Horizon Industrial Parks: घाटे और भारी कर्ज का असर, ग्रे मार्केट में सुस्त पड़ा IPO का प्रीमियम

लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से जुड़े Horizon Industrial Parks के पब्लिक इश्यू को लेकर प्राइमरी मार्केट में हलचल तेज है। हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति और लगातार दर्ज किए जा रहे घाटे का सीधा नकारात्मक प्रभाव इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर देखने को मिल रहा है। अनलिस्टेड मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर निवेशकों का रुझान बेहद ठंडा नजर आ रहा है, जिससे लिस्टिंग पर बड़े मुनाफे की उम्मीदें काफी कमजोर पड़ गई हैं।

ग्रे मार्केट में लुढ़का प्रीमियम: जानिए क्या हैं संकेत

ग्रे मार्केट के ताजा रुझानों के मुताबिक, ₹57 से ₹60 के तय प्राइस बैंड के मुकाबले Horizon Industrial Parks का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) गिरकर लगभग ₹1 से ₹1.5 प्रति शेयर के आसपास आ गया है। इससे पहले यह प्रीमियम ₹4.50 के स्तर तक देखा गया था। वर्तमान जीएमपी के हिसाब से शेयर की संभावित लिस्टिंग लगभग ₹61 से ₹61.5 के करीब मानी जा रही है, जो कि महज 1.5% से 2.5% के मामूली लिस्टिंग गेन (Listing Gain) का संकेत है। इस सुस्ती के पीछे कमजोर सब्सक्रिप्शन और कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

लगातार घाटा और भारी कर्ज बना निवेशकों की चिंता का कारण

कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) और वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, Horizon Industrial Parks का रेवेन्यू तो बढ़ा है लेकिन कंपनी का बॉटम-लाइन घाटे में बना हुआ है।

  • नेट लॉस: कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में ₹767.84 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹203.65 करोड़ का शुद्ध घाटा (PAT Loss) दर्ज किया है, जबकि इससे पिछले साल भी कंपनी ₹178.78 करोड़ के घाटे में थी।

  • कर्ज का बोझ: कंपनी की बैलेंस शीट पर ₹6,884 करोड़ से अधिक का भारी कर्ज (Borrowings) मौजूद है।

बाजार जानकारों की राय और आगे की राह

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जो निवेशक सिर्फ लिस्टिंग गेन के उद्देश्य से दांव लगाते हैं, उनके लिए यह सुस्त जीएमपी एक सतर्कता का संकेत है। भारी कर्ज और लगातार नुकसान के चलते शॉर्ट-टर्म में बड़ा अपसाइड दिखना मुश्किल नजर आ रहा है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म निवेशक जो देश के वेयरहाउसिंग और इंडस्ट्रियल पार्क सेक्टर के विस्तार पर भरोसा रखते हैं, वे कंपनी के फंड उपयोग और लोन रीपेमेंट की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।