
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मौसमी बदलाव और उमस भरी गर्मी के बीच स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-ए के कुल मामलों में से 1,777 मरीजों में खतरनाक H1N1 स्ट्रेन की पुष्टि हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से सतर्कता बढ़ाते हुए आम नागरिकों और अस्पतालों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।
तेजी से बढ़ रहे मामले और अस्पतालों में हाई अलर्ट
आंकड़ों के मुताबिक, हाल के दिनों में सामने आ रहे इन्फ्लुएंजा मामलों में 70% से अधिक हिस्सेदारी केवल H1N1 स्ट्रेन की है। राजधानी के 35 प्रमुख अस्पतालों को विशेष निगरानी में रखा गया है और एम्स (AIIMS) तथा नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) को प्रमुख रेफरल लैब बनाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन बेड्स, वेंटिलेटर और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
स्वाइन फ्लू (H1N1) के प्रमुख लक्षण
स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम लोगों से अपील की है कि वे सामान्य सर्दी-जुकाम और स्वाइन फ्लू के अंतर को समझें और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें। H1N1 संक्रमण होने पर निम्न लक्षण दिखाई देते हैं:
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तेज बुखार और ठंड लगना
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लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी और गले में तेज खराश
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गंभीर सिरदर्द, अत्यधिक थकान और शरीर की मांसपेशियों में तेज दर्द
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सांस लेने में तकलीफ या सीने में भारीपन
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कुछ मामलों में उल्टी, दस्त और भूख न लगना
स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी: संक्रमण से कैसे बचें?
संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सख्त गाइडलाइंस का पालन करने की सलाह दी है:
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मास्क का अनिवार्य उपयोग: सार्वजनिक परिवहन, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाली बंद जगहों पर जाते समय मास्क जरूर पहनें।
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हाथों की स्वच्छता: हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं या अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
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रेस्पिरेटरी हाइजीन: खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या कोहनी से ढकें।
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सेल्फ-मेडिकेशन से परहेज: लक्षण दिखने पर बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक्स या एंटीवायरल दवाएं न लें।
हाई-रिस्क ग्रुप को विशेष सावधानी की जरूरत
चिकित्सकों के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के छोटे बच्चे, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज, अस्थमा, किडनी या हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। ऐसे लोगों को लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।
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