
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की साधना के लिए सबसे उत्तम और कल्याणकारी माना गया है। आज ज्येष्ठ मास के अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का पावन ‘गुरु प्रदोष व्रत’ रखा जा रहा है। गुरु प्रदोष के दिन देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना करने से न सिर्फ वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, बल्कि कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त नियमपूर्वक 26 प्रदोष व्रत का संकल्प पूरा कर लेता है, महादेव उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। अगर आप भी आज भोलेनाथ की कृपा पाना चाहते हैं, तो शाम के समय (प्रदोष काल) एक छोटा सा उपाय जरूर करें।
गुरु प्रदोष व्रत के अचूक उपाय: ऐसे प्रसन्न होंगे महादेव
प्रदोष व्रत में ‘प्रदोष काल’ यानी सूर्यास्त के ठीक बाद और रात्रि के आगमन के बीच के समय का सबसे ज्यादा महत्व होता है। आज शाम के समय भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए इस आसान विधि को अपनाएं:
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तांबे के लोटे का उपाय: शाम के समय अपने घर से एक साफ लोटे में शुद्ध जल भरें और साथ में गाय के घी का एक दीपक तैयार कर शिव मंदिर जाएं।
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अभिषेक और दीपदान: मंदिर पहुंचकर सबसे पहले पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव की मूर्ति/शिवलिंग और उनके प्रिय वाहन नंदी महाराज के बीच वाले स्थान पर घी का दीपक प्रज्वलित कर दें।
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में नंदी और शिवजी के मध्य दीपदान करने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक के जीवन में कभी भी धन-धान्य, सुख और समृद्धि की कमी नहीं होने देते।
जून 2026 में कब-कब है प्रदोष व्रत? नोट करें तारीखें
अगर आप जून के महीने में आने वाले प्रदोष व्रतों की लिस्ट देखना चाहते हैं, तो इस साल जून में दो बेहद खास प्रदोष व्रत पड़ने जा रहे हैं:
1. शुक्र प्रदोष व्रत (12 जून 2026): यह अधिक मास का आखिरी प्रदोष व्रत होगा। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून को रात 07 बजकर 36 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 13 जून को शाम 04 बजकर 07 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष काल की पूजा रात के समय होती है, इसलिए 12 जून को ही शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
2. शनि प्रदोष व्रत (27 जून 2026): अधिक मास समाप्त होने के बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ‘शनि प्रदोष व्रत’ रखा जाएगा। शनिवार के दिन प्रदोष व्रत आने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की पूजा करने से शनि के सभी कष्टों और साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है।
व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, इन बातों का रखें ध्यान
प्रदोष व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए व्रतियों को कुछ जरूरी नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
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प्रदोष काल का समय: सबसे पहले अपने शहर के अनुसार प्रदोष काल (शाम की पूजा का मुहूर्त) का सही समय नोट कर लें, क्योंकि मुख्य पूजा इसी अवधि में होनी चाहिए।
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दिन में सोने से बचें: व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को प्रदोष व्रत के दिन, विशेषकर दोपहर या शाम के समय सोने से बचना चाहिए। इस समय को शिव नाम संकीर्तन में बिताना शुभ होता है।
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कथा और दान: पूजा के समय प्रदोष व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। इसके साथ ही अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें, जिससे व्रत की पूर्णता होती है।
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