
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब तक इस जंग में पर्दे के पीछे से शामिल था, लेकिन उसने ईरान के अंदर घुसकर सीधे हमले शुरू कर दिए हैं। इस खुलासे ने खाड़ी देशों (Gulf Countries) के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
लवन द्वीप की रिफाइनरी पर ‘सर्जकल स्ट्राइक’
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा करने की तैयारी कर रहे थे, ठीक उसी वक्त UAE के लड़ाकू विमानों ने ईरान के ‘लवन द्वीप’ (Lavan Island) स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। यह ईरान की 10वीं सबसे बड़ी रिफाइनरी है, जहां रोजाना 60,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इस गुप्त हमले ने रिफाइनरी की क्षमता को महीनों के लिए ठप कर दिया है। हालांकि UAE ने सार्वजनिक रूप से इस हमले को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन अमेरिकी सरकार ने चुपके से इस कदम का स्वागत किया है।
ईरान का पलटवार: 2800 मिसाइलों की बौछार
ईरान ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ बताते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई की। ईरान की ओर से अब तक UAE पर 2,800 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दागे जा चुके हैं। यह संख्या इजरायल पर हुए हमलों से भी कहीं ज्यादा है। 8 अप्रैल को ईरान ने जवाबी कार्रवाई में UAE और कुवैत पर 17 बैलिस्टिक मिसाइलें और 35 ड्रोन दागे थे। इस ‘आठवें मोर्चे’ की जंग ने UAE की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। दुबई और अबू धाबी के शेयर बाजारों से 120 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति साफ हो चुकी है और हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।
मध्यस्थ देशों में दरार और भारत की चिंता
UAE की इस सीधी एंट्री ने खाड़ी देशों के बीच फूट डाल दी है। ईरान ने सऊदी अरब और ओमान को चेतावनी दी है कि वह विशेष रूप से UAE को निशाना बनाएगा। वहीं, पाकिस्तान जो इस युद्ध में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा था, उस पर भी आरोप लगे हैं कि उसने अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए ईरानी विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी है। इस पूरे घटनाक्रम से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और खाद की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
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