IAS बनने से पहले ‘एक्सपर्ट मां’ बनें बेटियां! दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का छात्राओं को अनोखा और बड़ा संदेश

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक संदेश दिया है। कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के 41वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यपाल ने साफ कहा कि युवतियों को प्रशासनिक सेवा (IAS) या शिक्षक जैसे बड़े पदों पर जाने की इच्छा रखने से पहले एक ‘विशेषज्ञ मां’ (Expert Mom) बनने का गुण सीखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यावसायिक सफलता कभी भी पारिवारिक जिम्मेदारियों और संस्कारों की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए। बेटियों को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनने के साथ-साथ अपनी मां से वे मूल्य भी सीखने चाहिए जिससे वे शादी के बाद अपने नए परिवार को सुचारू रूप से संभाल सकें।

सास हलुआ बनाने को कहे तो मोबाइल न निकालें बेटियां: राज्यपाल ने दिया घरेलू कला का व्यावहारिक उदाहरण

अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज की आधुनिक जीवनशैली पर चुटकी लेते हुए एक बेहद व्यावहारिक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं होना चाहिए कि शादी के बाद जब सास घर में हलुआ बनाने को बोले, तो बहू तुरंत अपना मोबाइल फोन निकालकर यूट्यूब पर रेसिपी देखने लगे और अधपका खाना तैयार कर दे। उन्होंने बेटियों को सीख दी कि घर के कामकाज और खाना बनाने की बुनियादी कला हर किसी को आनी चाहिए। राज्यपाल ने भारतीय पारिवारिक व्यवस्था की वकालत करते हुए कहा कि बहुएं अपनी सास की जितनी सेवा करेंगी, घर में उतनी ही सुख-शांति रहेगी। इससे नौकरी करने में आने वाली बाधाएं और छोटी-मोटी पारिवारिक समस्याएं अपने आप ही खत्म हो जाएंगी।

सभी यूनिवर्सिटी तैयार करें ‘गर्भसंस्कार’ का सिलेबस: देश में बढ़ती दिव्यांगता पर जताई गहरी चिंता

दीक्षांत समारोह के मंच से राज्यपाल ने समाज के स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ी के चरित्र निर्माण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्देश जारी किया। उन्होंने सीएसजेएमयू सहित उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को अपने पाठ्यक्रम में ‘गर्भसंस्कार’ (Garbh Sanskar) से जुड़ा एक विशेष सिलेबस शामिल करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम में हर गर्भवती महिला को शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए। देश में दिव्यांगता की दर 3 फीसदी से बढ़कर 4 फीसदी होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शहरों से लेकर गांवों तक की हर गर्भवती महिला को समय पर अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए और डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। कई बार गर्भ में शिशु के अंगों का विकास सही से नहीं हो पाता, ऐसे में चिकित्सकीय परामर्श पर सख्ती से अमल करना अनिवार्य है।

शादी के बाद भी जारी रखें शिक्षा और करियर: मेडल जीतने में बेटियों ने रचा 82% का स्वर्णिम इतिहास

छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए आनंदीबेन पटेल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि युवतियों को शादी के बंधन में बंधने के बाद अपनी शिक्षा और करियर को बीच में बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखें और अपने अर्जित ज्ञान व कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण (Nation Building) के लिए करें। इस भव्य दीक्षांत समारोह में कुल 1,07,713 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिसमें सबसे गौरवशाली बात यह रही कि कुल पदकों (Medals) में से लगभग 82 प्रतिशत मेडल बेटियों ने अपने नाम किए। राज्यपाल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छात्राओं की जमकर सराहना की और उन्हें समाज का असली मार्गदर्शक बताया।

माता-पिता की निगरानी में थोड़ी सी चूक भी बर्बाद कर सकती है भविष्य: गिरते नैतिक मूल्यों पर कड़ा प्रहार

अभिभावकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए राज्यपाल ने आगाह किया कि बच्चों का स्कूल या कॉलेज में एडमिशन करवा देने मात्र से माता-पिता का कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, “अभिभावकों को हर पल यह पता होना चाहिए कि उनके बच्चे शैक्षणिक संस्थानों में जाने के बाद क्या कर रहे हैं। आपकी निगरानी में हुई एक छोटी सी चूक भी उनके पूरे भविष्य को अंधकार में धकेल सकती है।” समाज में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और घरेलू हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने एक बेहद दुखद घटना का भी संदर्भ दिया जहां एक बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने कहा कि यदि देश में डिग्रियां बढ़ रही हैं लेकिन नैतिक मूल्य गिर रहे हैं और महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध जारी हैं, तो यह हमारी शिक्षा प्रणाली की वास्तविक और चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर चरित्र निर्माण का माध्यम बनाना होगा।