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दिल्ली का लाल किला कितना विशाल है? जानिए 254 एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक किले की हैरान करने वाली बातें

भारत की राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित लाल किला (Red Fort) केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं है, बल्कि यह देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री यहीं से तिरंगा फहराकर देश को संबोधित करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि मुगलों के काल में बना यह भव्य किला अंदर से कितना बड़ा है और इसकी बनावट से जुड़े हैरान करने वाले तथ्य क्या हैं? यदि आप इसके क्षेत्रफल, लंबी दीवारों और ऊंचाई के बारे में नहीं जानते हैं, तो यह विस्तृत जानकारी आपके लिए बेहद दिलचस्प साबित होगी। आइए जानते हैं कि लाल किला क्षेत्रफल और वास्तुकला के लिहाज से कितना विशाल है।

254 एकड़ में फैला हुआ है विशाल लाल किला परिसर

मुगल सम्राट शाहजहां ने जब अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला किया, तब उन्होंने सन 1638 में इस भव्य किले की नींव रखी थी। इसे बनने में लगभग 10 साल का समय लगा और यह 1648 में बनकर पूरी तरह तैयार हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लाल किला लगभग 254.67 एकड़ (यानी करीब 255 एकड़) के विशाल भूभाग में फैला हुआ है। इस बड़े परिसर के भीतर केवल एक महल नहीं है, बल्कि कई शानदार इमारतें, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, रंग महल, हमाम और खूबसूरत बगीचे शामिल हैं जो उस दौर की वास्तुकला की उत्कृष्टता को बयां करते हैं।

2.4 किलोमीटर लंबी और मजबूत सुरक्षा दीवारें

इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत और चौड़ी दीवारें हैं, जो इसे एक अजय किले का स्वरूप देती हैं। लाल किले के चारों तरफ बनी रक्षात्मक दीवारों की कुल लंबाई लगभग 2.4 किलोमीटर (2.41 किमी) है। लाल बलुआ पत्थर से बनी इन दीवारों का मुख्य काम आक्रमणकारियों से शाही परिवार और राजमहल की रक्षा करना था। इन दीवारों की बनावट और मोटाई इतनी जबरदस्त है कि सदियां बीत जाने के बाद भी इनका रोमांच और मजबूती वैसी की वैसी ही बनी हुई है, जिसे देखने के लिए रोजाना देश-विदेश से हजारों पर्यटक पुरानी दिल्ली पहुंचते हैं।

108 फीट ऊंची दीवारें और अनोखी वास्तुकला

लाल किले की दीवारों की ऊंचाई हर तरफ एक जैसी नहीं है, बल्कि इसकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार इसमें अंतर देखने को मिलता है। शहर की तरफ (City Side) यानी मुख्य जमीन की ओर इन दीवारों की ऊंचाई लगभग 108 फीट (करीब 33 मीटर) तक ऊंची है, जो सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई थी। वहीं दूसरी ओर, जो हिस्सा कभी यमुना नदी के किनारे हुआ करता था, वहां की दीवारों की ऊंचाई लगभग 59 फीट (18 मीटर) है। इस किले का आकार पूरी तरह चौकोर या गोल नहीं बल्कि अष्टकोणीय (Octagonal) है, जो इसकी बनावट को और भी खास बनाता है।

यूनेस्को विश्व धरोहर और इतिहास के पन्नों में इसका महत्व

लगभग 200 वर्षों तक लाल किला मुगल बादशाहों का मुख्य निवास स्थान रहा। इसके बाद इस पर अलग-अलग शासकों और बाद में ब्रिटिश साम्राज्य का नियंत्रण रहा। इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए साल 2007 में यूनेस्को (UNESCO) ने इसे ‘विश्व धरोहर स्थल’ (World Heritage Site) के रूप में मान्यता दी। आज भी जब ऐतिहासिक धरोहरों की बात होती है, तो लाल किले का नाम सबसे ऊपर आता है। इसकी भव्यता, ऐतिहासिक घटनाएं और वास्तुकला आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं और भारत के समृद्ध अतीत की कहानी कहती हैं।