
आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक मानसिक तनाव, असंतुलित खानपान और गतिहीन दिनचर्या के कारण हृदय रोग आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं। अक्सर माना जाता है कि दिल का दौरा (Heart Attack / Myocardial Infarction) एकदम अचानक और बिना किसी चेतावनी के पड़ता है, लेकिन मेडिकल साइंस और कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार हृदय की धमनियों में रुकावट (Blockage) आने पर शरीर कई हफ्ते या लगभग 1 महीने पहले से ही सूक्ष्म चेतावनी संकेत देने लगता है। यदि इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत चिकित्सीय जांच कराई जाए, तो किसी भी बड़ी अनहोनी और जानलेवा स्थिति से आसानी से बचा जा सकता है।
अकारण अत्यधिक थकान और शारीरिक कमजोरी
बिना किसी भारी काम या मेहनत के लगातार सुस्ती और अत्यधिक थकान महसूस होना हार्ट अटैक के सबसे शुरुआती लक्षणों में से एक है। जब कोरोनरी धमनियों में प्लाक जमने के कारण हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक जोर लगाना पड़ता है, तो शरीर के अन्य अंगों तक ऑक्सीजन युक्त खून पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता। इसके कारण व्यक्ति सामान्य दैनिक गतिविधियों में भी पूरी तरह थका हुआ और ऊर्जाहीन महसूस करने लगता है।
सांस लेने में तकलीफ और थोड़ी सी गतिविधि पर हांफना
यदि सीढ़ियां चढ़ते समय, तेज चलते हुए या आराम की मुद्रा में भी आपकी सांस फूलने लगे, तो इसे केवल फेफड़ों की समस्या मानकर अनदेखा न करें। हृदय और फेफड़े रक्त परिसंचरण प्रणाली में मिलकर काम करते हैं। जब हृदय पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों में तरल पदार्थ का संचय होने लगता है, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बाधित होता है और सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है।
सीने में रुक-रुक कर भारीपन, जकड़न या हल्का दबाव
दिल का दौरा पड़ने से कुछ हफ्ते पहले सीने के बीचों-बीच या बाईं तरफ हल्का दबाव, जलन, खिंचाव या जकड़न महसूस हो सकती है। इसे अक्सर लोग सामान्य गैस, अपच या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि यह भारीपन शारीरिक परिश्रम करने पर बढ़ता है और आराम करने पर कम हो जाता है, तो यह एनजाइना (Angina) का स्पष्ट संकेत हो सकता है, जो धमनियों में गंभीर रुकावट की ओर इशारा करता है।
गर्दन, जबड़े, पीठ और बाएं हाथ में दर्द का फैलना
हृदय संबंधी दर्द हमेशा केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। कई बार दर्द सीने से शुरू होकर बाएं कंधे, पूरे बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े के निचले हिस्से या ऊपरी पीठ (दोनों कंधों के बीच) की तरफ फैलता है। विशेष रूप से सुबह के समय जबड़े या दांतों में अकारण होने वाला खिंचाव और दर्द हृदय की मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी का अप्रत्यक्ष लक्षण हो सकता है।
बिना गर्मी या मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आना
सामान्य तापमान और पंखे-एसी के नीचे बैठे रहने के बावजूद अचानक माथे और हथेलियों पर ठंडा पसीना (Cold Sweats) आना कार्डियोवैस्कुलर संकट का संकेत माना जाता है। जब हृदय अवरुद्ध धमनियों के माध्यम से रक्त को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करता है, तो शरीर का ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए अचानक पसीना निकलने लगता है।
लगातार अपच, पेट में जलन, मतली या भूख में कमी
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों में पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखी जाती हैं। पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार भारीपन, गैस बनना, उल्टी जैसा महसूस होना (Nausea) और बिना कुछ खाए पेट भरा-भरा लगना पेट की समस्या के बजाय हृदय के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह घटने का नतीजा हो सकता है।
दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज या अनियमित होना (Palpitations)
बिना किसी डर, घबराहट या दौड़-भाग के अचानक दिल की धड़कनों का बहुत तेज हो जाना, धड़कन का रुक-रुक कर चलना या सीने में फड़कन जैसा महसूस होना ‘एरिदमिया’ (Arrhythmia) का संकेत हो सकता है। जब हृदय की मांसपेशियों को नियमित रूप से रक्त नहीं मिलता, तो उसकी विद्युत प्रणाली (Electrical System) असंतुलित हो जाती है।
पैरों के तलवों, टखनों और पंजों में लगातार सूजन (Edema)
हृदय की पंपिंग क्षमता कमजोर पड़ने पर शरीर का रक्त परिसंचरण धीमा हो जाता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण के कारण निचली नसों में खून और तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप पैरों, पंजों और टखनों में सूजन आ जाती है। यदि जूते अचानक तंग लगने लगें या पैरों पर उंगली दबाने से गड्ढा बनने लगे, तो यह कमजोर होते दिल का संकेत हो सकता है।
चक्कर आना, सिर घूमना और अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना
मस्तिष्क को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए निरंतर ऑक्सीजन और ग्लूकोज की आवश्यकता होती है। जब हृदय पर्याप्त मात्रा में रक्त दिमाग तक नहीं भेज पाता, तो ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है। इसके कारण व्यक्ति को अचानक सिर चकराना, हल्कापन महसूस होना या खड़े होते ही आंखों के आगे अंधेरा छा जाने जैसी शिकायतें होने लगती हैं।
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