयर बाजार (Stock Market), म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाला डिविडेंड, शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (Capital Gains), या साइड बिजनेस व फ्रीलांसिंग से होने वाली अतिरिक्त कमाई पर आपकी कंपनी टीडीएस नहीं काटती। जब इन सभी आय स्रोतों को मिलाया जाता है और टीडीएस कटने के बाद भी सरकार को देने वाला टैक्स 10,000 रुपये से ऊपर निकलता है, तो वेतनभोगी कर्मचारियों को भी आज 15 सितंबर तक 45 फीसदी एडवांस टैक्स जमा करना अनिवार्य हो जाता है।

इस कड़े कानून में वरिष्ठ नागरिकों को एक बहुत बड़ी और मानवीय राहत दी गई है। आयकर अधिनियम की धारा 207 के तहत, ऐसे भारतीय निवासी सीनियर सिटीजन जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है और जिनके पास किसी व्यवसाय या पेशे (Business or Profession) से कोई आय नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स भरने की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। चाहे उनकी पेंशन, बैंक ब्याज या किराये से कितनी भी आय क्यों न हो, वे अपना पूरा टैक्स साल के अंत में नियमित आईटीआर दाखिल करते समय बिना किसी पेनल्टी के जमा कर सकते हैं। वहीं छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए, जो धारा 44AD या 44ADA के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (Presumptive Taxation) स्कीम चुनते हैं, उन्हें साल में चार बार किस्तें देने की जरूरत नहीं होती; वे सीधे 15 मार्च को एकमुश्त 100 प्रतिशत एडवांस टैक्स जमा कर सकते हैं। टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि आज ही अपने फॉर्म 26AS, एआईएस (AIS) और टीआईएस (TIS) की जांच करें, अपनी अनुमानित आय का मोटा हिसाब लगाएं और बिना किसी देरी के चालान जनरेट करें।

डिजिटल इंडिया के तहत अब एडवांस टैक्स का भुगतान करना बेहद आसान और त्वरित हो गया है। इसके लिए आपको किसी बैंक की शाखा में जाने या लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है।

सबसे पहले आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल incometax.gov.in पर जाएं।

होमपेज पर क्विक लिंक्स (Quick Links) सेक्शन में दिए गए ‘e-Pay Tax’ विकल्प पर क्लिक करें।

अपना पैन (PAN) नंबर दो बार दर्ज करें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी (OTP) के जरिए सत्यापन पूरा करें।

सत्यापन के बाद स्क्रीन पर दिख रहे ‘Income Tax’ वाले बॉक्स के नीचे ‘Proceed’ बटन पर क्लिक करें।

अगले पेज पर असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का सही चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है; चालू वित्तीय वर्ष के लिए सही असेसमेंट ईयर चुनें।

इसके बाद ‘Type of Payment (Minor Head)’ में ड्रॉपडाउन मेनू से ‘Advance Tax (100)’ का विकल्प चुनें।

स्क्रीन पर टैक्स के अलग-अलग कॉलम (टैक्स, सेस, सरचार्ज) खुलेंगे; वहां अपने गणना किए गए टैक्स की राशि दर्ज करें और ‘Continue’ पर क्लिक करें।

भुगतान के लिए अपनी सुविधानुसार नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, आरटीजीएस/एनईएफटी या यूपीआई (UPI) का विकल्प चुनें।

पेमेंट सफल होते ही स्क्रीन पर ‘Challan Receipt’ (चालान रसीद) आ जाएगी, जिसमें बीएसआर कोड और चालान नंबर दर्ज होगा। इस रसीद की पीडीएफ कॉपी भविष्य के संदर्भ और आईटीआर फाइलिंग के लिए सुरक्षित डाउनलोड कर लें।