
कॉर्पोरेट और बिजनेस की दुनिया में एक आम धारणा बन चुकी है कि यदि आपके प्रोफेशनल करियर में कुछ महीनों या वर्षों का गैप (Career Break) आ जाए, तो दोबारा एक अच्छी और सम्मानजनक नौकरी पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। लेकिन देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) की एक पूर्व छात्रा ने इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। अन्नपूर्णा विर्डी ने करीब 3 साल के लंबे करियर ब्रेक के बाद लंदन जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी ग्लोबल जॉब मार्केट में न सिर्फ धमाकेदार वापसी की, बल्कि एक बेहतरीन मुकाम भी हासिल किया है।
शुरुआती दौर में महीनों तक लगातार रिजेक्शन झेलने और रिक्रूटर्स की ओर से कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के बाद, अन्नपूर्णा ने हार मानने के बजाय अपने सीवी (Curriculum Vitae) बनाने की स्ट्रेटिजी में कुछ ऐसे क्रांतिकारी और अनोखे बदलाव किए, जिसने उनकी किस्मत को पूरी तरह बदल दिया।
जब बेहतरीन प्रोफाइल और IIM की डिग्री के बाद भी रिक्रूटर्स ने साधी चुप्पी
अन्नपूर्णा विर्डी के पास देश के सबसे प्रीमियम मैनेजमेंट कॉलेज IIM-A की एमबीए डिग्री होने के साथ-साथ कंसल्टिंग और बड़े स्टार्टअप्स में काम करने का वर्षों का शानदार अनुभव था। इसके बावजूद, जब उन्होंने 3 साल के लंबे अंतराल के बाद लंदन के जॉब मार्केट में कदम रखा, तो उन्हें महीनों तक रिक्रूटर्स की ओर से केवल सन्नाटा और नजरअंदाजी ही मिली।
अन्नपूर्णा अपने उस कठिन दौर को याद करते हुए बताती हैं, “लंदन की जॉब मार्केट अपने कड़े और अलग नियमों से चलती है। मैं वहां के माहौल के लिए बिल्कुल नई थी और ऊपर से बेहद कठिन आर्थिक मंदी के दौर में एक गैर-रैखिक (नॉन-लीनियर) सीवी के साथ प्रयास कर रही थी।” उन्होंने अपने इस करियर ब्रेक के दौरान फ्रीलांसिंग करते हुए आईकेईए (IKEA), कुरकुरे, रिलायंस जियोमार्ट और अर्बन कंपनी जैसे दिग्गज वैश्विक ब्रांड्स के विज्ञापनों और अभियानों पर काम किया था, और यहां तक कि यश राज फिल्म्स के लिए ऑडिशन भी दिया था; लेकिन इस सब के बावजूद उन्हें शुरुआत में लगातार रिजेक्शन की कड़वाहट झेलनी पड़ी।
अन्नपूर्णा की वो 3 मास्टर सीवी (CV) स्ट्रेटेजी, जिसने बदल दिया गेम
अन्नपूर्णा ने बारीकी से रिसर्च करने पर महसूस किया कि आज के आधुनिक कॉर्पोरेट युग में किसी रिक्रूटर (इंसान) के देखने से पहले, एक एडवांस्ड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर आपके सीवी को शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट करता है, जिसे एटीएस (Applicant Tracking System – ATS) कहा जाता है। इसके बाद उन्होंने अपनी सीवी स्ट्रेटिजी को पूरी तरह से री-डिजाइन किया, जो आज किसी भी नौकरी की तलाश करने वाले या करियर गैप वाले पेशेवर के लिए एक बड़ा लाइफ लेसन है:
एटीएस (ATS) फ्रेंडली सीवी का निर्माण: उन्होंने अपने सीवी के फॉर्मेट को बेहद सरल बनाया और केवल इंसानों को प्रभावित करने के बजाय, जॉब डिस्क्रिप्शन में शामिल मुख्य एटीएस टूल्स के कीवर्ड्स (Keywords) का चतुराई से इस्तेमाल कर सीवी को सॉफ्टवेयर-फ्रेंडली बनाया।
पोजीशनिंग डॉक्यूमेंट के रूप में प्रस्तुति: उन्होंने सीवी को अपने बीते हुए कामों की एक सामान्य टाइमलाइन या सूचकांक की तरह देखना बंद कर दिया। इसके बजाय, उन्होंने इसे एक विशेष ‘पोजीशनिंग डॉक्यूमेंट’ के रूप में तैयार किया, जो ठोस तर्कों के साथ यह साबित करता था कि वह उस खास रोल के लिए दुनिया में सबसे परफेक्ट फिट क्यों हैं।
इम्पैक्ट (Impact) और प्रासंगिकता (Relevance) पर पूरा फोकस: पारंपरिक क्रोनोलॉजिकल लेआउट (समय के अनुसार काम की लिस्ट) को छोड़कर उन्होंने अपनी विविध भूमिकाओं (जैसे- कंसल्टिंग, सस्टेनेबिलिटी और क्रिएटिव वर्क) को इस फंक्शनल तरीके से ढाला जिससे उनके काम का असर और उपलब्धियां सीवी में सबसे ऊपर और साफ-साफ दिखाई दें।
करियर ब्रेक और पहचान खोने के मानसिक तनाव पर दी अहम सलाह
नौकरी की तलाश में भटक रहे और रिजेक्शन से निराश युवाओं व महिलाओं को प्रेरित करते हुए अन्नपूर्णा ने कहा कि जब करियर में ब्रेक आता है, तो लोग अक्सर अपनी पहचान खोने के डर और मानसिक तनाव के बारे में खुलकर बात नहीं करते।
उन्होंने एक बेहद खूबसूरत सलाह देते हुए कहा, “एक गैप केवल समय का एक अंतराल (गैप) है, वह कभी भी आपकी पुरानी योग्यताओं, ज्ञान और कला को मिटा नहीं सकता। इसलिए लंबी और थकाऊ भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान मिलने वाले हर रिजेक्शन को व्यक्तिगत रूप से अपने दिल पर न लें। कुछ कमियां शायद आपकी स्ट्रेटेजी में हो सकती हैं जिन्हें सुधारा जा सकता है, लेकिन बहुत सी चीजें उस वक्त की जॉब मार्केट की आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती हैं।”
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