Friday , September 4 2026

बंगाल में रहना है तो नियम मानने होंगे ,पशु वध कानून पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल का हुमायूं कबीर पर तीखा पलटवार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘पशु वध नियंत्रण कानून’ को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। राज्य की शुभेंदु सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने शुक्रवार को सरकार के नए नोटिफिकेशन का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह नियम कोई नया नहीं है बल्कि साल 1950 से ही अस्तित्व में है, लेकिन पिछली सरकारों ने तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे कभी जमीन पर लागू नहीं होने दिया।

न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर के बयान पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कबीर को दोटूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत और बंगाल में रहना है, तो यहां के कायदे-कानूनों का सम्मान करना ही होगा।

हुमायूं कबीर के ‘1400 साल पुरानी परंपरा’ वाले बयान पर मचा बवाल

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हुमायूं कबीर ने भाजपा (BJP) सरकार के इस फैसले के खिलाफ खुलकर असहमति जताई थी। कबीर ने चुनौती देते हुए कहा था कि सरकार के विरोध और इस कानून के बावजूद राज्य में धार्मिक बलि (कुर्बाानी) का सिलसिला जारी रहेगा, क्योंकि यह उनकी 1,400 साल पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

कबीर के इसी बयान पर पलटवार करते हुए मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “बंगाल में हमारा 1950 का एक नियम है, जो सालों से चला आ रहा है। हुमायूं कबीर, अगर आपको बंगाल में रहना है, तो आपको यहां के नियमों का पालन करना ही होगा। अगर आपको लगता है कि आप राज्य के कानूनों को नहीं मान सकते, तो आप किसी भी दूसरे राज्य में जाने के लिए पूरी तरह आजाद हैं, जहां आपको इसकी अनुमति मिले। या फिर आप देश के बाहर किसी अन्य इस्लामी देश में जाकर बस सकते हैं।”

क्या है सरकार का नया नियम? जानिए क्यों जरूरी है ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’

शुभेंदु सरकार द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत अब बेहद कड़े दिशा-निर्देश लागू कर दिए गए हैं। नए आदेश के मुताबिक:-

अब किसी भी मवेशी के वध से पहले ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ लेना अनिवार्य होगा।

यह सर्टिफिकेट केवल संबंधित नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के प्रमुख द्वारा, किसी सरकारी पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) के साथ मिलकर ही संयुक्त रूप से जारी किया जा सकता है।

अधिकारी और डॉक्टर केवल तभी लिखित सहमति देंगे जब पशु की उम्र 14 वर्ष से अधिक हो चुकी हो और वह खेती, काम या प्रजनन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गया हो।

इसके अलावा यदि पशु बुढ़ापे, गंभीर चोट, शारीरिक विकृति या किसी असाध्य लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है, तभी उसे वध के योग्य माना जाएगा।

खुले में पशु वध पर पूरी तरह रोक, उल्लंघन करने पर होगी जेल

सरकार ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी सार्वजनिक स्थान, सड़क या खुले में पशु वध करने की इजाजत नहीं होगी। पशुओं का वध केवल और केवल अधिकृत नगरपालिका के बूचड़खाने (Slaughterhouse) या स्थानीय प्रशासन द्वारा तय की गई जगहों पर ही किया जा सकेगा।

अगर कोई भी व्यक्ति इन नियमों और प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नए नियमों के तहत उल्लंघनकर्ताओं को 6 महीने तक की जेल की सजा, 1,000 रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों ही सजाएं एक साथ भुगतनी पड़ सकती हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी सरकार के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार

इस नई अधिसूचना के जारी होने के बाद सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं में ईद-उज-ज़ुहा (बकरीद) के त्योहार का हवाला देते हुए इस दिशा-निर्देश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने शुभेंदु सरकार के आदेश पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए दोहराया कि आगामी त्योहार से पहले बिना अनिवार्य फिटनेस सर्टिफिकेट के किसी भी मवेशी या भैंस के वध पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा। कोर्ट के इस रुख के बाद अब राज्य सरकार इन नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है।